Jaishankar Ukraine Peace Dialogue: भारत के विदेश मंत्री (EAM) डॉ. एस. जयशंकर ने रविवार को यूक्रेन के विदेश मंत्री अंद्रीय सिबिहा से टेलीफोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच यह संवाद रूस यूक्रेन युद्ध से जुड़े नवीनतम घटनाक्रमों और संभावित शांति प्रयासों पर केंद्रित रहा। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए लिखा यूक्रेन के विदेश मंत्री अंद्रीय सिबिहा से बीती शाम टेलीफ़ोन पर बातचीत हुई। यूक्रेन संघर्ष से जुड़ी ताज़ा स्थिति के बारे में उनके ब्रीफिंग की सराहना करता हूँ। भारत इस संघर्ष के शीघ्र अंत और स्थायी शांति की स्थापना के प्रयासों का समर्थन करता है।
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दोनों मंत्री इससे पहले नवंबर में कनाडा में हुई G7 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान मिले थे, जहां द्विपक्षीय सहयोग, शांति की दिशा में संभावित रास्तों और युद्धक्षेत्र की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई थी। भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि किसी भी राजनीतिक या सैन्य गतिरोध का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के रास्ते ही संभव है यही एक न्यायसंगत और दीर्घकालिक समाधान का मार्ग है।
उधर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने एक गंभीर राष्ट्रीय संबोधन में चेतावनी दी कि यूक्रेन अपने इतिहास के सबसे कठिन दौरों में से एक का सामना कर रहा है। इस बीच अमेरिका की ओर से यूक्रेन को एक प्रस्तावित शांति योजना पर जवाब देने के लिए 27 नवंबर की समय सीमा दी गई है। रिपोर्टों के अनुसार यूक्रेन में कई लोग इस योजना को रूस के हितों की ओर झुका हुआ मान रहे हैं। दूसरी ओर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस ड्राफ्ट को संभावित समझौते का आधार बताया है।
ज़ेलेंस्की ने अपने संबोधन में कहा कि यूक्रेन बहुत कठिन विकल्प का सामना कर सकता है या तो सम्मान खोने का खतरा, या एक महत्वपूर्ण साझेदार खोने का जोखिम। उन्होंने आश्वासन दिया कि यूक्रेन अपने “सम्मान और स्वतंत्रता” की रक्षा करेगा और अमेरिका के साथ रचनात्मक सहयोग जारी रखेगा।
इसी संदर्भ में,अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि यह शांति प्रस्ताव पूरी तरह अमेरिका द्वारा तैयार किया गया है, जिसमें रूस और यूक्रेन दोनों से मिले सुझाव शामिल किए गए हैं। उन्होंने जेनेवा रवाना होते हुए कहा कि इस दस्तावेज़ का उद्देश्य युद्ध समाप्त करने की एक गंभीर पहल है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका द्वारा समर्थित शांति प्रस्ताव अभी उनका अंतिम प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की इस सुझाव को स्वीकार नहीं करते तो वे “अपनी पूरी ताकत से लड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह यह युद्ध खत्म होना चाहिए, और यह भी दावा दोहराया कि यदि वे 2022 में राष्ट्रपति होते तो यह युद्ध शुरू ही नहीं होता।
भारत की ओर से लगातार यह आग्रह रहा है कि अंतरराष्ट्रीय शांति केवल कूटनीति से ही संभव है और इस दिशा में जयशंकर सिबिहा संवाद एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
