Faiz-e-Ilahi Masjid Bulldozer Action: दिल्ली के दिल में रात के अंधेरे में जो हुआ, उसने सिर्फ एक इलाके को नहीं, बाल्की पूरे देश की पॉलिटिक्स और इंसानी जज़्बात को झकझोर कर रख दिया। फैज-ए-इलाही मस्जिद के आस-पास MCD की बुलडोजर कार्रवाई, और फिर रात करीब 1:30 बजे रामपुर के MP मोहिबुल्लाह नदवी का वहां पहुंचना यहीं से कहानी ने एक नया मोड़ ले लिया। सवाल सिर्फ अतिक्रमण का नहीं रहा, सवाल नीयत, टाइमिंग और सिस्टम की रवायत पर उठ खड़े हुए। इस पूरे मामले पर SP के सीनियर लीडर और पूर्व MP एस. टी. हसन खुलकर सामने आए। उनका कहना सीधा और तीखा था ‘रात के अंधेरे में बुलडोजर ले जाने वाले अधिकारियों पर एक्शन होना चाहिए।‘ हसन ने इस मामले में सीधे देश के होम मिनिस्टर अमित शाह से सवाल करते हुए कहा कि अगर एनक्रोचमेंट इतना ही बड़ा मुद्दा था, तो जब यह बन रहा था तब अधिकारी कहां थे?
फैज-ए-इलाही मस्जिद बुलडोजर एक्शन
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हसन का कहना है कि BJP-शासित राज्यों में एक खास कम्युनिटी को टारगेट किया जा रहा है, और दिल्ली भी अब उसी रास्ते पर चलती दिख रही है। रात के वक्त, इतने सेंसिटिव इलाके में बुलडोजर एक्शन लेना क्या ज़रूरी था? क्या दिन के उजाले में, लोगों को विश्वास में लेकर काम नहीं हो सकता था? यह सवाल सिर्फ कानून का नहीं, बाल्की इंसानी संवेदना का भी है।
मोहिबुल्लाह नदवी का पहुंचनेसे और उठा हंगामा
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उन्होंने दिल्ली नगर निगम यानी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ़ दिल्ली पर भी निशाना साधते हुए कहा कि रात के अंधेरे में एक्शन लेना अब आदत बन चुकी है। कई मज़ारों को हटा दिया गया, और अब मस्जिदों पर नज़र है। हसन के शब्दों में, ‘यह शहर किसी एक पार्टी का नहीं, यह देश के लोगों का है। प्रशासन का काम सिर्फ बुलडोज़र चलाना नहीं, भरोसा बनाना भी होता है।‘ मोहिबुल्लाह नदवी के मौके पर पहुंचने को लेकर जो हंगामा खड़ा हुआ, उस पर हसन का रिएक्शन और ज़्यादा तीखा था। क्या नदवी वहां कट्ट लेकर गए थे? क्या उनके हाथ में पत्थर था? हसन ने पूछा। उनका कहना था कि एक MP का प्रोटोकॉल होता है वो कहीं भी जा सकते हैं, किसी भी नागरिक के साथ खड़े हो सकते हैं। अगर एक संसद वहां खड़ा हो गया, तो क्या वो तुरंत संधि बन गया?
एस. टी. हसन का तीखा सवाल ?
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हसन ने यह भी कहा कि MCD को रात के 2 बजे वहां जाने की क्या मजबूरी थी? लोग गुस्से में क्यों आए, माहौल क्यों हुआ इसकी ज़िम्मेदारी भी उन अधिकारियों की है जिन्होंने बिना तैयारी और बिना संवाद के एक्शन लिया। अगर अतिक्रमण था, तो पहले ज़िम्मेदार अधिकारियों पर एक्शन होना चाहिए जो इतने सालों तक आँख बंद करके बैठे रहें। इस पूरे मामले को लेकर SP नेता का कहना है कि नदवी का वहाँ जाना बिल्कुल सही था। वो वहाँ लोगों की आवाज़ बन गए थे, न कि कोई हंगामा खड़ा करने के लिए। ‘आपने तो तमाशा बना दिया,’ हसन ने कहा, ‘जैसे ही पता चला कि SP का MP गया है, तुरंत नैरेटिव बना दिया उछालो इसको, बदनाम करो।‘
MCD की नाइट बुलडोजर पॉलिसी पर विपक्ष का हमला
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यह स्क्रिप्ट सिर्फ एक मस्जिद या एक रात की कहानी नहीं है। यह उस सोच का प्रतीक है जहां बुलडोजर पहले चलता है और सवाल बाद में पूछे जाते हैं। यह उस सियासत का आईना है जहाँ एक MP का मौके पर पहुंचना भी शेख के दायरे में ला दिया जाता है। और सबसे बड़ा सवाल क्या कानून सिर्फ मशीन के ज़ोर पर चलेगा, या लोगों के विश्वास के साथ? आज दिल्ली से उठती यह आवाज़ कल पूरे देश में गूंज सकती है। क्योंकि जब रात के अँधेरे में फैसले के लिए जाते हैं, तो सुबह उन पर सवाल ज़रूर उठते हैं। और यही सवाल इस वक़्त सबसे ज़्यादा वायरल हो रहा है।
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