Ankita Bhandari Nyay Maamla: शासकीय आवास पर हुई इस भावनात्मक भेंट ने एक बार फिर पूरे राज्य को झगड़ा कर रख दिया। दिव्यांग बेटी अंकिता के माता-पिता से जब मुख्यमंत्री ने सामने बैठकर बात की, तो यह सिर्फ एक सरकारी मुलाकात नहीं थी, बाल्की एक पीड़ित परिवार के दर्द को समझाने और उसे न्याय तक पहुंचाने का स्पष्ट संकल्प था। इस भेंट के दौरान परिवार ने जो भी मांगें रखीं, उन पर विधि सम्मत, निष्पक्ष और तुरंत कार्रवाई का भरोसा दिया गया। सरकार ने साफ शब्दों में कहा कि अंकिता को न्याय दिलाना सिर्फ एक ज़िम्मेदारी नहीं, बाल्की उनकी सबसे पहली प्राथमिकता है।
पीड़ित परिवार के साथ सरकार
अंकिता के माता-पिता के चेहरे पर दर्द, गुस्सा और इंसाफ की उम्मीद साफ झलक रही थी। उन्होंने अपनी बेटी के साथ हुए किसी भी मामले को सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बाल्की समाज के लिए एक कठोर सच बताया। सरकार ने इस मौके पर यह स्पष्ट किया कि पीड़ित परिवार अकेला नहीं है। राज्य सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है, चाहे वो कानूनी लड़ाई हो, जांच प्रक्रिया हो या न्यायिक फैसले तक पहुंचने का सफर। मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और जो भी दोषी पाए जाएंगे, उन पर सख्ती से सख्ती होगी। इस बात ने परिवार को थोड़ा सहारा दिया, क्योंकि उनका सबसे बड़ा डर यह था कि कहीं प्रभावशाली लोग कानूनों से बच न जाएं।
निष्पक्ष जांच का आश्वासन
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल हमेशा से रहा है क्या जांच सच में निष्पक्ष होगी? सरकार ने इस पर भी बिना किसी घुमाव के कहा कि जांच पूरी तरह कानूनों के दायरे में, बिना किसी दबाव के की जा रही है। किसी भी अधिकारी या व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वो कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो। यह भी स्पष्ट किया गया कि जांच की हर कड़ी पर नज़र रखी जा रही है और किसी भी तरह की लापरवाही या अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का कहना है कि न्याय सिर्फ होना ही नहीं चाहिए, बाल्की दिखना भी चाहिए।
त्वरित करवाई पर ज़ोर
अंकिता के माता पिता की एक बड़ी मांग यह भी थी कि मामला लंबा न खिंचे। अक्सर देखा गया है कि ऐसे गंभीर मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया सालों तक चलती रहती है, जिससे पीड़ित परिवार और टूट जाता है। इस पर सरकार ने विशेष रूप से ज़ोर दिया कि करवायी त्वरित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर कानूनी प्रक्रिया को पूरा करते हुए भी इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि बिना वजह देरी न हो। सरकार चाहती है कि अंकिता के माता-पिता को जल्दी से जल्दी न्याय मिले, ताकि उनके दिल पर लगे ज़ख्म कुछ हद तक भर सकें।
समाज के लिए संदेश
इस पूरे घटनाक्रम का एक गहरा संदेश भी है। सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बेटियों के खिलाफ अपराध किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अंकिता का मामला सिर्फ एक व्यक्ति या एक परिवार का नहीं, बाल्की पूरे समाज का सवाल है। अगर आज न्याय में कमी रह गई, तो कल किसी और घर की बेटी का भविष्य अंधेरे में जा सकता है। इस मौके पर सभी को भरोसा दिलाया कि महिला सुरक्षा और न्याय के मामले में कोई समझौता नहीं होगा। कानून अपना काम करेगा और दोषों को उनकी सज़ा ज़रूर मिलेगी।
न्याय तक का सफ़र
अंकिता के माता-पिता के लिए यह सफ़र बहुत कठिन है। अपनी बेटी को खो देने का दर्द शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। लेकिन जब सरकार खुद आगे बढ़कर उनके साथ खड़ी होती है, तो उन्हें लगता है कि शायद अँधेरे के बाद रोशनी आएगी। मुख्यमंत्री ने भेंट के अंत में कहा कि यह लड़ाई सिर्फ कानूनी नहीं, बाल्की इंसानी भी है। सरकार का फर्ज है कि हर पीड़ित को न्याय मिले और हर बेटी सुरक्षित महसूस करे। अंकिता के साथ जो हुआ, वो दोबारा न हो इसी संकल्प के साथ सरकार आगे बढ़ रही है।
अंत में एक विश्वास इस मुलाकात के बाद राज्य में एक बार फिर उम्मीद जागी है। लोग देख रहे हैं कि सरकार सिर्फ बयान नहीं, बाल्की करवायी का वादा कर रही है। अंकिता के माता पिता के लिए यह वादा बहुत मायने रखता है, क्योंकि उनका पूरा जीवन अब इसी न्याय की प्रतीक्षा में सिमट गया है। सरकार का कहना है पीड़ित परिवार के साथ हम पूरी ताकत से खड़े हैं। न्याय दिलाना हमारी ज़िम्मेदारी ही नहीं, हमारा संकल्प है। और यह संकल्प तब तक ज़िंदा रहेगा, जब तक अंकिता को पूरा इंसाफ़ नहीं मिल जाता।
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