Yogi Adityanath Magh Mela Visit: प्रयागराज की पवित्र धरती पर माघ मेला सिर्फ एक मेला नहीं, बल्कि सनातन परंपरा, आस्था और राष्ट्रीय चेतना का जीवंत प्रदर्शन है। उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने माघ मेले की तैयारियों का रिव्यू करते हुए एक बार फिर यह संदेश दिया कि सनातन सिर्फ परंपरा नहीं, भविष्य भी है। 15 फरवरी, 2026 तक चलने वाला माघ मेला, देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुविधा, सुरक्षा और संस्कार तीनों का संगम बनने जा रहा है।
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आस्था को नई उड़ान देती हैं स्नान की तारीखें
CM ने बताया कि 14-15 जनवरी को मकर संक्रांति पर पहला खास स्नान होगा। 23 जनवरी को बसंत पंचमी का स्नान, 28 जनवरी को मौनी अमावस्या का मुख्य स्नान, माघ पूर्णिमा का पवित्र स्नान और अंत में महाशिवरात्रि पर माघ मेले का समापन ये सब तारीखें सिर्फ कैलेंडर की तारीखें नहीं, बाल्की करोड़ों लोगों की आस्था का उत्सव हैं। हर स्नान के साथ प्रयागराज की धरती पर भक्ति, अनुशासन और व्यवस्था का अद्भुत दृश्य उभार कर आता है।
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घाट, गवर्नेंस और ग्राउंड रियलिटी
इस बार घाट की संख्या बढ़ा दी गई है ताकि भीड़ को व्यवस्थित तरीके से संभाला जा सके। योगी सरकार का फोकस क्लियर है ज़ीरो केऑस, मैक्सिमम कन्वीनियंस। सफाई, पीने का पानी, मेडिकल हेल्प, सिक्योरिटी डिप्लॉयमेंट और ट्रैफिक मैनेजमेंट हर पहलू पर नज़र। यहाँ गवर्नेंस सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं, बाल्की ज़मीन पर काम करता हुआ दिख रहा है।
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मेला सेवा ऐप भक्ति के साथ टेक्नोलॉजी
डिजिटल इंडिया की स्पिरिट माघ मेले में भी साफ नज़र आ रही है। मेला सेवा ऐप का लॉन्च श्रद्धालूओं के लिए एक बड़ा सहारा है खोया-पाया, इमरजेंसी कॉन्टैक्ट्स, घाटों की जानकारी, रूट गाइडेंस सब कुछ एक ऐप में। यह बताता है कि परंपरा और टेक्नोलॉजी एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बाल्की साथी हो सकते हैं।
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आने वाला समय सनातन का है संकल्प का स्वरूप
योगी आदित्यनाथ के शब्दों में जो विश्वास है, वो सिर्फ भाषण नहीं, एक संकल्प है आने वाला समय सनातन का ही है। यह कहना किसी को बांटने के लिए नहीं, बाल्की जोड़ने के लिए है। जो लोग पहचान का संकट खड़ा करते हैं, जो मौका मिलते ही अराजक पैदा करते हैं, जो सनातन पर प्रहार करना अपना एजेंडा बनाते हैं उनके खिलाफ समाज को सतर्क रहना होगा। क्योंकि सनातन की ताकत उसकी समावेशी सोच में है।
सेक्युलरिज़्म के नाम पर चुप्पी क्यों?
यहा एक तीखा सवाल भी उठता है जो लोग सेक्युलरिज़्म का ठेका लेकर चलते हैं, जब सनातन या हिंदू समाज पर प्रहार होता है तो उनकी आवाज़ क्यों दब जाती है? बांग्लादेश जैसे घटनाओं पर खामोशी क्यों? क्या सच में मुँह पर फेविकोल लगा होता है या फिर चुनिंदा मुद्दों पर ही सेक्युलरिज़्म याद आता है? यह सवाल समाज को सोचने पर मजबूर करते हैं।
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रामानुजाचार्य जी का स्मारक इतिहास से भविष्य तक
जिस जगह पर श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य जी का प्राकट्य हुआ, वही उनका स्मारक और मंदिर बने सरकार सहयोग करेगी। यह घोषणा सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए इतिहास को संरक्षित करने का संकल्प है। रामानुजाचार्य जी का दर्शन परमार्थ, करुणा और समर्पण आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
महामानव की दृष्टि स्वार्थ नहीं, परमार्थ
ईश्वरीय गुणों से युक्त किसी महामानव की दृष्टि कभी स्वार्थ के लिए नहीं होती। वह परमार्थ के लिए जीता है। रामानुजाचार्य जी ने भी यही किया समाज को जोड़ा, भक्ति को ज्ञान से जोड़ा, और मानवता को धर्म के केंद्र में रखा। योगी आदित्यनाथ के शब्दों में यह भावना आज के युग के लिए मार्गदर्शन है।
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माघ मेला आस्था से राष्ट्रीय चेतना तक
माघ मेला एक आध्यात्मिक कार्यक्रम ज़रूर है, लेकिन यह राष्ट्रीय चेतना का भी प्रतीक है। यहाँ आने वाला हर श्रद्धालु, हर साधु, हर सेवक सब मिलकर एक ही संदेश देते हैं सनातन ज़िंदा है, जाग्रत है, और भविष्य की दिशा तय करता है। व्यवस्था, विश्वास और विकास तीनों का संगम ही आज का माघ मेला है।
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आखिरी बात सनातन का झंडा
आज पूरी दुनिया में सनातन का झंडा अपने आप लहराता हुआ दिख रहा है कभी योग के माध्यम से, कभी ध्यान के माध्यम से, कभी भारत की संस्कृति के माध्यम से। ज़रूरत सिर्फ़ इतनी है कि हम सतर्क रहें, संगत रहें और अपनी परंपरा को गौरव के साथ आगे बढ़ाएं। माघ मेला 2026 सिर्फ़ एक मेला नहीं, यह उस भविष्य की झलक है जो सनातन के मूल्यों पर खड़ा होगा।
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