West Bengal Women Safety Violence: पश्चिम बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सांसद Sudhanshu Trivedi ने दक्षिण 24 परगना जिले के भंगनमारी गांव में महिलाओं के साथ कथित बर्बर पिटाई की घटना को लेकर मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और उनकी सरकार पर कड़ा हमला बोला है। त्रिवेदी का कहना है कि इस घटना ने राज्य में कानून-व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने ला दी है और महिलाओं की सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।
भाजपा सांसद ने कहा कि भंगनमारी की घटना कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह उन अनेक मामलों की कड़ी है जो पिछले कुछ समय में सामने आए हैं। उन्होंने South 24 Parganas के भंगनमारी गांव का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस शासन में महिलाओं पर हिंसा बढ़ी है और आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण मिलता रहा है। त्रिवेदी के मुताबिक, ऐसी घटनाएं जनता के भीतर भय और आक्रोश दोनों पैदा कर रही हैं।
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सुधांशु त्रिवेदी ने अपने बयान में Trinamool Congress पर आरोप लगाया कि राज्य में कुछ प्रभावशाली लोग “राजनीतिक लश्कर” की तरह काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चाहे Sandeshkhali का मामला हो या Durgapur Medical College से जुड़ी घटनाएं, हर जगह एक ही पैटर्न दिखता है पीड़ितों की आवाज़ दबाई जाती है और आरोपियों को बचाने की कोशिश होती है। भंगनमारी में जिन लोगों के नाम सामने आए, उन्हें भी उन्होंने इसी प्रवृत्ति का उदाहरण बताया।
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भाजपा सांसद का दावा है कि पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। उनके अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अपराधों में बढ़ोतरी केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी को भी दर्शाती है। त्रिवेदी ने यह भी कहा कि जब मुख्यमंत्री को केंद्रीय गृह मंत्री के खिलाफ तीखे और धमकी भरे शब्दों का सहारा लेना पड़ता है, तो यह दर्शाता है कि राज्य सरकार भीतर से दबाव और विवशता महसूस कर रही है।
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इस बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस की ओर से पलटवार भी हुआ है। पार्टी नेताओं का कहना है कि भाजपा पश्चिम बंगाल की छवि खराब करने के लिए घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है। उनका तर्क है कि राज्य सरकार कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई कर रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, जमीनी स्तर पर विपक्ष का आरोप है कि पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी और डर का माहौल बना रहता है।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा पश्चिम बंगाल की राजनीति में केंद्र में आ सकता है। भंगनमारी जैसी घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं हैं, बल्कि सामाजिक विश्वास और शासन की विश्वसनीयता से भी जुड़ी हैं। यदि इन मामलों में पारदर्शी और त्वरित कार्रवाई नहीं होती, तो यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक टकराव को जन्म दे सकता है।
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कुल मिलाकर, सुधांशु त्रिवेदी के आरोपों ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक संरक्षण जैसे सवालों को सामने ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार इन आरोपों पर क्या ठोस कदम उठाती है और क्या पीड़ित महिलाओं को वास्तव में न्याय मिल पाता है।
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