New Delhi TTB, November 29: चक्रवात Ditwah के बाद श्रीलंका में उत्पन्न संकट की घड़ी में भारत एक बार फिर अपने पड़ोसी देश के साथ मजबूती से खड़ा दिखाई दिया। ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ के तहत भारतीय वायु सेना का C-130J विमान शनिवार को कोलंबो पहुंचा, जिसमें करीब 12 टन राहत सामग्री भेजी गई। इसमें टेंट, तिरपाल, कंबल, हाइजीन किट और तुरंत उपयोग में आने वाले खाद्य पैकेट शामिल हैं। राहत सामग्री प्राप्त होते ही श्रीलंका की ओर से भारत को विशेष धन्यवाद दिया गया।
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस मानवीय सहायता की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर साझा करते हुए लिखा, ‘Operation Sagar Bandhu unfolds… भारत की तरफ़ से 12 टन राहत सामग्री श्रीलंका पहुंची।‘

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राहत का दायरा: INS Vikrant और INS Udaygiri भी लगे सेवा में
चक्रवात Ditwah के चलते श्रीलंका में भारी तबाही हुई और कई लोगों ने अपनी जान गंवाई। ऐसे समय में भारतीय नौसेना की दो प्रमुख युद्धपोत INS Vikrant और INS Udaygiri ने मानवीय राहत सामग्री पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनके माध्यम से 4.5 टन सूखा राशन, 2 टन ताज़ा राशन और अन्य आवश्यक सामग्री जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाई गई। भारतीय उच्चायोग ने भी स्पष्ट संदेश दिया कि यह राहत केवल सामान की आपूर्ति नहीं, बल्कि कठिन समय में एक पड़ोसी राष्ट्र का साथ निभाने की भावना है।
पड़ोसी के प्रति संवेदना PM मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी श्रीलंका के लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना जताई। उन्होंने लिखा चक्रवात Ditwah के कारण जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया, उनके प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं। भारत श्रीलंका के साथ खड़ा है और राहत सामग्री तुरंत रवाना की गई है।‘ यह भी कहा गया कि स्थिति और विकट होने पर भारत और अधिक सहायता देने को तैयार है।
Neighbourhood First नीति का वास्तविक उदाहरण
भारत बीते वर्षों से “Neighbourhood First” नीति पर काम कर रहा है, जिसमें पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और आपसी भरोसा सर्वोपरि है। ‘विजन महासागर’ के तहत समुद्री पड़ोसी राष्ट्रों के साथ संबंध और भरोसा मजबूत करना भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
इस पूरे अभियान में सबसे खास बात यह है कि भारत ने संकट की घड़ी में बिना किसी देरी के सहायता भेजकर श्रीलंका के लिए अपने समर्थन को फिर साबित किया। यह मदद केवल भौतिक नहीं एक भावनात्मक पुल भी है, जो दोनों देशों की जनता को जोड़ता है।
मानवीय रिश्ते और सामरिक विश्वास
भारत और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक सांस्कृतिक संबंध हैं। जब भी श्रीलंका संकट में होता है, भारत सहायता लेकर खड़ा हो जाता है। चक्रवात Ditwah के बाद इस तेजी से भेजी गई सहायता ने दोनों देशों के बीच मानवता पर आधारित संबंधों को और मजबूत किया है। इतिहास गवाह है कि आपदा के समय सहायता केवल राहत नहीं देती, बल्कि विश्वास, सहानुभूति और सहयोग के नए सूत्र भी बुनती है। ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ ने यही संदेश दिया कि भारत का सहयोग औपचारिक नीति नहीं, बल्कि समानुभूति और पड़ोसी धर्म का पालन है।
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