Wing Commander Namansh Syal final salute: कांगड़ा गांव में गहरी सन्नाटा और दुख की लहर थी, जब विंग कमांडर अफशां ने अपने पति, विंग कमांडर नमांश स्याल को अंतिम सलामी दी। वह क्षण सिर्फ एक रस्म नहीं था वह प्रेम, कर्तव्य, और बलिदान का सबसे मौन लेकिन सबसे बुलंद बयान था। कांगड़ा की संकरी गलियां उस दिन शांत थीं इतनी शांत कि मानो हवा तक ठहर गई हो। हर घर, हर चेहरा और हर आंगन पर दुःख का रंग चढ़ा हुआ था। गांव वाले एक-एक करके शहीद नमांश के परिवार के पास पहुंचे, हाथ जोड़कर श्रद्धांजलि दी, मगर शब्द कोई नहीं बोल पाया, क्योंकि कभी-कभी दुःख इतना बड़ा होता है कि शब्द उसके सामने छोटे पड़ जाते हैं।

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एक वीर सैनिक की आख़िरी यात्रा
नमांश स्याल, जो दुबई में तेजस डेमो फ्लाइट के दौरान शहीद हुए, बचपन से ही भारतीय वायुसेना में जाने का सपना देखते थे। लोगों ने बताया कि वह अक्सर गांव के बच्चों को विमान उड़ाने की कहानियां सुनाया करते थे, और उनके सपनों में आसमान ही उनका घर था। जब उनका पार्थिव शरीर भारतीय ध्वज में लिपटा गांव पहुंचा, तो हर तरफ हृदय रो पड़ा।
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अफशां का साहस सबसे ऊंची सलामी
सबसे मार्मिक क्षण तब आया, जब अफशां आगे बढ़ीं और सीधे अपने पति के सामने सलामी में खड़ी हो गईं। वह सैनिक पत्नी थीं संभली हुई, दृढ़, पर भीतर से टूटी हुई।

उनकी आंखें भरी थीं, लेकिन चेहरा दृढ़ था।
उन्होंने सलामी दी… और उस पल में खामोशी इतनी गहरी थी कि मानो पूरा गांव एक साथ सांस रोककर खड़ा हो गया। ग्रामीण बताते हैं कि अफशां के इस कदम ने सिर्फ नमांश को सम्मान नहीं दिया इसने पूरे देश को याद दिलाया कि हमारे वर्दीधारी जवान सिर्फ अपना जीवन ही नहीं देते, बल्कि उनके परिवार भी उतना ही बड़ा बलिदान झेलते हैं।
मां-बाप का गम और गर्व
नमांश के पिता की आंखों में रोके हुए आंसू थे। उन्होंने बस इतना कहा, ‘वह हमारी शान था…आज वह देश की शान बन गया।‘ मां बार-बार उसके चेहरे को छूती रहीं, मानो उन्हें इस सच पर विश्वास नहीं हो रहा था कि उनका बेटा अब सिर्फ स्मृतियों में रहेगा।
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गांव का दर्द देश का गर्व
उस दिन कांगड़ा एक छोटा गांव नहीं रहा वह एक प्रतीक बन गया। वह भारतीय वीरता का गांव बन गया। वह बलिदान की मिट्टी बन गया। बच्चे चुप खड़े थे, बुजुर्ग सिर झुकाकर, महिलाएँ आंखों में आँसू लिए हुए। लेकिन सबमें एक भावना समान थी नमांश पर गर्व।
वह आसमान जो अब उसका है
नमांश स्याल अब इस धरती पर नहीं…लेकिन वह उस आसमान में है जहाँ कोई सीमा नहीं, कोई अवरोध नहीं, जहां पायलट उड़ते नहीं विलीन हो जाते हैं।
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अफशां ने अंत में पति के तिरंगे पर झुककर हल्की-सी आवाज़ में कहा, ‘तुम हमेशा मेरे हीरो रहोगे…’ और यह वाक्य गांव की गलियों में घुमड़कर रह गया एक अमिट स्मारक की तरह। यह केवल एक गांव की कहानी नहीं है। यह हर उस घर की कहानी है जहाँ कोई बेटा, पति, पिता, भाई वर्दी पहनकर देश के लिए जाता है… और फिर कभी वापस नहीं आता। नमांश स्याल अमर रहेंगे उनके साहस में, उनके कर्तव्य में, और उस सलामी में जो उनकी पत्नी ने उन्हें दी… अंतिम, लेकिन सबसे महान। भारत अपने वीरों को सलाम करता है।
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