कंगना काशी में ऐसे खिली मानो स्वयं पार्वती स्वरूप धरा पर उतर आई हों।
गंगा किनारे उनका आभा इतना दिव्य थी कि लगता था चाँद भी उनकी चमक उधार ले रहा है।
काशी विश्वनाथ के द्वार पर कंगना की उपस्थिति योग और सौंदर्य का मिलन बन गई।
पारंपरिक साड़ी में कंगना स्वर्गीय सांस्कृतिक गरिमा का जीवंत प्रारूप दिखीं।
बनारस की हवाओं में कंगना का शुद्ध और आत्मिक स्टाइल जैसे नया स्पर्श जोड़ गया।
सनातन संस्कृति में रची-बसी, कंगना ने काशी के हर कदम पर आस्था का आनंद लिया।
कंगना का काशी-दर्शन इस बात का प्रमाण था कि ग्लैमर सिर्फ चमक नहीं,आध्यात्मिकता भी है
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मंदिर के आँगन में उनकी सहज मुस्कान एक दिव्य शांति जैसा अनुभव दे रही थी।
मंदिर के आँगन में उनकी सहज मुस्कान एक दिव्य शांति जैसा अनुभव दे रही थी।
कुल्हड़ का चाय की चुस्की लेती सांसद कंगना रनौत
काशी की पुरातनता और कंगना की आधुनिक आभा ने मिलकर एक अनोखी कथा लिख दी।
कंगना की यह यात्रा सौंदर्य और श्रद्धा का ऐसा संगम बनीजिसे कैमरे नहीं, मन याद रखता है।
काशी विश्वनाथ के द्वार पर कंगना की उपस्थिति योग और सौंदर्य का मिलन बन गई।
काशी में एक दिन
भगवान शिव और माँ पार्वती की प्यारी नगरी