Interstellar Comet Observation in Rajasthan: राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित माउंट आबू वेधशाला से भारतीय वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। Physical Research Laboratory (PRL) के वैज्ञानिकों ने एक दुर्लभ इंटरस्टेलर (अंतरतारकीय) धूमकेतु का सफलतापूर्वक अवलोकन किया है। यह धूमकेतु हमारे सौरमंडल के बाहर से आया है, जिससे वैज्ञानिकों को सौरमंडल की उत्पत्ति और उसके विकास से जुड़े कई नए संकेत मिलने की उम्मीद है।
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यह अवलोकन Sirohi जिले के Mount Abu क्षेत्र में स्थित अत्याधुनिक खगोलीय वेधशाला से किया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसे इंटरस्टेलर धूमकेतु अत्यंत दुर्लभ होते हैं और इनका अध्ययन करना वैश्विक स्तर पर खगोल विज्ञान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
इंटरस्टेलर धूमकेतु क्यों है खास
सामान्य धूमकेतु हमारे ही सौरमंडल के होते हैं, लेकिन इंटरस्टेलर धूमकेतु किसी अन्य तारकीय प्रणाली से निकलकर अंतरिक्ष में लंबी यात्रा करते हुए हमारे सौरमंडल में प्रवेश करते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे पिंड अरबों साल पुराने हो सकते हैं और इनमें ब्रह्मांड के शुरुआती समय की जानकारी छिपी हो सकती है। इस अवलोकन से यह समझने में मदद मिलेगी कि अलग-अलग तारकीय प्रणालियों में ग्रह और धूमकेतु कैसे बनते हैं।
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PRL वैज्ञानिकों की अहम भूमिका
इस शोध में Shashikiran Ganesh, प्रोफेसर, PRL, Ahmedabad, और Sunil Chandra, सहायक प्रोफेसर एवं इंचार्ज, PRL माउंट आबू, की अहम भूमिका रही। वैज्ञानिकों ने बताया कि हाई-रिज़ॉल्यूशन टेलीस्कोप और स्पेक्ट्रोस्कोपिक तकनीक की मदद से धूमकेतु की संरचना, गति और रासायनिक गुणों का अध्ययन किया गया।
सौरमंडल के रहस्यों पर नई रोशनी
इस दुर्लभ अवलोकन से यह संकेत मिलते हैं कि हमारे सौरमंडल के बाहर भी धूल, बर्फ और गैस से बने ऐसे पिंड मौजूद हैं, जिनकी संरचना कुछ हद तक हमारे धूमकेतुओं से मिलती-जुलती हो सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि पृथ्वी पर पानी और जैविक तत्व कैसे पहुंचे होंगे। इंटरस्टेलर धूमकेतु में पाए गए तत्व पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति से जुड़े सिद्धांतों को भी मजबूत कर सकते हैं।
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भारत के लिए वैज्ञानिक उपलब्धि
यह खोज भारत को वैश्विक खगोल विज्ञान मानचित्र पर और मजबूत बनाती है। PRL लंबे समय से ग्रह विज्ञान, सौर भौतिकी और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में काम कर रहा है। माउंट आबू वेधशाला से किया गया यह अवलोकन दिखाता है कि भारत न केवल उपग्रह और अंतरिक्ष मिशनों में बल्कि गहरे अंतरिक्ष अनुसंधान में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
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आगे की दिशा
वैज्ञानिकों के अनुसार, आने वाले समय में इस इंटरस्टेलर धूमकेतु के डेटा का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा और अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों के साथ इसे साझा किया जाएगा। इससे ब्रह्मांड की संरचना, तारों के बीच के वातावरण और सौरमंडल के विकास को समझने में नई दिशा मिलेगी।
कुल मिलाकर, सिरोही से किया गया यह दुर्लभ अवलोकन भारतीय विज्ञान के लिए गर्व का विषय है और यह सौरमंडल के रहस्यों को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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