Putin India Visit Geopolitical Significance: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का न्यू दिल्ली पहुंचना केवल एक राजनयिक औपचारिकता नहीं था, बल्कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था में एक बेहद महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक संदेश भी था। जब पुतिन का विमान दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उतरा, तो शायद उन्हें बाद में पता चला होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं रेड कार्पेट पर उनका स्वागत करने के लिए मौजूद थे। रूस की सरकारी मीडिया RT ने इसे प्रोटोकॉल तोड़कर अपने मित्र का स्वागत” बताया। इससे दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत समीकरण का संकेत भी मिलता है।
इस बार यह मुलाकात इसलिए भी खास है क्योंकि 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में पुतिन RT India का शुभारंभ करेंगे। मॉस्को स्थित यह ग्लोबल न्यूज़ नेटवर्क भारत में रोज़ चार अंग्रेज़ी समाचार कार्यक्रम प्रसारित करेगा। इसका लक्ष्य भारत-रूस की पारंपरिक दोस्ती को मज़बूत करना और नए बहुध्रुवीय विश्व में दोनों देशों की उभरती भूमिका को रेखांकित करना है।
भारत-रूस रिश्ते: संवेदनशील क्षेत्रों में सहयोग
क्रीmlin के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत और रूस के रिश्ते सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी भरोसेमंद और मजबूत” हैं। इस यात्रा के दौरान रक्षा और अंतरिक्ष सहयोग, विशेषकर सुखोई Su-57 फाइटर जेट की संयुक्त उत्पादन परियोजना, वार्ता का अहम हिस्सा होगी।
इसके अलावा, पुतिन की यात्रा के साथ जुड़ा इंडिया-रूस बिजनेस फोरम यह दिखाता है कि आर्थिक संबंधों को और मज़बूत करने की दिशा में भी दोनों देश गंभीर हैं।
एक पूर्व भारतीय नौकरशाह ने कहा था कि पश्चिमी देश तकनीकी सहायता देते हैं, लेकिन “रूसी इंजीनियर खुद आकर मशीन के पास खड़े होकर ऑपरेशन और मेंटेनेंस समझाते हैं। यह कहानी वर्षों से बार-बार दोहराई जाती है-इससे पता चलता है कि भारत-रूस संबंध सिर्फ रणनीतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक और भरोसेमंद भी हैं।
ऐतिहासिक दृष्टि: 1971 का संकट और सोवियत समर्थन
भारत-रूस संबंधों का इतिहास समय की कसौटी पर खरा उतरा है। 1971 के भारत-पाक युद्ध में जब अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाने के लिए अपना Seventh Fleet भेजा, तब भारत के अनुरोध पर सोवियत संघ ने तुरंत Black Sea Fleet को अरब सागर की ओर रवाना किया। अमेरिका को तीसरे विश्व युद्ध की आशंका से अपनी नौसेना वापस लेनी पड़ी। यह भारत-सोवियत विश्वास की सबसे बड़ी मिसालों में से एक है।
G-20 में भारत की कूटनीति
2023 के G-20 शिखर सम्मेलन में भी भारत ने रूस को लेकर अंतरराष्ट्रीय भाषा में उल्लेखनीय बदलाव करवाया। मूल ड्राफ्ट में जहां “Russian aggression in Ukraine” लिखा था, भारत की कूटनीति ने इसे बदलकर “war in Ukraine” कर दिया। यह पश्चिमी देशों के सीधे आरोप को नरम करने और भाषा को तटस्थ बनाने की बड़ी सफलता थी।
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ऑपरेशन सिंदूर और S-400 की भूमिका
हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की हवाई कोशिशों को रोकने में रूस का S-400 एयर डिफेंस सिस्टम निर्णायक साबित हुआ। इसके बाद भारत अब S-500 Prometheus सिस्टम में भी रुचि दिखा रहा है, जिससे उसकी वायु सुरक्षा क्षमता और अधिक मजबूत होगी।
वैश्विक मंचों पर भारत और रूस
भारत और रूस कई बहुपक्षीय मंचों में साझेदार हैं,
- BRICS, अब बड़े और प्रभावशाली रूप में
- SCO, जो एशिया में क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग का प्रमुख मंच है
- ऊर्जा, अंतरिक्ष और रक्षा में दीर्घकालिक साझेदारी
दोनों देश बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को आगे बढ़ाने के समर्थक हैं, जिसमें पश्चिमी वर्चस्व का दबदबा कम हो और उभरती अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व बढ़े।
आज का परिदृश्य रूस पर प्रतिबंध, भारत पर दबाव
वर्तमान में रूस पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, जबकि भारत को अमेरिकी टैरिफ दबाव और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार की अस्थिरता से निपटना पड़ रहा है। ऐसे माहौल में पुतिन की यह यात्रा सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं है, बल्कि एक स्पष्ट कूटनीतिक संकेत है कि भारत-रूस साझेदारी आज भी उतनी ही मजबूत है जितनी पहले थी।
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एक दोस्त, सचमुच में दोस्त
पुतिन का भारत आगमन इस बात का संदेश है कि भू-राजनीतिक बदलावों के बीच भी दिल्ली-मॉस्को की दोस्ती स्थिर, भरोसेमंद और रणनीतिक है। जैसे-जैसे दुनिया एक नए बहुध्रुवीय युग में प्रवेश कर रही है, भारत-रूस सहयोग वैश्विक संतुलन और दक्षिणी देशों की आकांक्षाओं को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाएगा।
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