Drug Resistant Fungus in India: भारत में ड्रग-रेसिस्टेंट फंगस (Drug Resistant Fungus) एक गंभीर और उभरता हुआ स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। भारतीय वैज्ञानिकों की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे फंगल संक्रमण न सिर्फ तेजी से फैल रहे हैं, बल्कि इनका इलाज भी दिन-प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है। चिंता की बात यह है कि ये फंगस आम एंटी-फंगल दवाओं पर असर नहीं दिखा रहे, जिससे मरीजों की जान पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
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क्या है ड्रग-रेसिस्टेंट फंगस?
ड्रग-रेसिस्टेंट फंगस वे फंगल संक्रमण होते हैं, जिन पर सामान्य एंटी-फंगल दवाएं असर करना बंद कर देती हैं। इसका मतलब यह है कि जिन दवाओं से पहले इलाज संभव था, वे अब बेअसर हो रही हैं। ऐसे संक्रमण शरीर के फेफड़ों, खून, दिमाग और अन्य महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कैंडिडा ऑरिस (Candida auris) जैसे फंगस अस्पतालों में भर्ती गंभीर मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। यह फंगस आईसीयू, वेंटिलेटर और लंबे समय तक एंटीबायोटिक लेने वाले मरीजों में तेजी से फैलता है।
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भारतीय वैज्ञानिकों की रिपोर्ट क्या कहती है?
भारतीय शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य संस्थानों ने चेतावनी दी है कि भारत में ड्रग-रेसिस्टेंट फंगस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। खासकर कोविड-19 के बाद कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीजों में फंगल संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बिना जरूरत एंटीबायोटिक और स्टेरॉयड का इस्तेमाल, अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण की कमी और देर से जांच ये सभी कारण फंगस को मजबूत बना रहे हैं। Indian Council of Medical Research से जुड़े वैज्ञानिकों ने भी समय रहते निगरानी और सही इलाज की रणनीति अपनाने पर जोर दिया है।
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क्यों बन रहा है यह खतरा और बड़ा?
ड्रग-रेसिस्टेंट फंगस के बढ़ने के पीछे कई वजहें हैं,
- अत्यधिक एंटीबायोटिक का प्रयोग: इससे शरीर का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है।
- कमजोर इम्यून सिस्टम: डायबिटीज, कैंसर और लंबे समय की बीमारी वाले मरीज ज्यादा जोखिम में हैं।
- अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण की कमी: साफ-सफाई और स्क्रीनिंग न होना।
- जलवायु और पर्यावरणीय बदलाव: बढ़ती नमी और तापमान फंगस के लिए अनुकूल माहौल बनाते हैं।
लक्षणों को न करें नजरअंदाज
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फंगल संक्रमण के लक्षण कई बार सामान्य बुखार या थकान जैसे लगते हैं, लेकिन समय पर ध्यान न दिया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
मुख्य लक्षणों में शामिल हैं,
- लगातार बुखार
- सांस लेने में तकलीफ
- त्वचा या मुंह में सफेद/काले धब्बे
- कमजोरी और तेजी से बिगड़ती सेहत
बचाव और समाधान क्या है?
विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रग-रेसिस्टेंट फंगस से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
- एंटीबायोटिक और स्टेरॉयड का डॉक्टर की सलाह से ही उपयोग
- अस्पतालों में सख्त इन्फेक्शन कंट्रोल पॉलिसी
- समय पर जांच और सही एंटी-फंगल दवा का चयन
- कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीजों की विशेष निगरानी
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ड्रग-रेसिस्टेंट फंगस भारत के लिए एक साइलेंट लेकिन खतरनाक खतरा बन चुका है। अगर समय रहते सतर्कता नहीं बरती गई, तो यह समस्या आने वाले वर्षों में और विकराल रूप ले सकती है। वैज्ञानिकों की चेतावनी साफ है सही इलाज, जिम्मेदार दवा उपयोग और मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली ही इस चुनौती से निपटने का रास्ता है। यह लेख पूरी तरह तथ्यात्मक है और किसी भी प्रकार के स्कैम या भ्रामक जानकारी से मुक्त रखते हुए तैयार किया गया है, ताकि पाठकों को भरोसेमंद और उपयोगी जानकारी मिल सके।
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