Russia–India energy partnership: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 3–5 दिसंबर 2025 नई दिल्ली यात्रा ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि रूस–भारत ऊर्जा साझेदारी आने वाले वर्षों में भी मजबूत बनी रहेगी। भारत ने पिछले तीन वर्षों में रूसी कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता कई गुना बढ़ाई है, और ऐसे समय में पुतिन का यह आश्वासन कि रूस भारत को ईंधन की “अबाध आपूर्ति” के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ऊर्जा क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। भारत के शीर्ष अधिकारियों के साथ खड़े होकर पुतिन ने भारतीय कंपनियों को ‘बेहद विश्वसनीय साझेदार” बताते हुए कहा कि रूस भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। यह संदेश तब आया है जब भारत की रूसी तेल आयात मात्रा नवंबर के बाद पाँच महीने के उच्च स्तर पर पहुँच गई है, बावजूद इसके कि 21 नवंबर से अमेरिकी सेकेंडरी प्रतिबंध लागू हो चुके हैं।
READ MORE: धीरेंद्र शास्त्री समेत तमाम साधू-संतों का कोलकाता सनातन संस्कृति संसद में जयघोष
पिछले तीन वर्षों में भारत की रिफाइनरियों, विशेषकर नयारा एनर्जी, ने रूसी कच्चे तेल को अपने प्राथमिक स्रोत के रूप में अपनाया है। 2023 से 2025 के बीच नयारा ने अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग आधा हिस्सा रूस से खरीदा। 2024 के कई महीनों में उसके गुजरात स्थित वाडिनार रिफाइनरी में प्रसंस्कृत कच्चे तेल का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा उरल्स और ईएसपीओ जैसे रूसी ग्रेड से आया। कम कीमत, स्थायी आपूर्ति और बेहतर प्रोसेसिंग मार्जिन जैसे कारणों से भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल को मध्य-पूर्वी ग्रेड्स की तुलना में ज्यादा प्राथमिकता दी है, क्योंकि रूसी तेल अभी भी प्रति बैरल 4 से 7 डॉलर की आकर्षक छूट पर मिलता है।
READ MORE: बड़े पैमाने पर देरी कैंसिलेशन के बाद बोर्ड ने बनाया हाई-लेवल Crisis Management Group
लेकिन इस सहयोग को बनाए रखना अब आसान नहीं रह गया है। पश्चिमी देशों के कई बीमा प्रदाताओं ने रूसी “डार्क फ्लीट” से जुड़े जहाजों को कवर करना कम या बंद कर दिया है, जिससे शिपिंग लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। रूस–भारत समुद्री मार्ग पर ढुलाई दरें मध्य-2025 की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। समुद्री दलालों का अनुमान है कि पहले इस्तेमाल हो रहे लगभग 40 प्रतिशत टैंकर अब हाई-रिस्क या अनइंश्योरेबल श्रेणी में आ चुके हैं, जिसके कारण भारतीय रिफाइनरियाँ अब अनजान कैरियर्स और ज्यादा जटिल रूट्स का उपयोग करने को मजबूर हैं।
READ MORE: IndiGo CEO को 24 घंटे में जवाब देने का आदेश, देशभर में उड़ानों का मेगा फियास्को
भुगतान प्रणाली भी बदल रही है। अमेरिकी नियमों की सख्ती के बाद भारत की कंपनियाँ दिरहम और युआन आधारित निपटान चैनलों की ओर बढ़ रही हैं। यह प्रणाली चल तो रही है, लेकिन मुद्रा स्थिरता और अनुपालन संबंधी जोखिम इसके साथ जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिकी प्रतिबंध रूसी कच्चे तेल को पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं करते, बल्कि कुछ संस्थाओं को टारगेट करते हैं। इसलिए भारतीय कंपनियाँ अपने तरीकों में बदलाव कर रही हैं, न कि रूस से संबंध खत्म करने की दिशा में जा रही हैं।
इन परिस्थितियों में शिप-टू-शिप ट्रांसफर, मिश्रित कार्गो, और तीसरे देशों जैसे फुजैरा, मलेशिया और तुर्की के बंदरगाहों के माध्यम से पुनः-डॉक्यूमेंटेशन जैसी प्रक्रियाएं तेजी से बढ़ रही हैं। वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में पहले भी ऐसी रणनीतियों के जरिए प्रतिबंधित कच्चा तेल बिना रुकावट खरीदारों तक पहुँचता रहा है, और भारत–रूस मामलों में भी यही मॉडल स्थिरता बनाए हुए है।
पुतिन की इस यात्रा ने साफ संकेत दिया है कि रूस भारत को ऊर्जा क्षेत्र में अपना दीर्घकालिक साझेदार मानता है और वह मूल्य लाभ, सप्लाई सुरक्षा और सहूलियतपूर्ण शर्तों के माध्यम से इस रिश्ते को और गहरा करना चाहता है। ऐसे समय में जब वैश्विक ऊर्जा राजनीति जटिल होती जा रही है, रूस–भारत ऊर्जा साझेदारी न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा का मूल आधार बनी हुई है, बल्कि दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को भी अभूतपूर्व मजबूती प्रदान कर रही है।
Follow Us: YouTube| TV TODAY BHARAT LIVE | Breaking Hindi News Live | Website: Tv Today Bharat| X | FaceBook | Quora| Linkedin | tumblr | whatsapp Channel | Telegram
