Sanjay Singh Bangladesh Cricketer Controversy: राज्यसभा सांसद और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता Sanjay Singh ने बांग्लादेशी क्रिकेटर से जुड़े विवाद पर एक बड़ा और तीखा बयान दिया है। संजय सिंह ने साफ कहा कि वह इस पूरे मामले में धर्माचार्य Devkinandan Thakur के साथ हैं और जरूरत पड़ी तो वह प्रधानमंत्री आवास के सामने धरना देने को भी तैयार हैं। संजय सिंह का यह बयान उस वक्त आया है, जब आईपीएल और बांग्लादेशी खिलाड़ियों को लेकर देश में सियासी और सामाजिक बहस तेज हो चुकी है। उन्होंने सवालों की झड़ी लगाते हुए केंद्र सरकार, बड़े उद्योगपतियों और फिल्मी हस्तियों तक को कठघरे में खड़ा कर दिया।
‘अगर शाहरुख देशद्रोही हैं, तो बाकी क्या?’ संजय सिंह का सीधा सवाल
संजय सिंह ने कहा, ‘अगर बांग्लादेशी खिलाड़ी को टीम में रखने पर Shah Rukh Khan को देशद्रोही कहा जा रहा है, तो फिर बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina को भारत में संरक्षण देने पर प्रधानमंत्री Narendra Modi क्या कहलाएंगे?’ उन्होंने आरोप लगाया कि देश में राष्ट्रवाद को चुनिंदा लोगों और मामलों तक सीमित कर दिया गया है। संजय सिंह के मुताबिक, जब सवाल आम नागरिक या किसी धार्मिक संत की ओर से उठता है, तो उसे दबाने की कोशिश होती है, लेकिन जब वही सवाल सत्ता या पूंजी के इर्द-गिर्द घूमता है, तो चुप्पी साध ली जाती है।
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अडानी और बांग्लादेश को बिजली सप्लाई पर भी निशाना
आप सांसद ने उद्योगपति Gautam Adani पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत की बिजली अगर बांग्लादेश को दी जा रही है, तो उस पर सवाल क्यों नहीं उठते? संजय सिंह ने तर्क दिया कि, ‘अगर राष्ट्रहित की कसौटी इतनी सख्त है, तो फिर यह कसौटी सब पर एक जैसी क्यों नहीं लागू होती? खिलाड़ी, अभिनेता, उद्योगपति और राजनेता सबके लिए अलग-अलग पैमाने क्यों?’ उनका कहना था कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे कथित अत्याचारों की खबरें सामने आने के बावजूद वहां के साथ आर्थिक और राजनीतिक रिश्ते बनाए रखना सत्ता की दोहरे मापदंड वाली नीति को दिखाता है।
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देवकीनंदन ठाकुर का समर्थन और ‘सनातन आवाज़’
धर्माचार्य देवकीनंदन ठाकुर लंबे समय से बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति को लेकर मुखर रहे हैं। संजय सिंह ने कहा कि यह सिर्फ एक संत का मुद्दा नहीं, बल्कि आस्था, सुरक्षा और मानवाधिकार का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि देवकीनंदन ठाकुर की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को चाहिए कि वह बांग्लादेश सरकार से स्पष्ट और सख्त बातचीत करे। संजय सिंह के मुताबिक, ‘जब एक संत सवाल उठाता है, तो उसे राजनीति कहकर खारिज कर दिया जाता है, लेकिन असल में यह समाज की पीड़ा की आवाज है।’
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धरने की चेतावनी और सियासी तापमान
आप नेता ने साफ शब्दों में कहा कि अगर सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखती है, तो वह प्रधानमंत्री आवास के सामने शांतिपूर्ण धरना देने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि यह धरना किसी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि न्याय और समान नीति के लिए होगा। संजय सिंह के इस बयान के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से सड़क तक गूंज सकता है।
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बीजेपी पर परोक्ष हमला, विपक्षी एकजुटता के संकेत
हालांकि संजय सिंह ने सीधे तौर पर बीजेपी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान का सीधा निशाना केंद्र सरकार की नीतियां रहीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान विपक्षी दलों को एक साझा मंच देने की कोशिश भी हो सकता है, जहां राष्ट्रवाद, धर्म और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा जा सके।
देश में दो राष्ट्रवाद? बड़ा सवाल
इस पूरे विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है क्या देश में राष्ट्रवाद के दो पैमाने हैं? एक आम नागरिक, संत या खिलाड़ी के लिए एक नियम और सत्ता, पूंजी व कूटनीति से जुड़े लोगों के लिए दूसरा? संजय सिंह का बयान इसी सवाल के इर्द-गिर्द घूमता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या यह मुद्दा सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित रहेगा या किसी बड़े आंदोलन का रूप लेगा।
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बांग्लादेशी क्रिकेटर विवाद अब केवल खेल तक सीमित नहीं रहा। यह मुद्दा राजनीति, धर्म, विदेश नीति और राष्ट्रवाद चारों को जोड़ता नजर आ रहा है। संजय सिंह का देवकीनंदन ठाकुर के समर्थन में खुलकर सामने आना इस बहस को और धार दे सकता है, जिसका असर आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों में साफ दिख सकता है।
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