Uttarakhand UCC News : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर कांग्रेस पर तीखा कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा कि जैसे ही राज्य में UCC लागू हुआ, कांग्रेस को “दिक्कत” और “तकलीफ़” होने लगी। मुख्यमंत्री का यह बयान न सिर्फ प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर रहा है, बल्कि आने वाले समय में UCC को लेकर सियासी बहस को भी और तेज करता दिख रहा है।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ शब्दों में कहा कि समान नागरिक संहिता समाज में समानता, न्याय और पारदर्शिता लाने का माध्यम है, लेकिन कांग्रेस शुरू से ही इस विषय पर भ्रम फैलाने का काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को महिलाओं के अधिकार, समान कानून और सामाजिक सुधार से नहीं, बल्कि सिर्फ वोट बैंक की राजनीति से मतलब है। धामी ने कहा कि उत्तराखंड की जनता ने स्पष्ट जनादेश दिया था और उसी जनभावना का सम्मान करते हुए राज्य सरकार ने UCC को लागू किया है।
धामी ने यह भी कहा कि UCC लागू होते ही कांग्रेस के नेताओं के बयान बदलने लगे हैं। पहले जो पार्टी संविधान की दुहाई देती थी, वही अब समान कानून पर सवाल खड़े कर रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह कांग्रेस का दोहरा चरित्र है, जो जनता अब भली-भांति समझ चुकी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने UCC को जमीन पर उतारने का साहसिक फैसला लिया है और आने वाले समय में यह मॉडल पूरे देश के लिए उदाहरण बनेगा।
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मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि UCC किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं के हितों का जिक्र करते हुए कहा कि इस कानून से महिलाओं को विवाह, तलाक और संपत्ति के मामलों में समान अधिकार मिलेंगे। धामी ने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस महिला सशक्तिकरण की बात करती है, तो फिर UCC से उसे परेशानी क्यों हो रही है?
कांग्रेस की ओर से इस बयान पर पलटवार भी किया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि UCC को जल्दबाजी में लागू किया गया है और इसके सामाजिक प्रभावों पर गंभीर चर्चा नहीं की गई। हालांकि, भाजपा और राज्य सरकार का कहना है कि इस कानून पर लंबे समय से विचार-विमर्श हुआ है और विशेषज्ञों की राय के बाद ही इसे लागू किया गया है।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तराखंड में UCC लागू होना सिर्फ एक कानूनी फैसला नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है। इससे भाजपा जहां खुद को सुधार और समानता की पक्षधर पार्टी के रूप में पेश कर रही है, वहीं कांग्रेस को रक्षात्मक मुद्रा में आना पड़ा है। आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में UCC एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।
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कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कांग्रेस पर यह कटाक्ष साफ संकेत देता है कि उत्तराखंड में UCC को लेकर सरकार पीछे हटने वाली नहीं है। भाजपा इसे अपनी उपलब्धि के रूप में जनता के बीच ले जाएगी, जबकि कांग्रेस को इस मुद्दे पर अपनी रणनीति नए सिरे से तय करनी होगी। उत्तराखंड की राजनीति में UCC अब एक स्थायी और निर्णायक बहस का केंद्र बन चुका है।
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