Parliament Winter Session LIVE: दिल्ली में संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होते ही राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ गया है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन को संबोधित करते हुए कई अहम मुद्दों पर सरकार की मंशा और दिशा साफ साफ रखी। यह सत्र केवल एक औपचारिक संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि सरकार और विपक्ष दोनों के लिए अपने-अपने पक्ष को जनता के सामने रखने का एक मंच है और इसी कारण आज का दिन खास रहा।
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प्रधानमंत्री मोदी का संदेश, विकास, विश्वास और विज़न
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि शीतकालीन सत्र देश के लिए महत्वपूर्ण विधायी एजेंडों को आगे बढ़ाने का अवसर है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वैश्विक परिदृश्य में भारत की स्थिति मजबूत हुई है और आज भारत आत्मविश्वास के साथ न केवल घरेलू जरूरतों पर ध्यान दे रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी उपस्थिति मज़बूती से दर्ज करा रहा है।
प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था से जुड़े सुधारों, डिजिटल गवर्नेंस, ग्रामीण विकास, कृषि और रोजगार से जुड़े मसलों पर ध्यान केंद्रित करने का आश्वासन दिया। विशेष रूप से उन्होंने उस बदलाव का भी जिक्र किया जो जन-भागीदारी को केंद्र में रखकर संचालित किया जा रहा है।
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विपक्ष के सवाल, सत्ता और संवाद
शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष आक्रामक मुद्रा में दिखा। महंगाई, बेरोज़गारी, किसानों की आय, सीमा सुरक्षा और मीडिया की आज़ादी जैसे मुद्दों पर प्रश्न उठाए गए। विपक्ष ने यह मांग रखी कि सरकार इन मुद्दों पर विस्तृत और स्पष्ट जवाब दे।
विपक्ष के कई नेताओं ने संसद में अपनी आवाज बुलंद करते हुए कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत सवाल पूछने और जवाब देने की परंपरा में है, और संसद वही जगह है जहां यह संवाद होना चाहिए।
विधायी कार्यवाही कौन से बिल रहेंगे केंद्र में?
इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक रखे जाने की संभावना है, जिनमें शामिल हो सकते हैं
- नागरिक सुविधाओं और डिजिटल सेवाओं से संबंधित संशोधन
- राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों का अद्यतन
- लोक कल्याण योजनाओं के तहत वित्तीय प्रबंधन में सुधार
- श्रम सुधारों का अगला चरण
- कृषि और ग्रामीण प्रणाली से जुड़ी नीतियों में बदलाव
अगर ये विधेयक पास होते हैं, तो देश के विकास ढांचे में बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
लोकतंत्र का मंच जहां मतभेद भी ऊर्जा बनते हैं
संसद का शीतकालीन सत्र एक बार फिर उस लोकतांत्रिक वाद-विवाद की याद दिलाता है जिसने हमारे संविधान की नींव डाली। सत्ता और विपक्ष दोनों के बीच मतभेद होते हुए भी यह प्रक्रिया देश के लिए एक सामूहिक दिशा तय करती है।
आज का दिन इस बात का प्रतीक रहा कि भारत का लोकतंत्र जीवंत है और संसद वह जगह है जहां नीतियाँ बनती हैं, बदलती हैं, और लागू होती हैं जनता के लिए, जनता के द्वारा, जनता की सहमति से।
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इस सत्र में होने वाली चर्चाएं और निर्णय आने वाले महीनों में देश की नीतियों और समाज की दिशा को प्रभावित करेंगे। संसद के इस मंच से निकलने वाली हर आवाज आने वाले भारत की कहानी का हिस्सा होगी।
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