Indian Stock Market Returns: इंडिया के स्टॉक मार्केट को लेकर एक बड़ी और पॉजिटिव खबर सामने आई है। ग्लोबल फाइनेंशियल जायंट मॉर्गन स्टेनली की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले कुछ महीनों में इंडियन स्टॉक मार्केट के रिटर्न में अच्छी खासी सुधार देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट का कहना है कि पिछले 12 महीने इंडियन मार्केट के लिए रिकॉर्ड के हिसाब से सबसे कमजोर परफॉर्मेंस वाले रहे हैं, लेकिन इसी कमजोरी के बीच अब कुछ ऐसे फंडामेंटल्स उभर कर आ रहे हैं जो मार्केट के लिए टर्निंग पॉइंट बन सकते हैं। मॉर्गन स्टेनली के एनालिसिस के मुताबिक इक्विटी वैल्यूएशन अब उन लेवल के करीब पहुंच चुकी हैं जो पहले मार्केट के बॉटम फेज में देखे गए थे, और एक बहुत ही ज़रूरी बात यह है कि लगभग पांच साल बाद पहली बार इक्विटीज, शॉर्ट-टर्म इंटरेस्ट रेट्स के मुकाबले ज्यादा अट्रैक्टिव दिख रहे हैं।
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रिपोर्ट में क्लियर तौर पर कहा गया है कि वैल्यूएशन, पिछली मार्केट परफॉर्मेंस, मैक्रोइकोनॉमिक कंडीशन, इन्वेस्टर पोजिशनिंग और ग्रोथ साइकिल – ये सब इंडिकेटर एक साथ मिलकर इस बात का सिग्नल दे रहे हैं कि आने वाले समय में स्टॉक मार्केट रिटर्न बेहतर हो सकते हैं। मॉर्गन स्टेनली का मॉडिफाइड अर्निंग्स यील्ड गैप भी यही बताता है कि इक्विटी इन्वेस्टर्स के लिए रिस्क-रिवॉर्ड इक्वेशन धीरे-धीरे इम्प्रूव हो रहा है। सीधी भाषा में समझें तो इसका मतलब यह है कि जो रिस्क इन्वेस्टर अब ले रहे हैं, उनके बदले मिलने वाला पोटेंशियल रिटर्न पहले के मुकाबले ज़्यादा बेहतर हो सकता है।
रिपोर्ट का सबसे मज़बूत पॉइंट है इंडिया के ग्रोथ मोमेंटम में आती तेज़ी। मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि इंडिया का ग्रोथ साइकिल अब एक्सेलरेशन मोड में आ रहा है, जिसका सीधा फ़ायदा कॉर्पोरेट अर्निंग्स को मिलेगा। अर्निंग्स ग्रोथ के तेज़ी से ऊपर जाने की उम्मीद की जाती है। क्या ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए पॉलिसी लेवल पर भी काफ़ी मज़बूत टेलविंड दिख रहे हैं। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया और सरकार दोनों तरफ़ से ऐसे कदम उठा रहे हैं जो लिक्विडिटी और डिमांड को बूस्ट कर सकते हैं। इंटरेस्ट रेट में कटौती, CRR में कटौती, बैंकिंग सुधार और सिस्टम में लिक्विडिटी सपोर्ट जैसे उपाय ग्रोथ के लिए फ्यूल का काम कर सकते हैं।
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डिमांड साइड पर भी काफी मजबूत सिग्नल मिल रहे हैं। फ्रंट-लोडेड कैपिटल एक्सपेंडिचर का मतलब है कि सरकार इंफ्रा और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स पर खर्चा पहले ही शुरू कर रही है, जिससे इकॉनमी में पैसा सर्कुलेट होगा। इसके साथ ही लगभग 1.5 ट्रिलियन रुपये के GST रेट में कटौती का अनुमान दिया गया है, जो मुख्य रूप से मास कंजम्प्शन को फायदा पहुंचाएगा। जब आम लोगों की परचेजिंग पावर बढ़ेगी, तो FMCG, रिटेल, ऑटो और सर्विसेज जैसे सेक्टर्स को सीधा फायदा मिलेगा, और इसका पॉजिटिव असर स्टॉक मार्केट पर भी दिख सकता है।
इंटरनेशनल फ्रंट पर भी कुछ चीजें इंडिया के फेवर में जा रही हैं। रिपोर्ट में इंडिया-चाइना रिलेशन में सुधार और चीन की तरफ से आने वाले पॉलिसी इनिशिएटिव को पॉजिटिव सिग्नल माना गया है। इससे यह इंडिकेशन मिलता है कि पोस्ट-COVID पीरियड में जो हॉकिश मैक्रो स्टांस था, उसमें धीरे-धीरे रिवर्सल हो रहा है। ग्लोबल ट्रेड और सप्लाई चेन के नजरिए से यह इंडिया के लिए सपोर्टिव हो सकता है, स्पेशल एक्सपोर्ट और सर्विसेज सेक्टर के लिए।
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मैक्रोइकोनॉमिक इंडिकेटर्स की बात करें तो मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि करंट कंडीशन इक्विटीज के लिए काफी फेवरेबल हैं। यील्ड कर्व का स्टीप होना, मनी सप्लाई डायनामिक्स का इम्प्रूव होना, नॉमिनल ग्रोथ का इंटरेस्ट रेट्स से तेज रहना और रुपया का अंडरवैल्यूड होना – यह कॉम्बिनेशन हिस्टोरिकली स्ट्रॉन्ग इक्विटी रिटर्न्स के साथ जुड़ा रहा है। आसान शब्दों में, जब इकॉनमी की ग्रोथ स्पीड, बॉरोइंग कॉस्ट से तेज़ होती है और करेंसी कॉम्पिटिटिव रहती है, तो कंपनियों के प्रॉफिट बढ़ते हैं और मार्केट को सपोर्ट मिलता है। इन्वेस्टर पोजिशनिंग भी एक इंटरेस्टिंग फैक्टर है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले चार सालों में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स का एक्सपोजर काफी कम हुआ है। इसका मतलब यह है कि अगर मार्केट ऊपर की तरफ मूव करते हैं, तो FPI के लिए एक पेन ट्रेड सिचुएशन बन सकती है, जहां उन्हें मिस हो जाने के डर से वापस खरीदना पड़े। ऐसी सिचुएशन में मार्केट और तेज़ ऊपर जा सकते हैं।
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मॉर्गन स्टेनली मार्केट री-रेटिंग की भी बात कर रहा है। इसके पीछे कुछ स्ट्रक्चरल कारण बताए गए हैं जैसे तेल पर इंडिया की निर्भरता धीरे-धीरे कम होना, एक्सपोर्ट का बढ़ता हुआ हिस्सा, स्पेशल सर्विसेज़ एक्सपोर्ट, और सरकार की तरफ से लगातार फिस्कल कंसोलिडेशन। इन सबका मिला-जुला असर यह हो सकता है कि लॉन्ग टर्म में रियल इंटरेस्ट रेट कम रहें और इकोनॉमिक वोलैटिलिटी कम हो। जब इकोनॉमी ज़्यादा स्टेबल होती है, तो इन्वेस्टर्स को हायर वैल्यूएशन देने को तैयार होते हैं, जिससे मार्केट को और सपोर्ट मिलता है।
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कुल मिलाकर, मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट यह कह रही है कि पिछले एक साल की कमज़ोर परफॉर्मेंस के बाद इंडियन स्टॉक मार्केट अब एक बेहतर फेज़ की तरफ बढ़ रहा है। वैल्यूएशन आकर्षक हो चुकी हैं, ग्रोथ मोमेंटम पिक अप कर रहा है, पॉलिसी सपोर्ट मिल रहा है और मैक्रो इंडिकेटर्स इक्विटीज के फेवर में हैं। अगर ये ट्रेंड्स ऐसे ही बने रहें, तो आने वाले महीनों में इंडियन स्टॉक मार्केट इन्वेस्टर्स के लिए बेहतर रिटर्न का स्ट्रॉन्ग चांस है।
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