AI Human Capital India: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में सिर्फ टेक्नोलॉजी ही नहीं, बाल्की ह्यूमन कैपिटल सबसे बड़ा गेम-चेंजर बन चुका है। इसी विजन के साथ गवर्नमेंट, एकेडेमिया और इंडस्ट्री के टॉप स्टेकहोल्डर्स एक ही प्लेटफॉर्म पर इकत हुए जगह थी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गुवाहाटी (IIT गुवाहाटी)। यह मीट सिर्फ एक कॉन्फ्रेंस नहीं, बाल्की इंडिया के AI-ड्रिवन फ्यूचर का ब्लूप्रिंट तैयार करने का ग्लैमरस और हाई-इम्पैक्ट मंथन था। आज जब दुनिया AI-फर्स्ट इकोनॉमी की तरफ बढ़ रही है, तब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कौन सी टेक्नोलॉजी यूज होगी, बाल्की यह है कि कौन लोग इस टेक्नोलॉजी को लीड करेंगे। इसी कॉन्टेक्स्ट में IIT गुवाहाटी का यह इवेंट AI ह्यूमन कैपिटल इंडिया को रीडिफाइन करने की एक बोल्ड कोशिश बनकर उभरेगा।
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AI Era: डिग्री से ज़्यादा स्किल्स की डिमांड
कॉन्फ्रेंस का सबसे स्ट्रॉन्ग टेकअवे यह रहा है कि ट्रेडिशनल डिग्री अब काफी नहीं हैं। AI एरा में डिमांड है मल्टी-डिसिप्लिनरी स्किल्स की जहां कोडिंग के साथ-साथ क्रिएटिविटी, एथिक्स, पॉलिसी अंडरस्टैंडिंग और प्रॉब्लम-सॉल्विंग का परफेक्ट ब्लेंड हो। स्पीकर्स ने साफ कहा कि फ्यूचर का प्रोफेशनल सिर्फ इंजीनियर या मैनेजर नहीं होगा, बाल्की AI-लिटरेट डिसीजन मेकर होगा। सरकारी रिप्रेजेंटेटिव्स ने इस बात पर ज़ोर दिया कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसीज़ को AI-सेंट्रिक बनाना अब चॉइस नहीं, नेचर है। इंडस्ट्री लीडर्स ने भी खुले तौर पर माना कि उन्हें ऐसे टैलेंट की ज़रूरत है जो सिर्फ टूल्स इस्तेमाल न करें, लेकिन AI सिस्टम्स को ज़िम्मेदारी से डिज़ाइन और डिप्लॉय कर सकें।
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एकेडेमिया का रोल, क्लासरूम से बोर्डरूम तक
IIT गुवाहाटी जैसे इंस्टीट्यूशन्स पर अब ज़िम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। डिस्कशन में यह बात उभार कर आई कि करिकुलम को रियल-वर्ल्ड इंडस्ट्री चैलेंजेस से अलाइन करना होगा। AI लैब्स, लाइव इंडस्ट्री प्रोजेक्ट्स, इंटर्नशिप्स और ग्लोबल कोलैबोरेशन्स ये सब फ्यूचर-रेडी ह्यूमन कैपिटल के कोर पिलर्स बताए गए। प्रोफेसर्स और रिसर्चर्स ने यह भी हाइलाइट किया कि AI सिर्फ इंजीनियरिंग तक सिमित नहीं रहना चाहिए। लॉ, हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर, मीडिया और गवर्नेंस हर सेक्टर के स्टूडेंट्स के लिए AI लिटरेसी ज़रूरी है। यही अप्रोच AI ह्यूमन कैपिटल इंडिया को इनक्लूसिव और स्केलेबल बना सकती है।
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जॉब्स, इनोवेशन और ग्लोबल रेस
इंडस्ट्री लीडर्स के सेशंस इवेंट का सबसे ग्लैमरस हिस्सा रहे। बिग टेक से लेकर इमर्जिंग स्टार्टअप्स तक, सबका एक ही मैसेज था इंडिया के पास टैलेंट है, बस उसे सही डायरेक्शन देना है। AI-बेस्ड जॉब्स फ्यूचर में सिर्फ मेट्रो तक लिमिटेड नहीं रहेंगी, टियर-2 और टियर-3 शहर भी इनोवेशन हब बन सकते हैं। इंडस्ट्री ने यह भी क्लियर किया कि एथिकल AI और रिस्पॉन्सिबल इनोवेशन पर कॉम्प्रोमाइज नहीं हो सकता। बायस-फ्री एल्गोरिदम, डेटा प्राइवेसी और ट्रांसपेरेंसी यह सब नए ज़माने के प्रोफेशनल्स के कोर वैल्यूज़ होने चाहिए।
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सरकारी विज़न पॉलिसी + टैलेंट = पावर
सरकारी अधिकारियों ने अपने विज़न में बताया कि कैसे स्किल मिशन, डिजिटल यूनिवर्सिटी और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के ज़रिए AI ह्यूमन कैपिटल इंडिया को ग्लोबल बेंचमार्क बनाया जा सकता है। नॉर्थईस्ट इंडिया के लिए IIT गुवाहाटी जैसे इंस्टीट्यूशन को AI एक्सीलेंस हब के रूप में डेवलप करने का रोडमैप भी डिस्कस हुआ। यह मीटिंग एक मज़बूत सिग्नल थी कि इंडिया सिर्फ़ AI कंज्यूमर नहीं, बाल्की AI लीडर बनने के मूड में है जहां पॉलिसी, एजुकेशन और इंडस्ट्री एक ही दिशा में काम कर रहे हैं।
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फ्यूचर पहले ही शुरू हो चुका है
IIT गुवाहाटी की यह हाई-प्रोफाइल मीटिंग एक बात साफ़ तौर पर साबित करती है AI का फ्यूचर दूर नहीं, बाल्की पहले ही शुरू हो चुका है। अब रेस सिर्फ़ टेक्नोलॉजी की नहीं, बाल्की टैलेंट की है। जो देश अपने ह्यूमन कैपिटल को AI-रेडी बना लेगा, वही ग्लोबल लीडरशिप की कुर्सी पर बैठेगा। और अगर बात हो AI ह्यूमन कैपिटल इंडिया की, तो मैसेज साफ़ है बोल्ड सोचो, स्मार्ट स्किल करो, और AI क्रांति को लीड करो।
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