Ayurvedic Eye Care: डिजिटल युग में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन के बढ़ते इस्तेमाल ने आंखों पर दबाव बढ़ा दिया है। जलन, सूखापन, थकान और धुंधलापन जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। ऐसे समय में आयुर्वेद आंखों की देखभाल के लिए सुरक्षित और प्राकृतिक उपाय सुझाता है। आयुष मंत्रालय भी समय-समय पर पारंपरिक आयुर्वेदिक पद्धतियों को अपनाने की सलाह देता है, ताकि आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सके। यहां हम चार ऐसे आयुर्वेदिक तरीकों के बारे में बता रहे हैं, जो नियमित दिनचर्या में शामिल किए जा सकते हैं और जिनका उद्देश्य आंखों को सहारा देना है किसी बीमारी के इलाज का दावा किए बिना।
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1) त्रिफला से नेत्र स्वच्छता (Triphala Eye Wash)
आयुर्वेद में त्रिफला—हरितकी, बिभीतकी और आंवला का संयोजन—नेत्र स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना गया है। रात में भिगोई गई त्रिफला को सुबह छानकर ठंडा होने पर आंखों की बाहरी स्वच्छता के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे धूल-मिट्टी और प्रदूषण से होने वाली असहजता में राहत मिल सकती है। यह तरीका आंखों की सामान्य सफाई और ताजगी के लिए सहायक माना जाता है। ध्यान रहे कि किसी भी जलन या संक्रमण में विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।
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2) नेत्र तर्पण (Netra Tarpana)
नेत्र तर्पण एक पारंपरिक आयुर्वेदिक प्रक्रिया है, जिसमें शुद्ध घी का सीमित समय के लिए आंखों के चारों ओर उपयोग किया जाता है। इसका उद्देश्य आंखों को पोषण देना और थकान कम करना बताया जाता है। यह प्रक्रिया प्रशिक्षित आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में ही कराई जानी चाहिए। घरेलू स्तर पर स्वयं प्रयोग करने से बचें, क्योंकि आंखें अत्यंत संवेदनशील होती हैं।
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3) आंखों के लिए योग और पामिंग
आयुर्वेद और योग का आपसी संबंध गहरा है। आंखों की मांसपेशियों को आराम देने के लिए पामिंग, आंखों की हल्की एक्सरसाइज और त्राटक जैसे अभ्यास किए जाते हैं। पामिंग में हथेलियों को आपस में रगड़कर आंखों पर हल्के से रखा जाता है, जिससे गर्माहट मिलती है और तनाव घटता है। नियमित अभ्यास से स्क्रीन-थकान में राहत महसूस की जा सकती है।
4) संतुलित आयुर्वेदिक आहार और दिनचर्या
आयुर्वेद आंखों के स्वास्थ्य को संपूर्ण जीवनशैली से जोड़ता है। हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, आंवला, और पर्याप्त पानी आंखों के लिए सहायक माने जाते हैं। देर रात तक जागना, अत्यधिक स्क्रीन-टाइम और धूम्रपान जैसी आदतें आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। समय पर नींद, आंखों को बीच-बीच में आराम और सही रोशनी में पढ़ना ये छोटी-छोटी आदतें बड़े फायदे दे सकती हैं।
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क्यों जरूरी है सावधानी?
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि आयुर्वेदिक तरीके आंखों के सामान्य स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन ये किसी गंभीर नेत्र रोग का उपचार नहीं हैं। किसी भी समस्या, दर्द, लालिमा या दृष्टि में बदलाव होने पर नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श आवश्यक है। आयुष मंत्रालय भी पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक चिकित्सा के साथ संतुलन में अपनाने की बात करता है। आंखें हमारे जीवन की अनमोल संपत्ति हैं। त्रिफला से स्वच्छता, नेत्र तर्पण, योग-पामिंग और संतुलित आयुर्वेदिक दिनचर्या ये चार तरीके आंखों की देखभाल में सहायक हो सकते हैं। इन्हें अपनाते समय स्वच्छता, सही मार्गदर्शन और चिकित्सकीय सलाह का ध्यान रखना जरूरी है। नियमित देखभाल और जागरूकता से आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।
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