Viksit Bharat Mission: लखनऊ से बड़ी और अहम अपडेट ने उत्तर प्रदेश के हेल्थ सिस्टम को लेकर नई उम्मीद जगाई है। 07 जनवरी 2026 को विधानसभा के क्लास नंबर 08 में उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग और उससे जुड़ी सभी अनुशांगिक संस्थाओं की एक ज़रूरी समीक्षा बैठक पूरी हुई। इस बैठक का केंद्रीय विषय था “विकसित भारत” और उस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र के उन 19 पैरामीटर्स पर अमल करें, जिनके लिए उत्तर प्रदेश की हेल्थ सर्विसेज़ को ज़्यादा मज़बूत, समावेशी और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन बनाना है।
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इस बैठक का मकसद सिर्फ फाइल रिव्यू या रूटीन डिस्कशन तक सीमित नहीं था, बाल्की ज़मीन पर दिखने वाले रिजल्ट्स को लेकर था। हेल्थ सिस्टम को कैसे लोगों के लिए आसान, एक्सेसिबल और क्वालिटी-बेस्ड बनाया जाए, इसी पर सबसे ज़्यादा ज़ोर दिया गया। उप-मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब स्वस्थ व्यवस्था मज़बूत होगी, क्योंकि स्वस्थ नागरिक ही सशक्त भारत की बुनियाद होते हैं।
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बैठक में आयुष्मान भारत कार्ड के कवरेज को और बढ़ाने, हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम को लास्ट माइल तक पहुंचाने और फ्री इलाज की सुविधा को ज़्यादा ट्रांसपेरेंट और इफेक्टिव बनाने पर डिटेल में बात हुई। यह भी कहा गया कि कोई भी गरीब या ज़रूरी व्यक्ति सिर्फ जानकारी के अभाव या टेक्निकल देरी की वजह से इलाज से वंचित न रहे। सरकार का फोकस यह है कि हर योग्य नागरिक तक हेल्थ स्कीम का फायदा पहुंचाने के लिए और सिस्टम इतना मजबूत हो कि बिचौलिए या देरी की गूंज ही न बचे।
इस समीक्षा बैठक का एक बहुत ही ज़रूरी पहलू रहा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल। AI से बीमारी का अनुमान, जल्दी पता चलना, हॉस्पिटल मैनेजमेंट, पेशेंट डेटा मॉनिटरिंग और मेडिसिन सप्लाई चेन को बेहतर बनाने पर खास चर्चा हुई। यह माना गया है कि अगर टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल हो, तो कम रिसोर्स में भी ज़्यादा बेहतर रिजल्ट दिए जा सकते हैं। उप-मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि AI और डिजिटल टूल्स को सिर्फ पेपर प्लानिंग तक सीमित न रखा जाए, बाल्की उनका रियल-टाइम इम्प्लीमेंटेशन ग्राउंड लेवल पर दिखना चाहिए। बैठक में स्पष्ट रूप से यह भी कहा गया है कि 19 पैरामीटर पर काम सिर्फ डिपार्टमेंट-वाइज नहीं बाल्की कोऑर्डिनेशन के साथ होगा। मेडिकल एजुकेशन, मेडिकल हेल्थ, फैमिली वेलफेयर, NHM, स्टेट मेडिकल कॉर्पोरेशन, फार्मा प्रमोशन और प्रोक्योरमेंट से जुड़ी संस्थाओं के बीच रियल-टाइम कोऑर्डिनेशन ज़रूरी है। इसी कोऑर्डिनेशन से डुप्लीकेशन खत्म होगी और पब्लिक को एक इंटीग्रेटेड हेल्थ सिस्टम का अनुभव मिलेगा।
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इस समीक्षा बैठक में कई सीनियर अधिकारी काम कर रहे हैं, जिनमें मेडिकल एजुकेशन, मेडिकल हेल्थ, NHM, DGME, DG हेल्थ, स्टेट मेडिकल कॉर्पोरेशन, सांचेज और फार्मा से जुड़े टॉप अधिकारी शामिल थे। सभी अधिकारियों को एक ही मैसेज दिया गया काम का फोकस सिर्फ टारगेट पर नहीं, बल्कि नतीजों पर होना चाहिए। हर स्कीम का इम्पैक्ट लोगों की ज़िंदगी में दिखे, यही असली इवैल्यूएशन होगा। उप-मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हेल्थ सेक्टर में इनोवेशन और अकाउंटेबिलिटी दोनों साथ-साथ चलनी चाहिए। सिर्फ नए आइडिया लाना काफी नहीं, बल्कि उनका टाइम-बाउंड एग्जीक्यूशन और मॉनिटरिंग भी उतनी ही ज़रूरी है। इसलिए हर पैरामीटर के लिए क्लियर टाइमलाइन, ज़िम्मेदारी और रिव्यू मैकेनिज़्म तय किया जाने पर ज़ोर दिया गया। यह अप्रोच हेल्थ गवर्नेंस को और ट्रांसपेरेंट बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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बैठक के दौरान यह बात उभार कर सामने आई कि उत्तर प्रदेश का हेल्थ मॉडल अब सिर्फ़ इलाज तक सीमित नहीं रहेगा, बाल्की प्रिवेंशन, अवेयरनेस और टेक्नोलॉजी के इंटीग्रेशन पर भी बराबर फोकस करेगा। AI-बेस्ड स्क्रीनिंग, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड, इंश्योरेंस-लिंक्ड ट्रीटमेंट और फ़्री मेडिसिन सप्लाई जैसे कदम सीधे आम आदमी को फ़ायदा पहुंचाने वाले हैं।
कुल मिलाकर, यह समीक्षा बैठक सिर्फ़ एक एडमिनिस्ट्रेटिव मीटिंग नहीं बाल्की विकसित भारत के विज़न को हेल्थ सेक्टर के ज़रूरी रियलिटी में बदलने का रोडमैप थी। सरकार का संकल्प स्पष्ट है स्वस्थ उत्तर प्रदेश, सशक्त उत्तर प्रदेश। आने वाले समय में अगर ये 19 पैरामीटर पूरी ईमानदारी और कमिटमेंट के साथ लागू होते हैं, तो निश्चित तौर पर राज्य की हेल्थ सर्विसेज़ देश के लिए एक मॉडल बन सकती हैं। ये मीटिंग इसी बदलते हुए हेल्थ नैरेटिव का एक मज़बूत सिग्नल है, जहाँ पॉलिसी, टेक्नोलॉजी और पब्लिक वेलफेयर एक ही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
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