Kapsad village Paras Ruby case: मेरठ के सरधना तहसील का कपसाड़ गांव पिछले दो दिन से एक ऐसे तूफान की छत में था, जहां हर गली, हर चबूतरा सिर्फ एक ही बात पूछ रहा था पारस और रूबी कहां हैं? गांव की जो पहचान शांति, खेती और अपनी मिट्टी से जुड़ी थी, वही पहचान अचानक सियासत, अफवाहों और टेंशन के बीच दबती चली गई। दो युवा, दो नाम, और पूरा सिस्टम हिला देने वाली कहानी।
दो दिन, जो दो साल जैसे लगे
पिछले दो दिन गांव के लिए दो साल जैसे लगे। पुलिस, प्रशासन, गांव के बुज़ुर्ग, परिवार सब अपनी-अपनी जगह परेशानियां। मेरठ पुलिस को लगातार इनपुट मिल रहे थे, लेकिन कोई पक्का सुराग नहीं। कभी कहां गया शहर की तरफ गए, कभी पड़ोसी ज़िला। अफ़वाहों का बाज़ार गरम था, और सच कहीं पीछे छूट रहा था। मीडिया में बात पहुंची, सोशल मीडिया पर थ्योरीज़ चल पड़ीं, और गांव अचानक नेशनल टॉक बन गया।
READ MORE: युवती के अपहरण के दौरान मां की हत्या, गांव में तनाव और कानून व्यवस्था पर सियासी घमासान
राजनीति का रंग और ज़मीन पर डर
जहां सच को शांत रहकर तलाश जाना चाहिए था, वहां राजनीति का रंग चढ़ने लगा। गांव का माहौल भड़केगा, नाराज़गी बढ़ेगी, और हर किसी ने अपनी-अपनी व्याख्या देनी शुरू कर दी। इस बीच जो सबसे ज़्यादा पीड़ित हुआ, वो थी गांव की शांति। पुलिस पर प्रेशर बढ़ा, प्रशासन पर सवाल, और परिवारों पर बोझ। सब कुछ एक ही पल में बदल गया।
READ MORE: अंकिता हत्याकांड पर वायरल वीडियो से सियासी उबाल, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने जताई साजिश की आशंका
आज की अपडेट कुशलता बरमदगी
सहारनपुर से मेरठ पुलिस ने पारस और रूबी को कुशल पकड़कर लाया। खबर ने एक पल के लिए सांस ली कम से कम दोनों सुरक्षित हैं। पर जैसे ही उनके चेहरे सामने आए, गांव के सवाल और गहरे हो गए। चेहरों पर न खौफ, न घबराहट, न पचतावा बस एक बेपरवाह सी शांति। और यहीं से कहानी का सबसे मुश्किल पहलू शुरू होता है।
READ MORE: उम्रकैद के बाद भी हंसी, कट्टरपंथी सोच और न्याय व्यवस्था पर बड़ा सवाल
एक मां, जो बचाते-बचाते मर गई
इस पूरे मामले का सबसे दर्दनाक सच बेटी को बचाने के चक्कर में एक निर्दोष मां की जान चली गई। यह लफ्ज लिखना आसान है, पर इसके पीछे का दर्द गाँव के हर घर ने महसूस किया। एक मां, जो अपनी ज़िम्मेदारी निभा रही थी; एक परिवार, जो टूट गया और एक गांव, जो अब भी जवाब ढूंढ रहा है। यह सिर्फ मिसिंग केस नहीं रहा यह एक इंसानी ट्रेजेडी बन चुका है।
READ MORE: मेरठ कपसाड पहुंचते ही संगीत सोम ने दिया कड़क बयान, गर्मा गई सियासत
चेहरे जो सवाल बन गए
पारस और रूबी के चेहरे यह सिर्फ तस्वीरें नहीं, यह सवाल हैं। क्या ऐसी घड़ी में कोई इतना निश्चिंत हो सकता है? क्या जो हुआ, उसका बोझ किसी पर मेहसूस भी होता है? गांव के लोग यही पूछ रहे हैं। कोई इल्ज़ाम नहीं, पर सवाल ज़रूर ज़िम्मेदारी कहां है? समाज का तराजू इसी जगह लड़खड़ाता है।
कानून, सच और समाज की कसौटी
कानून अपना काम करेगा। पुलिस जांच करेगी, बयान लिए जाएंगे, और सच को रेखा के अंदर लाया जाएगा। पर कानून के साथ साथ समाज को भी अपना हिस्सा निभाना होगा। अफवाह बंद हो, राजनीति दूर रहे, और सच को बोलने दिया जाएं ये तीन बातें ही इस आग को ठंडा कर सकती हैं।
READ MORE: युवती के अपहरण के दौरान मां की हत्या, गांव में तनाव और कानून व्यवस्था पर सियासी घमासान
गांव को वापस शांति चाहिए
कपड़े को किसी लेबल की जरूरत नहीं राजनीति का, ना अफवाहों का। गांव को सिर्फ अपनी शांति वापस चाहिए। जो हुआ, उसे भुलाया नहीं जा सकता, पर सीख ज़रूर ले सकती है हर फ़ैसला सिर्फ़ दो लोगों को नहीं, पूरे परिवार और पूरे गांव को प्रभावित करता है। अंत में एक सीधा सवाल आज जब पारस और रूबी कुशल हैं, तो खुशी के साथ दर्द भी है। एक मां वापस नहीं आएगी। गांव का भरोसा आसानी से नहीं जुड़ेगा। और समाज के सामने एक सीधा सवाल खड़ा है क्या हम ज़िम्मेदारी को चेहरों पर पहचान पाते हैं, या सिर्फ़ ख़बरों में? सच यही है: चेहरे शांत हो सकते हैं, पर सच कभी चुप नहीं रहता।
Follow Us: YouTube| TV TODAY BHARAT LIVE | Breaking Hindi News Live | Website: Tv Today Bharat| X | FaceBook | Quora| Linkedin | tumblr | whatsapp Channel | Telegram
