Breaking news in India today in Hindi live: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में आज जो तस्वीर सामने आई, उसने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक नेतृत्व दोनों को एक नई दिशा दे दी। टीवी टू डे भारत की बड़ी सुर्खी यही रही कि 12 नक्सलियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे ‘ऐतिहासिक क्षण’ करार दिया और ठीक उसी अंदाज़ में कहा जैसा एक मजबूत शासन व्यवस्था कहती है ‘हथियार की राह छोड़कर लोकतंत्र के रास्ते पर लौटना ही नई छत्तीसगढ़ की पहचान बनेगा।‘
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यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि वह संकेत है जिसकी दशकों से प्रतीक्षा थी। जब किसी राज्य की सरकार अपनी नीति, अपनी इच्छाशक्ति और अपने ज़मीनी काम से यह साबित कर देती है कि विकास और सुरक्षा दोनों साथ-साथ चल सकते हैं, तो यही परिणाम देखने को मिलता है।
सरकार की नीति का असर, जंगलों में खामोशी, विकास में तेजी
राजनांदगांव और खैरागढ़ वह इलाका है जहां नक्सल हिंसा ने लंबे समय तक जनजीवन को बंधक बनाए रखा। लेकिन हाल के महीनों में विष्णुदेव साय सरकार ने जिस तरह समन्वित विकास, कड़ा सुरक्षा अभियान, और विश्वास बहाली कार्यक्रम चलाए, उसने परिस्थितियों को बदल दिया। यह आत्मसमर्पण उसी दिशा का संकेत है जहां बंदूक की आवाज़ धीमी पड़ती है और विकास की गूंज तेज़ होती है।
Tv today bharat live में लगातार यह भी उजागर होता रहा है कि सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में न सिर्फ सड़कों और संचार नेटवर्क को मजबूत किया बल्कि लोगों के अंदर यह विश्वास भी पैदा किया कि “सरकार सिर्फ कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर खड़ी है।‘
खैरागढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस, सत्ता का नहीं, संवेदना का संदेश
राजनांदगांव में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा और शीर्ष पुलिस अधिकारी मौजूद थे। लेकिन दिलचस्प यह रहा कि पूरा संदेश राजनीतिक विजय का नहीं, मानवीय बदलाव का रहा। साय ने कहा, ‘कोई भी व्यक्ति जन्म से नक्सली नहीं होता। परिस्थितियां उसे उस रास्ते पर ले जाती हैं। सरकार का काम है उन परिस्थितियों को बदलना।‘ यह वही बात है जो जनता सुनना चाहती है एक ऐसी सरकार की आवाज़ जो संघर्ष को सिर्फ सैन्य ऑपरेशन नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव से जोड़कर देखती है।
माओवादी कैडर का हथियार छोड़ना, भीतर से टूटी हुई संरचना का संकेत
सूत्र बताते हैं कि आत्मसमर्पण करने वालों में कई ऐसे नाम शामिल हैं जिन पर इनामी राशि घोषित थी और जो जंगलों में नक्सल संगठनों की रीढ़ माने जाते थे। जब ऐसे लोग हथियार डालते हैं, यह सिर्फ अभियान की सफलता नहीं, बल्कि नक्सल संगठन के भीतर गहरी टूटन का संकेत होता है। सरकार के लिए यह राजनीतिक उपलब्धि भी है क्योंकि छत्तीसगढ़ की जनता वर्षों से इस लड़ाई के अंत का इंतज़ार कर रही थी। और अब यह प्रतीकात्मक शुरुआत हो चुकी है।
‘बंदूक छोड़ो, विकास जोड़ो’ सरकार का नया मंत्र
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आत्मसमर्पण करने वालों को पुनर्वास पैकेज, सुरक्षा, और रोज़गार की सुविधाएं दी जाएंगी। यह वही नीति है जिसने देश के कई राज्यों में उग्रवाद को कमजोर किया और अब छत्तीसगढ़ में भी यह कारगर साबित हो रही है। राज्य सरकार का दावा है कि आने वाले महीनों में और भी आत्मसमर्पण देखने को मिलेंगे, क्योंकि नक्सली नेतृत्व अब अपनी पकड़ खो रहा है और ज़मीनी कैडर विकास की मुख्यधारा में लौटना चाहता है।
आज का दिन सच में ऐतिहासिक क्यों है?
क्योंकि यह सिर्फ एक आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि वह मोड़ है जहां छत्तीसगढ़ की कहानी बदलती है। जहां खून की लाल जमीन अब विकास के रंग से भरने लगी है। जहां बंदूकें अब शासन को चुनौती नहीं, बल्कि लोकतंत्र को सलाम करती दिख रही हैं। और यही कारण है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की बात आज पूरे राज्य में गूँज रही है ‘यह दिन इतिहास में दर्ज होगा।‘ यह खबर सिर्फ सुर्खी नहीं, बल्कि एक उम्मीद का अध्याय है, और यही वजह है कि यह आज की सबसे महत्वपूर्ण Breaking news और Latest Headlines बन गई।
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