India data centre revenue growth FY28: भारत में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा-ड्रिवन सेवाओं की तेजी से बढ़ती मांग ने डेटा सेंटर उद्योग को अगले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व विस्तार की ओर धकेल दिया है। CRISIL रेटिंग्स की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, देश में डेटा सेंटर ऑपरेटर्स की वार्षिक आय FY2028 तक बढ़कर 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी, जो 20–22 प्रतिशत की मजबूत वार्षिक वृद्धि को दर्शाती है। यह ट्रेंड न केवल तकनीकी बदलावों का परिणाम है, बल्कि भारत के डिजिटल इकोसिस्टम की गहराई और विस्तार का भी प्रमाण है।
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डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और डेटा खपत में उछाल
रिपोर्ट बताती है कि भारत में डिजिटल तकनीकों का प्रसार चाहे वह एंटरप्राइज़-क्लाउड माइग्रेशन हो, ई-कॉमर्स का विस्तार, बैंकिंग और फाइनेंस का डिजिटलीकरण हो, या रिटेल उपभोक्ताओं की स्ट्रीमिंग-आधारित डेटा खपत इन सभी ने डेटा सेंटर क्षमता की मांग को लगातार बढ़ाया है। आज भारत में प्रति व्यक्ति डेटा खपत दुनिया में सबसे अधिक मानी जा रही है। 5G नेटवर्क रोलआउट, हाई-स्पीड इंटरनेट और OTT प्लेटफ़ॉर्म का विस्तार इस मांग को और ज्यादा मजबूत बना रहा है।
क्षमता में दोगुनी वृद्धि, 2028 तक 2.5GW तक पहुंचने का अनुमान
इस मांग को पूरा करने के लिए डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश की आवश्यकता होगी। अनुमान है कि मार्च 2028 तक उद्योग की वर्तमान क्षमता दोगुनी होकर 2.3–2.5 गीगावाट तक पहुंच जाएगी यह संकेत है कि भारत वैश्विक स्तर पर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कैपिटल के रूप में उभर रहा है।
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CRISIL रेटिंग्स के निदेशक आनंद कुलकर्णी के अनुसार, FY2026–2028 के दौरान लगभग 1.1–1.3 GW की अतिरिक्त क्षमता कमीशन की जाएगी, जिसका 90, 95% उपयोग सुनिश्चित रहने की उम्मीद है। यह पिछले तीन वित्तीय वर्षों के उपयोग-स्तर के समान है, जो बाज़ार की मजबूती और मांग की निरंतरता को दर्शाता है।
हाइपरस्केलर्स का बढ़ता प्रभुत्व
एक महत्वपूर्ण ट्रेंड यह है कि उद्योग की आय संरचना में हाइपर-स्केल ग्राहकों का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। अमेज़न वेब सर्विसेज़ (AWS), गूगल क्लाउड, माइक्रोसॉफ्ट Azure जैसे हाइपरस्केल प्लेयर्स न केवल दीर्घकालीन अनुबंध करते हैं, बल्कि कैपेसिटी उपयोग और वित्तीय स्थिरता भी सुनिश्चित करते हैं। हाइपरस्केलर्स द्वारा की जाने वाली लॉन्ग-टर्म रिसोर्स लॉकिंग डेटा सेंटर ऑपरेटर्स को स्थिर कैश फ्लो और मजबूत राजस्व दृश्यता प्रदान करती है।
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कर्ज-आधारित कैपेक्स लेकिन संतुलित लीवरेज
उद्योग FY2026–2028 के दौरान 55,000–65,000 करोड़ रुपये का कैपेक्स करेगा। यह पूंजीगत निवेश मुख्यत: डेब्ट-फंडेड होगा, लेकिन चिंता की बात नहीं क्योंकि EBITDA ग्रोथ के चलते उद्योग का लीवरेज 4.6-4.7 गुना के बीच स्थिर रहने की उम्मीद है। CRISIL के एसोसिएट डायरेक्टर नितिन बंसल के अनुसार, स्थिर कैशफ्लो और मजबूत ग्राहक लॉक-इन बिजनेस की फाइनेंशियल प्रोफाइल को सुरक्षित रखेंगे।
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भारत वैश्विक डेटा हब बनने की दिशा में
आज भारत की डेटा सेंटर डेंसिटी मात्र 65MW प्रति एक्साबाइट है जो वैश्विक स्तर पर बेहद कम मानी जाती है। यह निवेशकों को संकेत देती है कि यहाँ विशाल विस्तार की गुंजाइश है।
इसके साथ ही,
• सरकार की डेटा लोकलाइजेशन नीतियां
• ONDC-जैसी डिजिटल पॉलिसी पहलें
• स्टार्ट-अप इकोसिस्टम का विस्तार
• AI और मशीन-लर्निंग का उदय
ये सभी कारक मिलकर भारत को डिजिटल डेटा प्रोसेसिंग और स्टोरेज के केंद्र के रूप में स्थापित कर रहे हैं। तेजी से बदलते डिजिटल युग में डेटा सेंटर उद्योग भारत की आर्थिक संरचना का अभिन्न अंग बनने जा रहा है। FY2028 तक हर क्षेत्र बैंकिंग, टेलीकॉम, मनोरंजन, गेमिंग, ई-गवर्नेंस डेटा-आधारित मॉडलों पर निर्भर होगा। यह अनुमान कि भारत में डेटा सेंटर ऑपरेटर्स की आय 20–22 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी, इस बात का संकेत है कि यह उद्योग आने वाले वर्षों में भारत के डिजिटल-इकोनॉमी ग्रोथ इंजन की प्रमुख शक्ति बन चुका है।
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