UP Health Department Action: उत्तर प्रदेश में एक बार फिर यह साफ हो गया है कि अब सरकारी सिस्टम में लापरवाही की कोई जगह नहीं है। योगी सरकार की Zero Tolerance Policy जमीन पर उतरती दिख रही है। स्वास्थ्य विभाग में हुई ताजा कार्रवाई ने पूरे महकमे में हलचल मचा दी है। डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक के निर्देश पर ड्यूटी से गायब और अनुशासनहीन पाए गए 17 चिकित्साधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है। यह फैसला सिर्फ सजा नहीं, बल्कि एक सख्त संदेश है मरीजों की सेवा में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं होगी।
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Zero Tolerance का सीधा असर
योगी सरकार की नीति साफ है काम नहीं तो कुर्सी नहीं। लगातार शिकायतें, निरीक्षण रिपोर्ट और विभागीय जांच के बाद यह कार्रवाई की गई है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भीड़, सीमित संसाधन और डॉक्टरों की गैरहाजिरी इन सबने सरकार को कड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर किया। अब सिस्टम ने साफ कर दिया है कि सरकारी सेवा को हल्के में लेने वालों पर सीधा एक्शन होगा।
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ड्यूटी से नदारद डॉक्टरों पर सबसे बड़ी मार
जांच में सामने आया कि कई चिकित्साधिकारी लंबे समय से ड्यूटी पर नहीं आ रहे थे। न तो अनुमति, न जवाबदेही बस गैरहाजिरी। ऐसे 17 डॉक्टरों को सीधे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के बीच गैरहाजिरी मरीजों की जान पर भारी पड़ सकती है।
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मरीजों से बदसलूकी भी अब भारी पड़ेगी
सिर्फ अनुपस्थिति ही नहीं, मरीजों से अभद्रता को भी सरकार ने गंभीर अपराध माना है। ऐसे मामलों में 4 चिकित्साधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सरकारी अस्पताल में आने वाला हर मरीज सम्मान और बेहतर इलाज का हकदार है यह बात अब फाइलों से निकलकर कार्रवाई में दिख रही है। तबादला होने के बाद भी नई तैनाती पर कार्यभार न संभालना अब महंगा पड़ेगा। डॉ. गजेंद्र सिंह के खिलाफ इसी वजह से विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का साफ कहना है आदेश का पालन नहीं, तो सेवा में जगह नहीं।
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स्पष्टीकरण, चेतावनी और सख्त निगरानी
लापरवाही के मामलों में कई डॉक्टरों से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। खासतौर पर बीकेटी ट्रॉमा सेंटर के 4 चिकित्साधिकारियों से जवाब मांगा गया है। वहीं, काम में ढिलाई बरतने वाले 3 डॉक्टरों को चेतावनी जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। यह साफ संकेत है कि अब हर स्तर पर निगरानी बढ़ेगी।
वेतन वृद्धि रोकी, पेंशन तक में कटौती
सरकार ने यह भी दिखा दिया कि कार्रवाई सिर्फ नौकरी जाने तक सीमित नहीं है। 5 चिकित्साधिकारियों पर लापरवाही और आदेशों की अवहेलना के चलते वेतन वृद्धि रोकी गई और परिनिंदा दंड दिया गया। दवा खरीद से जुड़े मामलों में दोषी पाए गए 2 चिकित्साधिकारियों की पेंशन में 10% कटौती के निर्देश दिए गए हैं। मतलब साफ है गलती की कीमत आर्थिक तौर पर भी चुकानी पड़ेगी।
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योगी सरकार का क्लियर मैसेज
इस पूरे एक्शन से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का स्टैंड बिल्कुल स्पष्ट है। स्वास्थ्य सेवाएं राजनीति नहीं, जिम्मेदारी हैं। मरीजों की जान से खिलवाड़ करने, ड्यूटी से भागने और सिस्टम को हल्के में लेने वालों पर कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
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ग्राउंड पर क्या बदलेगा?
इस कार्रवाई के बाद उम्मीद है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपस्थिति बढ़ेगी, मरीजों के साथ व्यवहार सुधरेगा और सिस्टम में जवाबदेही आएगी। जो लोग ईमानदारी से काम कर रहे हैं, उनके लिए यह राहत की खबर है और जो लापरवाही कर रहे थे, उनके लिए आखिरी चेतावनी। यूपी के स्वास्थ्य विभाग में हुआ यह एक्शन सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सिस्टम सुधार की दिशा में बड़ा कदम है। सरकार ने साफ कर दिया है सेवा, अनुशासन और जिम्मेदारी इन तीनों से समझौता नहीं होगा। आने वाले दिनों में ऐसे और फैसले देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि अब संदेश एक ही है, मरीज पहले, लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस।
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