Uttarakhand Road Connectivity Projects: उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए सड़क कनेक्टिविटी केवल यातायात का साधन नहीं, बल्कि विकास, सुरक्षा, पर्यटन और आर्थिक आत्मनिर्भरता की रीढ़ है। इसी सोच के साथ राज्य में सड़क नेटवर्क को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल सामने आई है। शासकीय आवास पर प्रदेश की प्रमुख सड़क परियोजनाओं को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री Ajay Tamta के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया गया, जिसमें सभी प्रस्तावित योजनाओं पर सहमति व्यक्त की गई है।यह बैठक उत्तराखंड के बुनियादी ढांचे को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। खास बात यह रही कि इन परियोजनाओं को अंतिम स्वीकृति दिलाने के लिए शीघ्र ही केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari से मुलाकात की जाएगी, जिससे योजनाओं को तेजी से मंजूरी मिल सके।
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रणनीतिक दृष्टि से अहम हैं प्रस्तावित सड़क परियोजनाएं
इस बैठक में जिन सड़क परियोजनाओं को प्रमुखता से रखा गया, वे राज्य के पर्यटन, व्यापार, आपदा प्रबंधन और स्थानीय आवागमन के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। इनमें सबसे प्रमुख ऋषिकेश बाईपास परियोजना शामिल है। ऋषिकेश धार्मिक और पर्यटन दोनों दृष्टियों से देश-विदेश में प्रसिद्ध है, लेकिन बढ़ते ट्रैफिक के कारण यहां आए दिन जाम की समस्या बनी रहती है। बाईपास के निर्माण से न केवल शहर को जाम से राहत मिलेगी, बल्कि चारधाम यात्रा मार्ग भी अधिक सुगम होगा। इसके अलावा अल्मोड़ा-दन्या-पनार-घाट मार्ग को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। यह मार्ग कुमाऊं क्षेत्र के कई दूरस्थ इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। वर्तमान में इन क्षेत्रों में आवागमन की सीमित सुविधाएं हैं, जिससे स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
पहाड़ से राजधानी तक आसान सफर का रास्ता
बैठक में ज्योलिकोट-खैरना-गैरसैंण-कर्णप्रयाग मार्ग के निर्माण प्रस्ताव को भी विशेष महत्व दिया गया। गैरसैंण उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी है और यहां तक सुचारु सड़क कनेक्टिविटी लंबे समय से राज्य की प्राथमिक मांग रही है। इस मार्ग के मजबूत होने से न केवल प्रशासनिक कार्यों में आसानी आएगी, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों को बेहतर संपर्क सुविधा भी मिलेगी। वहीं अल्मोड़ा-बागेश्वर-काण्डा-उडियारी बैंड मार्ग को क्षेत्रीय व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है। यह सड़क किसानों, बागवानों और छोटे व्यापारियों के लिए बाजार तक पहुंच आसान बनाएगी, जिससे उनकी आय में सीधा इजाफा होगा।
राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़े अहम मुद्दे भी उठे
बैठक के दौरान केवल नई परियोजनाओं पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़े राज्य के कई लंबित और महत्वपूर्ण मामलों को भी केंद्रीय राज्य मंत्री के समक्ष प्रमुखता से रखा गया। इनमें सड़कों की चौड़ाई बढ़ाने, सुरक्षा मानकों को मजबूत करने, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में स्थायी समाधान और पर्वतीय क्षेत्रों के अनुकूल डिजाइन जैसी बातें शामिल रहीं। केंद्रीय मंत्री ने इन मुद्दों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार उत्तराखंड की भौगोलिक चुनौतियों को समझते हुए हरसंभव सहयोग करेगी।
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पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगा सीधा लाभ
इन सड़क परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से उत्तराखंड में पर्यटन को नई गति मिलने की पूरी संभावना है। बेहतर सड़कें न केवल देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए यात्रा को आसान बनाएंगी, बल्कि होटल, होम-स्टे, टैक्सी सेवाओं और स्थानीय रोजगार के अवसरों में भी इजाफा करेंगी। इसके साथ ही व्यापारिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी। पहाड़ी क्षेत्रों से कृषि उत्पाद, हस्तशिल्प और स्थानीय सामान अब तेजी और कम लागत में बाजार तक पहुंच सकेंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ होगा और पलायन जैसी गंभीर समस्या पर भी अंकुश लग सकता है।
आपदा प्रबंधन और सुरक्षा के लिहाज से भी अहम
उत्तराखंड भूकंप, भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। मजबूत और वैकल्पिक सड़क नेटवर्क आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों को तेज और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रस्तावित सड़क परियोजनाएं इस दृष्टि से भी राज्य की सुरक्षा को मजबूत करेंगी।
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विकास की राह पर उत्तराखंड
कुल मिलाकर, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री के साथ हुई यह बैठक उत्तराखंड के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत है। यदि ये परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से मंजूरी पाकर जमीन पर उतरती हैं, तो आने वाले वर्षों में राज्य की तस्वीर काफी हद तक बदल सकती है। सड़क कनेक्टिविटी के मजबूत होने से उत्तराखंड न केवल पर्यटन और व्यापार का नया केंद्र बनेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में भी ठोस सुधार देखने को मिलेगा। यह पहल उस सोच को दर्शाती है, जिसमें विकास केवल कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि पहाड़ के आखिरी गांव तक पहुंचाने का संकल्प शामिल है।
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