Piyush Goyal Netanyahu meeting: भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात में न सिर्फ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हार्दिक संदेश पहुंचाए बल्कि, द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग के नए अध्याय का भी खाका प्रस्तुत किया। तीन दिवसीय इज़रायल यात्रा के अंत में हुई इस मुलाकात ने साफ़ कर दिया कि भारत–इज़रायल संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि तकनीकी, औद्योगिक और रणनीतिक दृष्टि से भी गहराई पकड़ रहे हैं।
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भारत और इज़रायल के संबंधों की नींव हमेशा से आपसी विश्वास और व्यावहारिक सहयोग पर आधारित रही है। लेकिन बीते तीन दिन की यात्रा ने इन संबंधों को एक नई संरचना की दिशा दी है। पीयूष गोयल ने नेतन्याहू को अपडेट देते हुए बताया कि इस दौर में इज़रायल के अर्थव्यवस्था मंत्री नीर बारकात से हुई बैठक, CEOs फोरम और बिज़नेस फोरम के जरिए उद्योग क्षेत्र में बड़े स्तर पर संवाद स्थापित हुआ।
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यहां सबसे बड़ा कदम था FTA यानी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (मुक्त व्यापार समझौता) के लिए Terms of Reference का साइन होना। यह वैसा संकेत है जैसा भारत कई वर्षों से रणनीतिक दृष्टि से करता आया है साझेदारी बढ़ाना, लेकिन अपने औद्योगिक हितों को साथ लेकर। सरल भाषा में कहा जाए तो FTA का अर्थ है कम टैरिफ़, तेज़ व्यापार, और मजबूत तकनीकी साझेदारी। व्यापार बाधाओं के हटने से दोनों देशों के उद्योगों को अवसर मिलेगा विशेषकर टेक, रक्षा, कृषि और जल प्रबंधन क्षेत्र में।
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गोयल ने एक महत्वपूर्ण पहलू पर भी प्रकाश डाला इज़रायल की हाई–टेक क्षमता और भारत की विशाल प्रतिभा एवं बाज़ार। यानी एक तरफ़ इज़रायल की cutting-edge research, दूसरी तरफ़ भारत का large-scale execution और manpower advantage। इस तरह का कॉम्बिनेशन दोनों देशों को न केवल एक-दूसरे के करीब लाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक महत्वपूर्ण आर्थिक इकाई बनाता है।
गोयल का यह बयान महत्वपूर्ण है कि भारत–इज़रायल FTA को दो चरणों में लागू करने की योजना है। इसका मतलब है कि समझौता जल्द से जल्द उद्योग जगत पर असर दिखाएगा। पहले चरण में तेज़ लाभ वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा सकती है जैसे टेक्नोलॉजी ट्रांसफ़र, इनोवेशन और रक्षा क्षेत्र में सहयोग।
विश्लेषण के स्तर पर देखें तो भारत का यह कदम वैश्विक व्यापार-गठबंधनों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। अमेरिका, यूरोप, UAE और अब इज़रायल ये सभी भारत के लिए तकनीक और निवेश आकर्षित करने के बड़े स्रोत हैं। इज़रायल विशेष रूप से पानी के प्रबंधन, कृषि तकनीक, स्मार्ट सुरक्षा और स्टार्टअप इनोवेशन के क्षेत्र में अग्रणी रहा है, और भारत इन क्षेत्रों में विस्तार चाहता है।
इस यात्रा का एक और संकेत यह भी है कि भारत केवल राजनीतिक संबंध नहीं, बल्कि व्यावहारिक आर्थिक परिणाम चाहता है। गोयल का यह कहना कि 20 साल बाद किसी भारतीय वाणिज्य मंत्री की यह सफल यात्रा रही यह दर्शाता है कि भारत इस संबंध को सिर्फ़ स्टेटमेंट्स में नहीं बल्कि ग्राउंड–लेवल व्यापार और निवेश में बदलना चाहता है।
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पीयूष गोयल की यह यात्रा भारत और इज़रायल संबंधों के लिए आगे का रास्ता साफ़ करती है। सकारात्मक ऊर्जा, सामूहिक उद्देश्य, और पूरक आर्थिक क्षमता यह मुलाक़ात दोनों देशों के भविष्य में आर्थिक ब्लूप्रिंट चुनने की नींव साबित हो सकती है।
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