India Netherlands Defence Cooperation: नीदरलैंड्स के विदेश मंत्री डेविड वैन वील (David Van Weel) और भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) के बीच हुई मुलाकात भारत-नीदरलैंड्स संबंधों के लिहाज़ से एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम मानी जा रही है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने, ‘मेक इन इंडिया’ को रक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ाने और यूरोपीय देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर फोकस कर रहा है।
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इस उच्चस्तरीय बैठक में दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग, सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता, रक्षा तकनीक, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक भू-राजनीतिक हालात पर विस्तार से चर्चा की। यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें भविष्य की रणनीति और ठोस सहयोग की दिशा भी साफ दिखाई दी।
भारत-नीदरलैंड्स रक्षा संबंधों की पृष्ठभूमि
भारत और नीदरलैंड्स के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं। दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और मुक्त व्यापार में विश्वास रखते हैं। पिछले कुछ वर्षों में इन संबंधों में रक्षा और सुरक्षा का आयाम तेजी से उभरा है। नीदरलैंड्स यूरोप का एक अहम रक्षा और तकनीकी भागीदार है, जबकि भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा का प्रमुख स्तंभ माना जाता है।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बैठक के दौरान कहा कि भारत रणनीतिक स्वायत्तता, आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन और वैश्विक साझेदारियोंके संतुलन पर काम कर रहा है। वहीं डेविड वैन वील ने भारत को एक ‘विश्वसनीय और जिम्मेदार रक्षा साझेदार’ बताया।
रक्षा सहयोग और तकनीकी साझेदारी पर जोर
बैठक में रक्षा उद्योग सहयोग को और गहरा करने पर विशेष चर्चा हुई। भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया इन डिफेंस’ पहल के तहत विदेशी कंपनियों के साथ को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन को बढ़ावा दिया जा रहा है। नीदरलैंड्स की कई कंपनियां नौसैनिक प्रणालियों, रडार टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा और उन्नत रक्षा उपकरणों में वैश्विक पहचान रखती हैं।
दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि रक्षा नवाचार, स्टार्ट-अप सहयोग और उन्नत तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी को आगे बढ़ाया जाएगा। इससे न सिर्फ भारत की रक्षा क्षमता बढ़ेगी, बल्कि नीदरलैंड्स की कंपनियों को भी एशियाई बाजार में नई संभावनाएं मिलेंगी।
समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक पर चर्चा
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र आज वैश्विक राजनीति और व्यापार का केंद्र बन चुका है। बैठक में समुद्री मार्गों की सुरक्षा, मुक्त नौवहन और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर भी बात हुई। भारत पहले ही इंडो-पैसिफिक में एक जिम्मेदार समुद्री शक्ति के रूप में उभर चुका है और नीदरलैंड्स भी इस क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने के पक्ष में है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि समुद्री सुरक्षा सहयोग दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में। डेविड वैन वील ने भारत की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि नीदरलैंड्स भारत के साथ मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करना चाहता है।
वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण
बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य-पूर्व की स्थिति, आतंकवाद, साइबर खतरों और हाइब्रिड वॉरफेयर जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का समाधान संवाद, सहयोग और अंतरराष्ट्रीय नियमों के जरिए ही संभव है।
नीदरलैंड्स के विदेश मंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति का समर्थन किया और कहा कि इस खतरे से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग बेहद जरूरी है।
भारत-यूरोप संबंधों को नई गति
यह मुलाकात सिर्फ द्विपक्षीय नहीं, बल्कि भारत-यूरोप रक्षा और सुरक्षा सहयोग के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत यूरोपीय देशों के साथ अपने रिश्तों को रणनीतिक स्तर पर ले जाना चाहता है और नीदरलैंड्स इसमें एक अहम कड़ी साबित हो सकता है।विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बैठक के बाद संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा संवाद और औद्योगिक साझेदारी को नई गति मिल सकती है।
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नीदरलैंड्स के विदेश मंत्री डेविड वैन वील और भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की यह मुलाकात भारत-नीदरलैंड्स संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा सकती है। रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक स्थिरता जैसे मुद्दों पर बनी सहमति आने वाले समय में ठोस नीतिगत फैसलों में बदल सकती है।
कुल मिलाकर, यह बैठक भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और यूरोपीय देशों के साथ उसके गहरे होते रणनीतिक रिश्तों का स्पष्ट संकेत देती है, जो भविष्य में न सिर्फ द्विपक्षीय बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा ढांचे को भी मजबूती देगी।
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