Somnath Swabhiman Parv: रविवार को प्रभास पाटन की पवित्र धरती पर जो दृश्य दिखा, वो सिर्फ एक काम नहीं कर रहा था, भारत के स्वाभिमान और अटूट आस्था का प्रतीक था। नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर के शिखर पर लहराते ध्वज को भारत की शक्ति और सामर्थ्य का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह पूरी दुनिया को संदेश देता है कि भारत को तोड़ने की कितनी भी कोशिश हो, यह देश कभी झुकने वाला नहीं है। उनके शब्दों में, सोमनाथ स्वाभिमान पर्व सिर्फ विनाश की याद नहीं, बाल्की हज़ार साल की जीवन यात्रा का उत्सव है।
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आस्था और अनुभव
सद्भावना मैदान में भरी जनसभा को संबोधि करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ का अवतार अपने आप में अद्भुत और दिव्य है। एक तरफ महादेव की पवित्र उपस्थति, दूसरी तरफ समुंदर की लहरों का गुणगान, सूरज की किरणें, वैदिक मंत्रों की गूंज और भक्तों की भरी उपस्थति यह सब मिलकर इस पर्व को अलौकिक बना देते हैं। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर के प्रेसिडेंट के रूप में इस महा उत्सव का हिस्सा बनना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
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भक्ति और शौर्य का संगम
इस मौके पर 72 घंटे तक लगातार ‘ओंकार’ का जाप, 1000 ड्रोन का अद्भुत प्रदर्शन, वैदिक गुरुकुल के 1000 छात्रों की सहभागिता और सोमनाथ मंदिर के 1000 साल के इतिहास का दृश्य रूपांतरण लोगों को भाव-विभोर कर गया। आज की ‘शौर्य यात्रा’, 108 घोड़ों के साथ निकली गई, ने इस बात को प्रमाणित कर दिया कि सोमनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं बल्कि वीरता, साहस और राष्ट्रीय चेतना का केंद्र है। प्रधानमंत्री ने याद डाला कि हज़ार साल पहले आक्रोशों ने सोचा था कि वे भारत को जीत चुके हैं। लेकिन आज सोमनाथ मंदिर के ऊपर लहराता झंडा इस बात का गवाह है कि न सोमनाथ टूटा और न ही भारत। सोमनाथ मंदिर की यात्रा 1000 साल के संघर्ष, पुनर्निर्माण और स्वाभिमान की कहानी है, जिसमें 1951 में हुए पुनर्निर्माण के 75 साल भी शामिल हैं।
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प्रभास पाटन का महत्व
PM मोदी ने कहा कि प्रभास पाटन सिर्फ भगवान शिव की भूमि नहीं, बल्कि भगवान कृष्ण से भी गहरा संबंध रखती है। महाभारत काल में पांडवों की तपस्या से जुड़ी यह भूमि भारत की विरासत के अनेक आयाम देखती है। यही कारण है कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारत की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक बन चुका है।
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राष्ट्रीय स्वाभिमान का संदेश
प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस तरह बार-बार सोमनाथ को तोड़ने की कोशिश हुई, उसी तरह भारत को भी कमज़ोर करने की कोशिश हुई। लेकिन न सोमनाथ झुका और न भारत। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व हमें याद दिलाता है कि यह उत्सव सिर्फ बीते हुए विनाश को याद करने के लिए नहीं, बल्कि भारत के अस्तित्व, गौरव और आत्मगौरव का जश्न मनाने के लिए है।
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अंतिम भाव
वैदिक मंत्रों के बीच अभिषेक और आरती करते हुए पीएम मोदी ने भगवान शिव के चरणों में शीश झुकाया और सोमनाथ के रक्षकों को नमन किया। उनका संदेश स्पष्ट था सोमनाथ और भारत, दोनों अमर हैं। यह पर्व सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को यह बताने का घोषणा-पत्र है कि भारत की आत्मा, उसका स्वाभिमान और उसकी संस्कृति कभी मिटने वाली नहीं है।
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