Kapsaad Kidnapping Murder Case: कपसाड़ कांड अपहरण, हत्या और सियासत का तूफान, मेरठ के सरधना क्षेत्र के गांव कपसाड़ में जो हुआ, उसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। एक युवती के अपहरण की कोशिश के दौरान उसकी मां की बेरहमी से हत्या, फिर एंबुलेंस में तोड़फोड़ और उसके बाद दलित व ठाकुर समुदाय के आमने-सामने आने से हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए। इस पूरे मामले ने कानून-व्यवस्था से लेकर राजनीति तक को गरमा दिया है।
क्या है पूरा मामला
पीड़ित भाई नरसी, पुत्र सत्येंद्र, ने पुलिस को जो जानकारी दी, उसके मुताबिक युवती का कथित रूप से अपहरण किया जा रहा था। इसी दौरान बीच-बचाव करने आई मां पर फरसे से हमला किया गया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोग गुस्से में सड़कों पर उतर आए और हालात इतने बिगड़े कि एंबुलेंस तक में तोड़फोड़ कर दी गई।
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पुलिस का दावा और सवाल
पुलिस ने शुरुआती जांच में इसे युवती और आरोपी के बीच प्रेम प्रसंग से जोड़कर देखा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला निजी संबंधों से जुड़ा हुआ है, लेकिन जिस तरह से हत्या हुई और माहौल बिगड़ा, उसने इस दावे पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि अगर यह सिर्फ प्रेम प्रसंग का मामला था, तो हथियार लेकर अपहरण क्यों किया गया? और मां की जान क्यों ली गई?
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गांव में तनाव, समुदाय आमने-सामने
घटना के बाद कपसाड़ गांव में दलित और ठाकुर समुदाय आमने-सामने आ गए। हालात को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की अफवाह या हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बावजूद इसके, गांव में डर और आक्रोश का माहौल बना हुआ है। लोग कह रहे हैं कि यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक तनाव को हवा देने वाली घटना बन गई है।
पुलिस की कार्रवाई और चुनौतियां
पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पांच टीमें गठित की हैं। अलग-अलग जगहों पर दबिश दी जा रही है, लेकिन अब तक आरोपी हाथ नहीं लगा है। यही बात लोगों के गुस्से को और बढ़ा रही है। सवाल यह है कि जब पुलिस के पास तकनीक, टीमें और संसाधन हैं, तो आरोपी अब तक फरार कैसे है?
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सियासत का एंगल
इस पूरे मामले में राजनीति भी खुलकर सामने आ गई है। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने यूपी की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम लोग सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपराध रोकने में नाकाम साबित हो रही है और ऐसे मामलों में सिर्फ बयानबाजी हो रही है।
पीड़ित परिवार की पीड़ा
पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय चाहिए, न कि राजनीतिक बयान। मां की हत्या ने पूरे परिवार को तोड़ कर रख दिया है। युवती सदमे में है और भाई नरसी का कहना है कि अगर समय रहते पुलिस सख्त कार्रवाई करती, तो शायद उनकी मां आज जिंदा होती। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ कानून-व्यवस्था की नाकामी है या फिर सियासत का अखाड़ा बनता जा रहा है? एक तरफ पुलिस जांच और गिरफ्तारी की बात कर रही है, दूसरी तरफ राजनीतिक दल इसे सरकार के खिलाफ हथियार बना रहे हैं।
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कानून-व्यवस्था या सियासी लड़ाई?
अब सबकी नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर है। क्या आरोपी जल्द गिरफ्तार होगा? क्या पीड़ित परिवार को इंसाफ मिलेगा? और क्या गांव में शांति बहाल हो पाएगी? कपसाड़ की यह घटना सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि उस सिस्टम की तस्वीर है, जहां अपराध के बाद न्याय की रफ्तार और राजनीति की चाल पर सवाल खड़े होते हैं। कपसाड़ कांड ने एक बार फिर दिखा दिया है कि अपराध, समाज और सियासत कैसे आपस में उलझ जाते हैं। जरूरत इस बात की है कि दोषियों को जल्द सजा मिले, पीड़ित परिवार को न्याय मिले और गांव में भरोसे का माहौल लौटे। वरना हर ऐसी घटना सिर्फ आंकड़ों में जुड़ती रहेगी और सवाल वही रहेंगे कानून कहां है और इंसाफ कब मिलेगा?
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