Siddharthnagar fertilizer black marketing action: उत्तर प्रदेश विधानसभा में कृषि व्यवस्था और किसानों के हितों से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने सदन में जानकारी देते हुए बताया कि सिद्धार्थनगर जनपद में उर्वरकों की कालाबाजारी, ओवररेटिंग, टैगिंग और तस्करी की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई न कर पाने और पदेन दायित्वों के निर्वहन में शिथिलता बरतने के कारण जिला कृषि अधिकारी मोहम्मद मुजम्मिल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
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कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि सिद्धार्थनगर में उर्वरकों की किसी प्रकार की कमी नहीं थी। सरकारी अभिलेखों और उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार किसानों की जरूरत के अनुरूप खाद मौजूद थी, फिर भी कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा कालाबाजारी और अवैध तस्करी की जा रही थी। इस पूरे मामले पर जिला स्तर पर निगरानी और नियंत्रण की जिम्मेदारी जिला कृषि अधिकारी की थी, लेकिन वे इन गतिविधियों पर रोक लगाने में पूरी तरह विफल रहे।
सदन में दिए गए वक्तव्य में कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसानों को समय पर, उचित मूल्य पर और पारदर्शी तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उर्वरकों की कालाबाजारी केवल आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर किसानों की मेहनत, फसल और आजीविका पर हमला है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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उन्होंने यह भी बताया कि सिद्धार्थनगर से लगातार यह शिकायतें आ रही थीं कि खाद की बोरी निर्धारित मूल्य से अधिक दाम पर बेची जा रही है, किसानों को टैगिंग के नाम पर परेशान किया जा रहा है और सीमावर्ती क्षेत्रों से उर्वरकों की तस्करी की जा रही है। इसके बावजूद जिला कृषि अधिकारी द्वारा न तो सघन जांच अभियान चलाया गया और न ही दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की गई। इसी प्रशासनिक लापरवाही को गंभीर मानते हुए यह दंडात्मक कदम उठाया गया है।
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कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने सदन के माध्यम से विभाग के सभी अधिकारियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में उर्वरकों की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करें। किसी भी स्तर पर अगर यह पाया गया कि कोई अधिकारी या कर्मचारी कालाबाजारी, ओवररेटिंग या तस्करी को नजरअंदाज कर रहा है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार किसानों को खाद के लिए भटकने नहीं देगी।
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उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में उर्वरक वितरण व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाएगा। जिला और ब्लॉक स्तर पर नियमित निरीक्षण, आकस्मिक छापेमारी और शिकायत निवारण प्रणाली को सक्रिय किया जाएगा ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
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यह कार्रवाई प्रदेश सरकार की उस सख्त नीति को दर्शाती है, जिसमें किसानों के हितों से समझौता करने वाले अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सिद्धार्थनगर में जिला कृषि अधिकारी का निलंबन न केवल एक प्रशासनिक निर्णय है, बल्कि यह साफ संदेश भी है कि सिद्धार्थनगर उर्वरक कालाबाजारी कार्रवाई जैसे मामलों में सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।
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