Satellite-based last mile connectivity in India: भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक अहम पहल के तहत हाल ही में SpaceX की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा Starlink की बिजनेस ऑपरेशंस की वाइस प्रेसिडेंट लॉरेन ड्रेयर और उनकी सीनियर लीडरशिप टीम के साथ मुलाकात हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत में सैटेलाइट आधारित ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ को आगे बढ़ाने पर चर्चा करना था, ताकि देश के दूरदराज़ और मुश्किल भौगोलिक क्षेत्रों तक भी तेज और भरोसेमंद इंटरनेट पहुंचाया जा सके। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन से सीधे तौर पर जुड़ी है, जिसमें हर नागरिक को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना और तकनीक के जरिए विकास की गति को तेज करना शामिल है।
भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में अब भी कई ऐसे इलाके हैं, जहां पारंपरिक फाइबर या मोबाइल नेटवर्क पहुंचाना बेहद चुनौतीपूर्ण है। पहाड़ी क्षेत्र, रेगिस्तानी इलाके, घने जंगल और दूर-दराज़ के गांव आज भी सीमित या कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी से जूझ रहे हैं। ऐसे में सैटेलाइट आधारित इंटरनेट तकनीक एक बड़ा समाधान बनकर उभर रही है। Starlink जैसी सेवाएं लो-अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट्स के जरिए सीधे यूजर तक इंटरनेट पहुंचाने की क्षमता रखती हैं, जिससे नेटवर्क बिछाने की भौतिक सीमाएं काफी हद तक खत्म हो जाती हैं।
इस चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि सैटेलाइट इंटरनेट केवल मनोरंजन या सामान्य ब्राउज़िंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, ई-गवर्नेंस और आपदा प्रबंधन जैसे अहम क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। ग्रामीण इलाकों में ऑनलाइन शिक्षा की पहुंच बढ़ेगी, टेलीमेडिसिन के जरिए दूर बैठे मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह मिल सकेगी और किसानों को मौसम, बाजार और फसल से जुड़ी जानकारी समय पर मिल पाएगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और डिजिटल खाई को पाटने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का “डिजिटल इंडिया” अभियान देश को तकनीक के माध्यम से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। सैटेलाइट तकनीक इस विजन का एक अहम स्तंभ बन सकती है, क्योंकि यह उन क्षेत्रों तक भी कनेक्टिविटी पहुंचाने में सक्षम है, जहां आज तक इंटरनेट एक सपना बना हुआ है। डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ने से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचेगा और पारदर्शिता व दक्षता में भी इजाफा होगा।
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कुल मिलाकर, Starlink और भारत के बीच संभावित सहयोग देश की कनेक्टिविटी तस्वीर को बदल सकता है। सैटेलाइट आधारित लास्ट माइल एक्सेस न केवल इंटरनेट को तेज और सुलभ बनाएगा, बल्कि डिजिटल समावेशन को भी गति देगा। इससे भारत के दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक भी डिजिटल क्रांति का हिस्सा बन सकेंगे और यही समावेशी विकास की असली पहचान है।
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