Godavarthi Venkata Srinivas India Ambassador to Oman: मस्कट, ओमान की राजधानी, जहां अरब सागर की लहरें इतिहास और आधुनिकता को एक साथ समेटे हुए हैं, वहीं भारत के राजनयिक प्रतिनिधि के रूप में गोदावर्थी वेंकट श्रीनिवास (Godavarthi Venkata Srinivas) की भूमिका भारत-ओमान संबंधों को नई दिशा देने में बेहद अहम मानी जाती है। भारत के राजदूत के रूप में उनकी तैनाती केवल औपचारिक कूटनीतिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, आर्थिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और प्रवासी भारतीयों के कल्याण का एक मजबूत आधार भी बन चुकी है।
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गोदावर्थी वेंकट श्रीनिवास भारतीय विदेश सेवा (IFS) के एक अनुभवी और सम्मानित अधिकारी हैं। उन्हें मध्य-पूर्व, खाड़ी क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की गहरी समझ रखने वाले राजनयिक के रूप में जाना जाता है। उनकी कार्यशैली में संतुलन, संवाद और दीर्घकालिक दृष्टि स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। ओमान जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश में भारत के राजदूत के रूप में उनकी नियुक्ति यह दर्शाती है कि भारत इस द्विपक्षीय रिश्ते को कितनी गंभीरता से लेता है।
भारत और ओमान के संबंध सदियों पुराने हैं। ऐतिहासिक रूप से व्यापार, समुद्री संपर्क और सांस्कृतिक रिश्तों ने दोनों देशों को जोड़े रखा है। आज यह संबंध ऊर्जा, रक्षा, निवेश, समुद्री सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों तक फैल चुके हैं। गोदावर्थी वेंकट श्रीनिवास के नेतृत्व में भारतीय दूतावास ने इन सभी क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में सक्रिय पहल की है। ओमान में भारत का राजनयिक मिशन केवल नीति-निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर भी भारतीय समुदाय और स्थानीय प्रशासन के साथ निरंतर संवाद में रहता है।
ओमान में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। राजदूत गोदावर्थी वेंकट श्रीनिवास ने प्रवासी भारतीयों के मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए श्रमिक कल्याण, रोजगार सुरक्षा, कांसुलर सेवाओं की सुगमता और संकट के समय सहायता तंत्र को सुदृढ़ किया है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी, स्वास्थ्य सहायता और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय में भारतीय दूतावास की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। इस पूरे प्रयास में राजदूत की सक्रियता और मानवीय दृष्टिकोण साफ दिखाई दिया।
आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में भी उनके कार्यकाल के दौरान भारत-ओमान रिश्तों में नई गति आई है। ऊर्जा सुरक्षा भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है और ओमान इस क्षेत्र में एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभरा है। तेल, गैस, ग्रीन एनर्जी और हाइड्रोजन जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए निरंतर संवाद और उच्च-स्तरीय बैठकों का आयोजन किया गया है। इसके साथ-साथ भारतीय कंपनियों को ओमान में निवेश के अवसरों से जोड़ने और ओमानी निवेशकों को भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था की संभावनाओं से अवगत कराने में भी दूतावास ने सक्रिय भूमिका निभाई है।
रणनीतिक और रक्षा सहयोग भी भारत-ओमान संबंधों का एक मजबूत स्तंभ है। समुद्री सुरक्षा, नौसैनिक अभ्यास और हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता जैसे विषयों पर दोनों देशों के बीच गहरा तालमेल है। गोदावर्थी वेंकट श्रीनिवास के कार्यकाल में रक्षा सहयोग से जुड़े संवादों को और संस्थागत स्वरूप मिला है, जिससे आपसी विश्वास और साझेदारी को मजबूती मिली है।
सांस्कृतिक कूटनीति के क्षेत्र में भी भारतीय दूतावास ने ओमान में भारत की सॉफ्ट पावर को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। योग दिवस, भारतीय त्योहारों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, कला प्रदर्शनियों और शैक्षणिक आदान-प्रदान के माध्यम से भारत की विविधता और विरासत को ओमानी समाज के सामने रखा गया है। राजदूत स्वयं इन पहलों में सक्रिय भागीदारी करते नजर आते हैं, जिससे यह संदेश जाता है कि कूटनीति केवल दस्तावेजों और बैठकों तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों-से-लोगों के रिश्तों से भी जुड़ी होती है।
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शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भारत और ओमान के बीच सहयोग को नई दिशा देने के प्रयास भी उनके नेतृत्व में देखने को मिले हैं। भारतीय विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रति ओमानी युवाओं की रुचि बढ़ी है, वहीं भारत में ओमान के छात्रों और पेशेवरों के लिए अवसरों को लेकर भी सकारात्मक माहौल बना है। यह सहयोग दीर्घकाल में दोनों देशों के मानव संसाधन विकास को मजबूती प्रदान करता है।
गोदावर्थी वेंकट श्रीनिवास की कूटनीतिक शैली में संवाद, सम्मान और साझेदारी की भावना प्रमुख है। वे केवल सरकारी स्तर पर ही नहीं, बल्कि व्यापारिक समुदाय, शिक्षाविदों, सांस्कृतिक संगठनों और आम नागरिकों के साथ भी निरंतर संपर्क में रहते हैं। यही वजह है कि ओमान में भारत की छवि एक भरोसेमंद, जिम्मेदार और भविष्य-उन्मुख साझेदार के रूप में और मजबूत हुई है।
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मस्कट में भारत के राजदूत के रूप में उनका कार्यकाल ऐसे समय में चल रहा है, जब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है। ऐसे में भारत-ओमान संबंधों को स्थिरता, विश्वास और पारस्परिक लाभ के आधार पर आगे बढ़ाना एक चुनौती भी है और अवसर भी। गोदावर्थी वेंकट श्रीनिवास इस चुनौती को अवसर में बदलने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, गोदावर्थी वेंकट श्रीनिवास का योगदान केवल एक राजदूत के रूप में नहीं, बल्कि भारत-ओमान मित्रता के एक सशक्त प्रतिनिधि के रूप में देखा जा रहा है। उनके नेतृत्व में दोनों देशों के रिश्ते केवल वर्तमान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भविष्य की साझेदारी के लिए भी एक मजबूत नींव रख रहे हैं। मस्कट से नई दिल्ली तक, और ओमान के हर कोने में बसे भारतीय समुदाय तक, उनकी कूटनीति का असर स्पष्ट रूप से महसूस किया जा सकता है।
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