Pushkar Singh Dhami Nainital Winter Visit: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का दो दिवसीय नैनीताल दौरा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह उस संवेदनशील नेतृत्व का प्रतीक बनकर सामने आया, जो पहाड़ों की धड़कन को करीब से सुनना जानता है। प्रात: कालीन भ्रमण के दौरान ठंडी हवा, धुंध से ढकी झील और सड़कों पर बढ़ती हलचल के बीच मुख्यमंत्री स्वयं पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सड़कों पर उतरे। यह दृश्य अपने आप में बहुत कुछ कह गया सरकार काग़ज़ों में नहीं, ज़मीन पर काम कर रही है।
नैनीताल, जो शीतकालीन यात्रा और नववर्ष के आगमन पर पर्यटकों से गुलजार रहता है, इन दिनों भारी भीड़ का सामना करता है। ऐसे में यातायात प्रबंधन, पार्किंग और पर्यटकों की सुरक्षा प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। मुख्यमंत्री धामी ने इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से न केवल मौजूदा इंतज़ामों की जानकारी ली, बल्कि वास्तविक स्थिति को देखकर स्पष्ट निर्देश भी दिए कि किसी भी हाल में पर्यटकों को असुविधा नहीं होनी चाहिए।
सीएम ने विशेष रूप से पार्किंग व्यवस्था पर ज़ोर दिया। उनका कहना था कि अव्यवस्थित पार्किंग केवल जाम का कारण नहीं बनती, बल्कि आपात स्थितियों में बड़ी बाधा भी बन सकती है। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि चिन्हित पार्किंग स्थलों का अधिकतम उपयोग हो और सड़कों के किनारे अवैध पार्किंग पर सख्ती से रोक लगे। साथ ही, उन्होंने ट्रैफिक के दबाव को देखते हुए वैकल्पिक रूट प्लान तैयार रखने के निर्देश दिए, ताकि किसी एक मार्ग पर अत्यधिक भीड़ होने की स्थिति में यातायात को सुचारु रूप से डायवर्ट किया जा सके।
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यह दौरा केवल प्रशासनिक समीक्षा तक सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि शीतकालीन पर्यटन उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी की तरह है। विभिन्न रिसर्च रिपोर्ट्स और पर्यटन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि सर्दियों के मौसम में नैनीताल, मसूरी और औली जैसे स्थलों पर पर्यटकों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिससे स्थानीय रोजगार, होटल उद्योग, टैक्सी सेवाओं और छोटे कारोबारियों को सीधा लाभ मिल रहा है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वह हर पर्यटक को सुरक्षित, सुगम और यादगार अनुभव दे।
मुख्यमंत्री धामी की कार्यशैली में भावनात्मक जुड़ाव साफ झलकता है। वे केवल निर्देश देकर आगे नहीं बढ़े, बल्कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और प्रशासनिक अमले से संवाद करते हुए उनका मनोबल भी बढ़ाया। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था और यातायात संभालने वाले कर्मी ठंड, दबाव और लंबी ड्यूटी के बावजूद जिस समर्पण से काम कर रहे हैं, वह सराहनीय है। यह शब्द उन जवानों के लिए किसी ऊर्जा से कम नहीं थे।
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नववर्ष के मद्देनज़र मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिए कि भीड़ प्रबंधन के लिए तकनीक का बेहतर इस्तेमाल किया जाए। सीसीटीवी मॉनिटरिंग, रियल-टाइम ट्रैफिक अपडेट और सोशल मीडिया के माध्यम से पर्यटकों को सही जानकारी देने पर ज़ोर दिया गया, ताकि लोग पहले से ही वैकल्पिक मार्गों और पार्किंग स्थलों के बारे में जान सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की रणनीति से न केवल जाम की समस्या कम होती है, बल्कि प्रशासन और आमजन के बीच विश्वास भी मजबूत होता है।
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कुल मिलाकर, नैनीताल में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह प्रातःकालीन निरीक्षण उस नेतृत्व का उदाहरण है, जो संवेदनशील भी है और सक्रिय भी। पहाड़ों की शांति, पर्यटकों की मुस्कान और स्थानीय लोगों की आजीविका—इन सबके संतुलन के लिए सरकार सजग है, यह संदेश इस दौरे से साफ़ तौर पर निकलकर सामने आया। यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि उत्तराखंड के भविष्य को सुरक्षित और समृद्ध बनाने की प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण है।
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