India academia industry innovation: भारत में शिक्षा और उद्योग के बीच गहरे संबंध बनने लगे हैं यह बात केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को कही। नई दिल्ली में आयोजित Academy of Scientific and Innovative Research (AcSIR) के नौवें दीक्षांत समारोह में उन्होंने कहा कि भारत अब कल्पनाशीलता, नवाचार और उद्योग से जुड़े शोध को एक साथ आगे बढ़ा रहा है।
Read More: INS Sahyadri और HMAS Ballarat ने उत्तरी प्रशांत में AUSINDEX 2025 में दिखाई सामरिक एकजुटता
भारत आज तेजी से उस दिशा में बढ़ रहा है जहां विश्वविद्यालयों की पढ़ाई और उद्योग की ज़रूरतें एक दूसरे की पूरक बनती जा रही हैं। इसी सोच को आगे ले जाने के लिए AcSIR द्वारा 2023 में शुरू किया गया i-PhD प्रोग्राम विशेष रूप से चर्चा में है। मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य किताबों में सीमित ज्ञान से आगे बढ़कर ऐसे शोध को प्रोत्साहित करना है, जिससे सीधे उद्योग, स्टार्टअप और समाज को लाभ मिल सके।
उन्होंने कहा कि i-PhD का ‘i’ सिर्फ़ उद्योग (Industry) के लिए नहीं, बल्कि कल्पना (Imagination) और नवाचार (Innovation) के लिए भी है। यानी शोध का लक्ष्य सिर्फ़ सैद्धांतिक न होकर उपयोगी होना चाहिए ऐसा शोध, जिसे प्रयोगशाला से निकालकर व्यावहारिक दुनिया में लागू किया जा सके।
READ MORE: Piyush Goyal ने PM मोदी की शुभकामनाएं नेतन्याहू तक पहुंचाईं, व्यापार संवाद में प्रगति का संकेत
मंत्री ने बताया कि आज AcSIR में लगभग 7,000 छात्र पढ़ रहे हैं जिन्हें देशभर के 79 परिसरों में फैले 3,100 से अधिक प्रमुख वैज्ञानिकों द्वारा मार्गदर्शन दिया जा रहा है। यह संस्था अब एक “Shared National University” बन चुकी है यानी ऐसा राष्ट्रीय मंच जो विभिन्न विषयों के शोधकर्ताओं को एकजुट करता है और उन्हें बातचीत, विचार-विमर्श और सहयोग का माहौल प्रदान करता है।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि AcSIR ने भारत के युवाओं में शोध के प्रति नया उत्साह पैदा किया है। आज युवा सिर्फ़ नौकरी की तलाश में नहीं हैं वे स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं, तकनीकी समाधान बनाना चाहते हैं, और उद्यमी बनकर देश को आगे बढ़ाना चाहते हैं। i-PhD जैसे कार्यक्रम छात्रों को स्टार्टअप के लिए ज़मीन तैयार करते हैं, उन्हें परामर्शदाता बनने और तकनीक विकसित करने का अवसर देते हैं।
Read More: करगिल वीर दीपचंद ने महाकालेश्वर मंदिर में किए दर्शन: एक सैनिक की आस्था और सिस्टम से मौन सवाल
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में विज्ञान और नवाचार को अभूतपूर्व प्राथमिकता मिली है। पहले विज्ञान को एक सीमित क्षेत्र माना जाता था, लेकिन अब यह देश की अर्थव्यवस्था, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, तकनीकी विकास और सरकारी नीतियों के केंद्र में है।
मंत्री ने उल्लेख किया कि AcSIR की स्थापना एक साहसिक प्रयोग थी एक ऐसी पहल जो पारंपरिक विश्वविद्यालय मॉडल से आगे बढ़कर नए शोध इकोसिस्टम का निर्माण करना चाहती थी। कई लोग शुरुआत में इस विचार को ठीक से समझ नहीं पाए, लेकिन आज इसका तेज़ विस्तार साबित करता है कि देश ऐसे मॉडल के लिए तैयार था।
READ MORE: जोहान्सबर्ग G20 समिट में भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका और सार्थक वार्ताएं
अंत में उन्होंने कहा कि जब भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तो इसमें नवाचार और तकनीक की भूमिका सबसे निर्णायक होगी। और इस परिवर्तन यात्रा में AcSIR के छात्र और वैज्ञानिक टॉर्चबेयरर यानी मार्गदर्शक होंगे चाहे वह दीपनवाचार (Deep-Tech) हो, स्वास्थ्य विज्ञान, कृषि की स्थायी तकनीकें, जलवायु विज्ञान या भविष्य की उभरती तकनीकें। भारत के युवा शोधकर्ता अब सिर्फ़ सपने नहीं देखते वे उस पर काम करते हैं, उसे आकार देते हैं और उसे देश के विकास के साथ जोड़ते हैं। यही नई वैज्ञानिक संस्कृति आज भारत को वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों की ओर ले जा रही है।
Follow Us: YouTube| TV TODAY BHARAT LIVE | Breaking Hindi News Live | Website: Tv Today Bharat| X | FaceBook | Quora| Linkedin | tumblr | whatsapp Channel | Telegram
