PIYUSH GOYAL EUROPE DIPLOMACY PUSH: भारत की ग्लोबल ट्रेड डिप्लोमेसी एक नए फेज में एंटर कर चुकी है और इसका ताजा उदाहरण कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल की यूरोप विजिट के दौरान सामने आया है। बुधवार को पीयूष गोयल ने सबाइन मोनाउनी से, जो लिकटेंस्टीन की डिप्टी प्राइम मिनिस्टर और फॉरेन अफेयर्स मिनिस्टर हैं, उनके साथ एक इंपॉर्टेंट मीटिंग की। इस मीटिंग का कोर एजेंडा था – इंडिया और लिकटेंस्टीन के बीच इकोनॉमिक को-ऑपरेशन को कैसे नेक्स्ट लेवल पर ले जाया जाए, स्पेशल उस टाइम जब इंडिया-EFTA ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) अब ऑपरेशनल होने जा रहा है।

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मीटिंग के बाद पीयूष गोयल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि डिस्कशन का फोकस ट्रेड एक्सपेंशन, इनोवेशन और क्लीन टेक्नोलॉजी कोलेबोरेशन पर रहा। उन्होंने इस पार्टनरशिप को “यूनिक” बताते हुए साफ तौर पर अंडरलाइन किया कि इंडिया के पास टैलेंट, स्केल और मैसिव डिमांड है, जबकी लिकटेंस्टीन जैसे देश हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग और स्पेशलाइज्ड इंजीनियरिंग में वर्ल्ड-क्लास एक्सपर्टीज रखते हैं। यह कॉम्बिनेशन आने वाले सालों में ट्रेड, इन्वेस्टमेंट और टेक्नोलॉजी फ्लो को काफी एक्सेलरेट कर सकता है।
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यहां समझना जरूरी है कि इंडिया-EFTA TEPA सिर्फ एक रूटीन ट्रेड डील नहीं है। यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन के चार मेंबर स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन – इस एग्रीमेंट का हिस्सा हैं। यह एग्रीमेंट 1 अक्टूबर से ऑपरेशनल होने जा रहा है और इसके तहत EFTA देशों ने इंडिया में 15 साल के अंदर $100 बिलियन के इन्वेस्टमेंट का कमिटमेंट दिया है। सरकारी अनुमानों के मुताबिक, इससे करीब 10 लाख डायरेक्ट जॉब्स बनने की संभावना है। मतलब ये सिर्फ ट्रेड नंबर्स का गेम नहीं है, बाल्की एम्प्लॉयमेंट और इंडस्ट्रियल ग्रोथ का भी बड़ा इंजन बनने वाला है।
पीयूष गोयल की यूरोप विज़िट यहीं पर खत्म नहीं होती। लिकटेंस्टीन मीटिंग के बाद उनका फोकस ब्रसेल्स पर है, जहां वो दो दिन तक यूरोपियन यूनियन के साथ इंटेंसिव ट्रेड टॉक करने वाले हैं। इंडिया-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर काफी टाइम से नेगोशिएशन चल रही हैं, और अब नई दिल्ली चाहता है कि इस प्रोसेस को फ्रेश मोमेंटम मिले। इस विज़िट को इसी डायरेक्शन में एक मजबूत पॉलिटिकल सिग्नल के तौर पर देखा जा रहा है।
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इंडिया का क्लियर स्टैंड है कि लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स को यूरोप के मार्केट्स में ज़ीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलना चाहिए। टेक्सटाइल, लेदर, अपैरल, जेम्स एंड ज्वेलरी और हैंडीक्राफ्ट जैसे सेक्टर सीधे करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी से जुड़े हुए हैं। अगर EU मार्केट इन सेक्टर के लिए और ओपन होता है, तो मेक इन इंडिया को भी ग्लोबल सप्लाई चेन में ज़्यादा मज़बूत पोज़िशन मिल सकती है। ब्रसेल्स में पीयूष गोयल की हाई-लेवल मीटिंग मारोस सेफ्कोविक, जो यूरोपियन यूनियन के कमिश्नर फॉर ट्रेड एंड इकोनॉमिक सिक्योरिटी हैं, के साथ एक्सपेक्टेड है। बातचीत का ऑब्जेक्टिव सिर्फ डिस्कशन तक सीमित नहीं है, बाल्की नेगोशिएटिंग टीम्स को स्ट्रेटेजिक डायरेक्शन देना, पेंडिंग इश्यूज़ को सॉल्व करना और एक बैलेंस्ड और एम्बिशियस एग्रीमेंट को जल्दी से जल्दी फाइनल शेप देना है।
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यह मिनिस्टीरियल एंगेजमेंट एक आइसोलेटेड इवेंट नहीं है। इससे पहले पिछले हफ़्ते ब्रसेल्स में गहरी बातचीत हुई थी, जहां इंडिया के कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल और यूरोपियन कमीशन की डायरेक्टर-जनरल फॉर ट्रेड सबाइन वेयंड के बीच हाई-लेवल बातचीत हुई। इन सब मीटिंग्स का एक ही सिग्नल है – इंडिया और EU दोनों की पॉलिटिकल विल मज़बूत है और दोनों एक कॉम्प्रिहेंसिव एग्रीमेंट चाहते हैं। प्रपोज़्ड इंडिया EU FTA से सिर्फ़ ट्रेड वॉल्यूम ही नहीं बढ़ेंगे, बाल्की एक रूल्स-बेस्ड ट्रेडिंग फ्रेमवर्क को भी मज़बूत मिलेगी। गवर्नमेंट का फ़ोकस इस बात पर भी है कि इस डील के दौरान किसानों और MSMEs के इंटरेस्ट से कॉम्प्रोमाइज़ न हों। साथ ही इंडियन इंडस्ट्रीज़ को ग्लोबल वैल्यू चेन्स के साथ इंटीग्रेट करना भी एक मेन ऑब्जेक्टिव है, ताकि लॉन्ग-टर्म कॉम्पिटिटिवनेस सुनिश्चित हो सके। अगर पूरी तस्वीर देखें तो पीयूष गोयल की ये मीटिंग्स इंडिया की बदलती ग्लोबल इकोनॉमिक स्ट्रैटेजी को साफ तौर पर दिखाती हैं।
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एक तरफ EFTA जैसे हाई-इनकम, टेक्नोलॉजी ड्रिवन पार्टनर्स के साथ डीप एंगेजमेंट, और दूसरी तरफ EU के साथ एक एम्बिशियस FTA की पुश दोनों मिलकर ये बताते हैं कि इंडिया अब सिर्फ एक मार्केट नहीं, बल्कि एक सीरियस ग्लोबल इकोनॉमिक पार्टनर के रूप में अपनी पोजिशनिंग कर रहा है। टैलेंट, स्केल और डिमांड के साथ अगर हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग और क्लीन टेक्नोलॉजी जुड़ जाती है, तो ये पार्टनरशिप सिर्फ यूरोप के लिए ही नहीं, बल्कि इंडिया की ग्रोथ स्टोरी के लिए भी गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
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