Rajya Sabha Swati Maliwal News: राज्यसभा में चुनाव सुधारों पर चल रही चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और उनसे जुड़ी चुनौतियों पर भावुक और बेबाक बयान दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीति में केवल वोटों की मशीन समझना बंद करना होगा, क्योंकि जब महिलाएं सत्ता और निर्णय प्रक्रिया में आती हैं तो उन्हें सामाजिक, मानसिक और राजनीतिक स्तर पर कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
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स्वाति मालीवाल ने सदन में कहा कि दुनिया के किसी भी देश में महिलाएं जब राजनीति में कदम रखती हैं तो उनके लिए रास्ता आसान नहीं होता। उन्हें न सिर्फ अपने राजनीतिक विरोधियों से लड़ना पड़ता है, बल्कि समाज की रूढ़िवादी सोच, व्यक्तिगत हमलों और चरित्र हनन जैसी समस्याओं से भी जूझना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि पुरुष नेताओं की तुलना में महिलाओं के निजी जीवन को कहीं ज्यादा निशाना बनाया जाता है, जो लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव सुधारों की चर्चा तब तक अधूरी है, जब तक उसमें महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और बराबरी की भागीदारी को प्राथमिकता नहीं दी जाती। स्वाति मालीवाल ने कहा कि महिलाएं केवल चुनाव के समय पोस्टर, रैलियों और वोट प्रतिशत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे नीति निर्माण, प्रशासन और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा सकती हैं।
अपने संबोधन में उन्होंने महिला आरक्षण को लेकर भी स्पष्ट संकेत दिए। उन्होंने कहा कि दशकों से महिला आरक्षण की बात की जा रही है, लेकिन जमीन पर इसका असर अब भी सीमित है। अगर वास्तव में चुनाव सुधारों को प्रभावी बनाना है, तो महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व देना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ कानून बना देना काफी नहीं है, बल्कि राजनीतिक दलों को अपनी सोच और संरचना में भी बदलाव करना होगा।

स्वाति मालीवाल ने यह भी कहा कि आज भी राजनीति में महिलाओं को डराने-धमकाने, ट्रोल करने और उनके खिलाफ झूठे अभियान चलाने की घटनाएं आम हैं। सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक महिलाओं को अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर देश की संसद में बैठी महिला सांसद सुरक्षित महसूस नहीं करेंगी, तो आम महिलाएं लोकतंत्र से कैसे जुड़ेंगी।
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उन्होंने चुनाव आयोग और संसद से अपील की कि चुनाव सुधारों के तहत ऐसे ठोस कदम उठाए जाएं, जिससे महिला उम्मीदवारों और नेताओं को एक सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिल सके। इसमें चुनावी भाषणों में मर्यादा, सोशल मीडिया पर निगरानी और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक प्रचार पर सख्त कार्रवाई जैसे प्रावधान शामिल होने चाहिए।
राज्यसभा में उनके इस बयान को सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर से गंभीरता से सुना गया। कई सांसदों ने उनकी बातों से सहमति जताई और कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब उसमें आधी आबादी की आवाज बिना डर और दबाव के सुनी जाएगी। चुनाव सुधारों की बहस में स्वाति मालीवाल का यह हस्तक्षेप महिला अधिकारों और राजनीतिक समानता की दिशा में एक अहम संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
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उन्होंने अपने भाषण के अंत में कहा कि महिलाएं सिर्फ वोट देने के लिए नहीं हैं, बल्कि वे लोकतंत्र की रीढ़ हैं। अगर देश को सच में आगे बढ़ाना है, तो महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा और बराबरी के साथ राजनीति में भागीदारी देनी होगी। स्वाति मालीवाल का यह बयान न सिर्फ राज्यसभा की कार्यवाही का अहम हिस्सा बना, बल्कि देशभर में चुनाव सुधार और महिला सशक्तिकरण पर नई बहस को भी हवा देता नजर आया।
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