Ayodhya Pratishtha Dwadashi Ceremony: अयोध्या धाम में आयोजित प्रतिष्ठा द्वादशी समारोह ने एक बार फिर भारत की सनातन चेतना, सांस्कृतिक गौरव और आध्यात्मिक एकात्मता को सशक्त रूप में अभिव्यक्त किया। श्री राम जन्मभूमि मंदिर के पावन प्रांगण में पूज्य संतजन एवं धर्माचार्यों के सान्निध्य में इस भव्य आयोजन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की सहभागिता ने समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पुनर्जागरण यात्रा का केंद्र है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अयोध्या की दिव्यता और भव्यता को अनंत काल तक बनाए रखना प्रत्येक सनातन धर्मावलंबी का कर्तव्य है। यह आयोजन किसी विराम का संकेत नहीं, बल्कि एक नई, व्यापक और समावेशी यात्रा का आरंभ है जिसमें श्रद्धा, सेवा और संस्कार तीनों का समन्वय आवश्यक है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में अयोध्या को भारत की आत्मा से जोड़ते हुए कहा कि श्रीराम के आदर्श मर्यादा, सत्य और करुणा आज के समय में भी राष्ट्रनिर्माण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने मंदिर निर्माण से जुड़े सामाजिक समन्वय और धैर्य की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है। प्रतिष्ठा द्वादशी समारोह में पूज्य संतजन, श्रीराम तीर्थ से जुड़े पदाधिकारीगण, श्रद्धालु और रामभक्त बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। वैदिक मंत्रोच्चार, सामूहिक प्रार्थना और भक्ति-संगीत ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालुओं के चेहरों पर आस्था का उल्लास और हृदयों में रामभक्ति की तरंग स्पष्ट दिखाई दी।
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अयोध्या, जिसे सदियों से रामनगरी कहा जाता है, आज विकास और विरासत के संतुलन का जीवंत उदाहरण बन रही है। मंदिर के साथ-साथ नगर के आधारभूत ढांचे, यातायात, स्वच्छता और पर्यटक सुविधाओं में निरंतर सुधार हो रहा है। इससे स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़े हैं और सांस्कृतिक पर्यटन को नई गति मिली है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि विकास ऐसा हो, जिसमें परंपरा सुरक्षित रहे और भविष्य सुदृढ़ बने।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2026 के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त करते हुए ‘कौशल्यानंदन’ से सभी के जीवन में शुभता और समृद्धि की प्रार्थना की। उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग से आग्रह किया कि अयोध्या की दिव्यता को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं सेवा, स्वच्छता, अनुशासन और सद्भाव के माध्यम से।
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समग्र रूप से, अयोध्या में आयोजित प्रतिष्ठा द्वादशी समारोह ने यह संदेश दिया कि सनातन परंपरा केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रीय एकता का आधार है। श्री राम जन्मभूमि मंदिर की यह यात्रा आस्था से आरंभ होकर संस्कार और सेवा के मार्ग से गुजरते हुए राष्ट्रहित तक पहुंचती है और यही इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
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