Kapsad Village Meerut Love Affair Case: मेरठ जिले की सरधना तहसील का कपसड़ गांव जो अब तक ठाकुरों की चौबीसी का एक शांत, संयमित और खेती-बाड़ी वाला गांव माना जाता था अचानक दलित बनाम ठाकुर पॉलिटिक्स के भंवर में फंस गया है। अपने खेत-खलिहान, आपसी मेलजोल और सामाजिक संतुलन के लिए जाना जाने वाला यह गांव अब पॉलिटिकल नारों, आरोप-प्रत्यारोप और जातिगत ध्रुवीकरण का अखाड़ा बन गया है। इस पूरी घटना की जड़ एक लव स्टोरी है, लेकिन इसका नतीजा सिर्फ दो नौजवानों तक सीमित नहीं रहा। इसने एक मां की जान ले ली, गांव की शांति छीन ली और पॉलिटिक्स को इस मुद्दे को हाईलाइट करने का मौका दे दिया।
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लव स्टोरी से ट्रेजेडी तक
कहानी गांव के एक नौजवान, जो राजपूत कम्युनिटी का बताया जा रहा है, और एक शेड्यूल्ड कास्ट कम्युनिटी की युवती से शुरू होती है। दोनों के बीच लव अफेयर हुआ, लेकिन यह रिश्ता तब तक छिपा रहा जब तक चीजें कंट्रोल से बाहर नहीं हो गईं। सूत्रों के मुताबिक, दोनों ने एक साथ भागने का फैसला किया। प्लान के तहत, युवती ने युवक को बाइक से गन्ने के खेत के पास बुलाया। मकसद साफ था वहां से भागकर नई ज़िंदगी शुरू करना। लेकिन जैसे ही युवक खेत पर पहुंचा, कहानी ने खतरनाक मोड़ ले लिया।
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कहा जाता है कि लड़की के रिश्तेदार, खासकर उसकी मां, मौके पर पहुंच गईं और विरोध करने लगीं। मां ने बेटी को रोकने की कोशिश की, समझाया, मिन्नतें कीं लेकिन दोनों प्रेमी अपने फैसले पर अड़े रहे। इस धक्का-मुक्की के दौरान लड़की की मां गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
मां की मौत और उबलता गांव
मां की मौत के बाद, मामला सिर्फ लॉ एंड ऑर्डर का नहीं रहा। गांव में टेंशन फैल गया, अफवाहें उड़ने लगीं और जातिगत समीकरणों को हवा मिलने लगी। देखते ही देखते कपसड़ की पहचान बदलने लगी शांति की जगह सस्पेंस और भरोसे की जगह डर ने ले ली। गांव में पुलिस फोर्स बढ़ा दी गई, आने-जाने वालों पर नज़र रखी जाने लगी और माहौल बहुत सेंसिटिव हो गया। लोग अपने घरों में कैद होने लगे, वहीं सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे और कहानियां वायरल होने लगीं।
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पॉलिटिक्स एंट्री, इंसाफ या फायदा?
इस बीच, गांव में नेताओं की एंट्री शुरू हो गई। अतुल प्रधान सबसे पहले पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने इस सेंसिटिव मुद्दे को पॉलिटिकल रंग देने की कोशिश की। लेकिन गांव का गुस्सा इतना भड़क गया कि उन्हें वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा। गांव वालों ने साफ कहा कि यहां पॉलिटिक्स नहीं, इंसाफ चाहिए। इसके बाद योगेश वर्मा भी गांव पहुंचे। उन्होंने भी अपना नैरेटिव बनाने की कोशिश की, लेकिन हालात ऐसे थे कि उनकी कोशिशें भी जमीन पर टिक नहीं पाईं। गांव का मूड साफ था सच में हल निकालना चाहिए, बयानबाजी में नहीं।
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दावे, जवाबी दावे और सच का सवाल
मामले में एक और बड़ा ट्विस्ट तब आया जब कुछ लोगों ने दावा किया कि लड़की अपनी मर्जी से लड़के के साथ जा रही थी। इतना ही नहीं, यह भी कहा जा रहा है कि जब मां ने उसे रोकने की कोशिश की, तो युवती ने कथित तौर पर मां को डंडे से मारा। हालांकि, इन दावों की जांच चल रही है और पुलिस ने अभी तक इसकी ऑफिशियल पुष्टि नहीं की है। फिलहाल, दोनों प्रेमी फरार हैं। पुलिस की कई टीमें उनकी तलाश कर रही हैं। गांव को लगभग छावनी में बदल दिया गया है। एक्स्ट्रा फोर्स तैनात है और हर एक्टिविटी पर कड़ी नज़र रखी जा रही है।
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गांव की चुप्पी और बड़े सवाल
कपसाड़ गांव आज कई सवालों से घिरा हुआ है। क्या यह सिर्फ एक लव अफेयर का दुखद अंत है? या इसे जानबूझकर जाति के झगड़े में बदला जा रहा है? गांव के बड़े-बुजुर्गों का कहना है कि यहां पहले भी प्यार और झगड़े होते रहे हैं, लेकिन पॉलिटिक्स इतनी हावी कभी नहीं हुई। आज हालत यह है कि जांच पीछे जाती दिख रही है और पॉलिटिक्स आगे। सोशल मीडिया से लेकर पॉलिटिकल फोरम तक, हर कोई अपनी-अपनी कहानी बना रहा है। किसी के लिए यह सोशल जस्टिस का मुद्दा है, तो किसी के लिए यह चौबक को बदनाम करने की ठाकुरों की साज़िश है।
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कानून बनाम पॉलिटिक्स कौन जीतेगा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस पूरे मामले में कानून को अपना काम करने दिया जाएगा? या हर कदम पर पॉलिटिक्स दखल देगी? एक मां की मौत, दो नौजवानों का फरार होना और एक गाँव का तनाव किसी भी सभ्य समाज के लिए गंभीर चेतावनी है। कपसाड़ की यह घटना साफ़ संदेश देती है कि जब प्यार, जाति और राजनीति टकराते हैं, तो नुकसान सिर्फ़ एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे समाज का होता है। ज़रूरत है ठंडे दिमाग से निष्पक्ष जांच की, न कि आग में घी डालने वाली बयानबाज़ी की। आज कपसाड़ को न्याय की तलाश है और यही तय करेगा कि उत्तर प्रदेश में कानून जीतेगा या राजनीति।
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