Vijay Hazare Trophy Virat Kohli Rohit Sharma: विजय हजारे ट्रॉफी का यह मुकाबला सिर्फ एक घरेलू मैच नहीं था, यह भारतीय क्रिकेट के दो सबसे बड़े सितारों की परीक्षा थी। मैदान पर उतरे थे विराट कोहली और रोहित शर्मा, और स्टेडियम से लेकर सोशल मीडिया तक एक ही सवाल गूंज रहा था कौन चलेगा, कौन फेल होगा और किसके बल्ले से निकलेगा बड़ा बयान। लेकिन जो हुआ, उसने फैंस की धड़कनें भी बढ़ाईं और बहस की आग भी भड़का दी।
विराट कोहली ने क्रीज पर कदम रखते ही यह साफ कर दिया कि उनकी मंशा क्या है। शुरुआती गेंदों से ही आक्रामक ड्राइव, कवर के ऊपर से निकले चौके और स्पिनरों पर करारा प्रहार यह कोहली का वही अंदाज़ था जो उन्हें बड़े मैचों का खिलाड़ी बनाता है। घरेलू क्रिकेट में उतरते ही उन्होंने साबित कर दिया कि क्लास कभी आउट ऑफ फॉर्म नहीं होती। गेंदबाज़ों पर दबाव बनाते हुए कोहली शतक की ओर बढ़ रहे थे, हर रन के साथ स्टेडियम का शोर बढ़ रहा था। लेकिन किस्मत और एक छोटी सी चूक ने कहानी बदल दी। 90 के पार पहुंचकर जिस तरह वह आउट हुए, उसने शतक तो छीन लिया, लेकिन संदेश साफ छोड़ दिया विराट कोहली अभी भी गेम के केंद्र में हैं। यह पारी आंकड़ों से ज्यादा इरादों की थी, और यही बात इसे खास बनाती है।
READ MORE: दूसरे टी20 से पहले तिरुवनंतपुरम पहुंचीं दोनों टीमें, रोमांचक मुकाबले की तैयारी
दूसरी तरफ रोहित शर्मा की कहानी बिल्कुल उलट रही। कप्तानी वाला ठहराव, वह नैसर्गिक टाइमिंग और पुल शॉट का जादू सब कुछ जैसे गायब सा दिखा। रोहित क्रीज पर आए जरूर, लेकिन लय में आते उससे पहले ही गेंदबाज़ों ने उनकी कमजोरी पकड़ ली। कुछ डॉट बॉल्स, एक-दो गलत शॉट चयन और फिर विकेट। यह सिर्फ एक सस्ता आउट नहीं था, यह संकेत था कि बड़े नाम होने के बावजूद घरेलू क्रिकेट में कोई रियायत नहीं मिलती। रोहित का बल्ला नहीं चला और यही बात उनके आलोचकों को बोलने का मौका दे गई।
विजय हजारे ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट की असली ताकत यही है। यहां अंतरराष्ट्रीय स्टार भी उतनी ही कड़ी परीक्षा से गुजरते हैं जितना एक नया खिलाड़ी। यह मंच फॉर्म, फिटनेस और मानसिक मजबूती तीनों का टेस्ट लेता है। कोहली की पारी ने दिखाया कि वह अभी भी बड़े मैच का खिलाड़ी हैं, भले ही शतक पूरा न हो पाया हो। वहीं रोहित की नाकामी ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या वह घरेलू क्रिकेट की लय के साथ तालमेल बिठा पा रहे हैं या नहीं।
READ MORE: राशिद खान अपने ही देश में असुरक्षित, बुलेटप्रूफ कार में जीता है क्रिकेट का ग्लोबल स्टार
इस मैच के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया। एक खेमा कोहली की आक्रामक पारी को आने वाले बड़े टूर्नामेंट्स के लिए शुभ संकेत बता रहा है, तो दूसरा खेमा रोहित की फॉर्म पर चिंता जता रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो घरेलू क्रिकेट में हालिया प्रदर्शन चयनकर्ताओं के लिए अहम संकेत बनता जा रहा है। विजय हजारे ट्रॉफी सिर्फ ट्रॉफी जीतने की लड़ाई नहीं, बल्कि टीम इंडिया के भविष्य का ट्रायल ग्राउंड भी है।
READ MORE: IPL का रोमांच और टेस्ट की ताकत: सुपर ओवर-शतक-हैट्रिक के बीच न्यूजीलैंड की 323 रन की ऐतिहासिक जीत
अंत में यही कहा जा सकता है कि इस मुकाबले ने साफ कर दिया नाम बड़ा हो या छोटा, बल्ला बोलेगा तभी सम्मान मिलेगा। कोहली शतक से चूके जरूर, लेकिन उनका तेवर जिंदा है। रोहित शर्मा का बल्ला खामोश रहा, और यही खामोशी अब सबसे बड़ा सवाल बन चुकी है। विजय हजारे ट्रॉफी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय क्रिकेट में हर मैच एक इम्तिहान है, और हर इम्तिहान अगली कहानी लिखता है।
