Kiran Rao on India’s independent cinema global moment: भारत की मशहूर फिल्ममेकर किरण राव का मानना है कि भारतीय स्वतंत्र सिनेमा वैश्विक मंच पर एक बड़े क्षण के बिल्कुल करीब है। उनका कहना है कि Tasveer South Asian Film Festival & Market (TSAFF & Market) जैसे प्लेटफॉर्म इस बदलाव को तेज करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
टसवीर के पहले भारत आयोजन 8 दिसंबर को मुंबई में होने वाले दो फ़िल्मों के विशेष शोकेस से पहले राव ने इस पहल को ‘एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पुल’ बताया है, जो दक्षिण एशियाई कहानीकारों को वैश्विक दर्शकों से जोड़ता है।
स्वतंत्र सिनेमा के लिए सुनहरा समय
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मुंबई शोकेस में दो ऑस्कर-योग्य दक्षिण एशियाई फिल्में दिखाई जाएंगी स्निग्धा कपूर की Holy Curse और अरन्या सहाय की Humans in the Loop। इनमें से Humans in the Loop को किरण राव प्रस्तुत कर रही हैं। सिएटल स्थित टसवीर दुनिया का एकमात्र ऑस्कर®-क्वालिफाइंग दक्षिण एशियाई फिल्म फेस्टिवल है, जो दो दशकों से डायस्पोरा की उन आवाज़ों को आगे बढ़ा रहा है जिन्हें दुनिया कम सुन पाती है।
किरण राव बताती हैं कि जब उन्होंने व्हिस्लिंग वुड्स में पहली बार Humans in the Loop देखी, तो यह फ़िल्म उनके मन में तुरंत बस गई।
किरण राव की भविष्यवाणी
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उनके शब्दों में,
‘अरन्या की कहानी कहने की स्पष्टता और आत्मविश्वास मुझे गहराई से प्रभावित कर गया। यह फ़िल्म एक बेहद सामयिक मुद्दे को छूती है AI के पीछे छिपे मानव श्रम, स्थानीय और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का मिटना, और तकनीक विकसित करने में ग्लोबल साउथ की कम होती प्रतिनिधित्व। यह फ़िल्म जरूरी है, मार्मिक है, और अत्यंत मानवीय दृष्टि से बनी है।‘
किरण राव लंबे समय से स्वतंत्र सिनेमा की समर्थक रही हैं। वे मानती हैं कि टसवीर जैसे प्लेटफॉर्म फेस्टिवल सफलता और मुख्यधारा की दृश्यता के बीच की दूरी को कम कर सकते हैं।
दक्षिण एशियाई आवाज़ों को वैश्विक मंच
उनका कहना है,
‘हर वह फ़िल्म अच्छा प्रदर्शन कर सकती है, जिसे अपना दर्शक मिल जाए। चुनौती यह नहीं कि फ़िल्म कैसी है, बल्कि यह है कि वह अपने दर्शकों तक कैसे पहुंचे। इसके लिए एक मजबूत और संगठित इकोसिस्टम की ज़रूरत है, जो स्वतंत्र रचनाकारों का हर चरण पर साथ दे।‘
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वे आगे कहती हैं कि भारतीय फ़िल्में अक्सर वैश्विक पुरस्कारों में इसलिए पीछे रह जाती हैं क्योंकि उनके पास पुरस्कार अभियान चलाने के संसाधन कम होते हैं, न कि इसलिए कि उनमें प्रतिभा की कमी है।
Humans in the Loop’ ने क्यों छोड़ी किरण राव पर गहरी छाप?
उनके शब्दों में,
‘ऑस्कर जीतने के लिए कलात्मक शक्ति ज़रूरी है, लेकिन उतना ही ज़रूरी है दृश्यता और प्रभावी आउटरीच। हमारी फ़िल्में बेहद ताकतवर हैं, बस हमें उन्हें दुनिया तक पहुंचाने में और मेहनत करनी होगी।‘
किरण राव की यह सोच न सिर्फ भारतीय स्वतंत्र सिनेमा की वर्तमान स्थिति को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सही मंच और रणनीति मिल जाए, तो दक्षिण एशियाई सिनेमा वैश्विक स्पॉटलाइट में नया इतिहास लिख सकता है।
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