PM Modi on S Jaishankar Birthday: 9 जनवरी का दिन इंडियन डिप्लोमेसी के लिए खास होता जा रहा है। इस दिन नरेंद्र मोदी ने देश के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को उनके जन्मदिन पर सिर्फ बधाई नहीं दी, बल्कि उनके काम, उनकी सोच और उनकी ग्लोबल भूमिका को एक तरह से सलाम भी किया। 10 पर PM मोदी का मैसेज सीधा था, लेकिन उसका मतलब गहरे थे जाने-माने डिप्लोमैट… भारत की विदेश नीति और दुनिया के साथ संबंधों को मजबूत कर रहे हैं। यह सिर्फ एक लाइन नहीं, बाल्की पिछले कई सालों की फॉरेन पॉलिसी का स्नैपशॉट है।
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एक डिप्लोमैट जो सिर्फ बात नहीं, स्टांस रखता है
डॉ. एस. जयशंकर का नाम आज सिर्फ एक मिनिस्टर के तौर पर नहीं, बाल्की एक मजबूत आवाज के तौर पर लिया जाता है। चाहे यूनाइटेड नेशंस हो, G20 का स्टेज हो, या किसी ग्लोबल पावर के साथ बाइलेटरल टॉक जयशंकर का अंदाज सॉफ्ट नहीं, क्लियर होता है। यह वही अप्रोच है जहां इंडिया प्लीज कहने के बजाए पोजीशन बताता है। PM मोदी का उन्हें डिस्टिंक्टेड डिप्लोमैट कहना इसी क्लैरिटी का रिफ्लेक्शन है।
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9 जनवरी 1955, दिल्ली से दुनिया तक का सफर
नई दिल्ली में जन्मे सुब्रह्मण्यम जयशंकर का बैकग्राउंड भी उतना ही सॉलिड रहा जितना उनका करियर। तमिल परिवार से आने वाले जयशंकर के पिता कृष्णस्वामी सुब्रह्मण्यम, स्ट्रेटेजिक अफेयर्स के बड़े नाम रहे। मतलब पॉलिसी और स्ट्रेटेजी उनके घर का कन्वर्सेशन था, सिर्फ सिलेबस का हिस्सा नहीं। शायद इसी वजह से उनकी फॉरेन पॉलिसी अंडरस्टैंडिंग किताब से ज़्यादा ग्राउंड रियलिटी पर टिकी हुई दिखती है।
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एजुकेशन जो सिर्फ डिग्री नहीं, डायरेक्शन बनी
सेंट स्टीफंस कॉलेज, यूनिवर्सिटी ऑफ़ दिल्ली से ग्रेजुएशन, फिर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स, M.Phil. और PhD यह एकेडमिक जर्नी सिर्फ क्वालिफिकेशन नहीं, बाल्की एक माइंडसेट बनाती है। इंटरनेशनल रिलेशंस का स्कॉलर जब डिप्लोमेसी संभालता है, तो डिसीजन सिर्फ रिएक्शन नहीं होते, लॉन्ग-टर्म कैलकुलेशन होते हैं। 1977 में इंडियन फॉरेन सर्विस जॉइन करना उनके लिए करियर चॉइस नहीं, डेस्टिनी जैसा था।
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फॉरेन सेक्रेटरी से ग्लोबल फेस तक
2015 से 2018 तक इंडिया के फॉरेन सेक्रेटरी के तौर पर जयशंकर ने दुनिया को बदलते देखा और इंडिया को उस बदलते ऑर्डर में फिट करने का काम किया। चीन के साथ एम्बेसडर के तौर पर मुश्किल दौर हो या अमेरिका में स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप का दौर उन्होंने दोनों एक्सट्रीम देखे। इसलिए आज जब वो किसी वेस्टर्न जर्नलिस्ट को जवाब देते हैं या किसी एशियन पावर को मैसेज देते हैं, तो वो सिर्फ मिनिस्टर नहीं बोलता, एक वेटरन डिप्लोमैट बोलता है।
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2019 के बाद, पॉलिटिक्स में भी प्रोफेशनलिज्म
2018 में IFS से रिटायर होने के बाद जयशंकर प्राइवेट सेक्टर गए, लेकिन ज्यादा दिन नहीं। PM मोदी ने उन्हें सीधा यूनियन कैबिनेट के लिए इनवाइट किया। 2019 में एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्टर बनाना और फिर गुजरात राज्यसभा पहुंचने से सिर्फ पॉलिटिकल एंट्री नहीं थी, बाल्की एक्सपर्टीज़ का फॉर्मल रिकग्निशन था। भारतीय जनता पार्टी के लिए भी जयशंकर एक ऐसे चेहरे बने जो आइडियोलॉजी के साथ कॉम्पिटेंस को जोड़ता है।
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ग्लोबल इंडिया का नया टोन
जयशंकर के टेन्योर में इंडिया का टोन बदला है। अब इंडिया नॉन-अलाइंड से आगे बढ़कर मल्टी-अलाइंड बोलता है। रूस हो, US हो, यूरोप हो या ग्लोबल साउथ इंडिया अपना इंटरेस्ट खुले तौर पर रखता है। यूक्रेन कॉन्फ्लिक्ट पर उनका स्टेटमेंट हो या इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी पर क्लैरिटी हर जगह मैसेज एक ही है, इंडिया अपनी टर्म्स पर एंगेज करेगा।
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PM मोदी का मैसेज, सिर्फ बर्थडे विश नहीं..
PM मोदी का ये कहना कि जयशंकर की रोल प्ले कर रहे हैं, एक सिग्नल भी है। ये सिग्नल दुनिया को भी और देश के अंदर भी। दुनिया को ये बताने के लिए कि इंडिया की फॉरेन पॉलिसी किसी एक्सपेरिमेंट के हाथ में नहीं, बाल्की एक्सपीरियंस के हाथ में है। और देश के अंदर ये बताने के लिए कि गवर्नेंस में प्रोफेशनलिज्म और परफॉर्मेंस दोनों मैटर करते हैं।
आज का जयशंकर, कल का लेगेसी
आज डॉ. एस. जयशंकर 70 के हो गए, लेकिन उनकी एनर्जी, उनका आर्टिक्यूलेशन और उनकी डिप्लोमैटिक एग्रेशन यंग लीडर्स जैसा लगता है। उनकी लेगेसी सिर्फ ट्रीटीज या स्टेटमेंट्स तक सीमित नहीं रहेगी, बाल्की एक माइंडसेट के तौर पर याद रखी जाएगी जहां इंडिया अपने आप को कमजोर नहीं, कॉन्फिडेंट पावर के रूप में देखता है।
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अंत में एक बात
PM मोदी की बर्थडे विश एक लाइन हो सकती है, लेकिन उसके पीछे पूरी फॉरेन पॉलिसी की कहानी छिपी है। डॉ. एस. जयशंकर आज सिर्फ विदेश मंत्री नहीं हैं, बाल्की ग्लोबल इंडिया के चीफ नैरेटर बन चुके हैं। और जब तक वो इस रोल में हैं, दुनिया को इंडिया का मैसेज बिल्कुल क्लियर रहेगा। इंडिया सुनता है, लेकिन इंडिया तय करता है।
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