Swami Vivekananda India Self Awareness: लखनऊ से आई योगी आदित्यनाथ की इस तस्वीर ने सिर्फ एक भाषण नहीं, बाल्की ने एक सोई हुई राष्ट्रीय चेतना को जगाने का संदेश दिया। योगी आदित्यनाथ ने ‘राष्ट्रीय युवा शक्ति दिवस’ के मौके पर कहा कि भारत की आत्म-चेतना एक समय पर इतनी सुप्त हो चुकी थी कि देश अपनी ही पहचान भूल बैठा था। यह सिर्फ इतिहास का वर्णन नहीं था, बाल्की आज के युवाओं के लिए एक चुनौती और ज़िम्मेदारी दोनों थी।
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सोई हुई आत्मा का सच
CM ने कहा कि जब कोई देश अपनी सेल्फ अवेयरनेस खो देता है, तब उस पर गुलामी सिर्फ तलवार से नहीं, बाल्की मानसिक कमजोरी से थोपी जाती है। भारत के साथ भी यही हुआ। “सिर्फ कुछ विदेशी आक्रमण करने वाले आए और इस महान सभ्यता को झुकाने की कोशिश की, यह कहना एक कड़वा सच था। उस दौर में भारत की सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं का अपमान हुआ, और देश लूट का शिकार बना। यह बात आज के युवाओं को समझानी होगी, क्योंकि इतिहास भूलने वाले ही इतिहास दोहराते हैं।
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विवेकानंद: जिन्होंने चिंगारी जलाई
इसी अंधेरे दौर में स्वामी विवेकानंद एक रोशनी बनकर उभरे। उन्हें भारत को याद दिलाया कि तुम कौन हो। उन्होंने कहा था कि भारत सिर्फ भूमि का टुकड़ा नहीं, बाल्की मानवता के कल्याण का मार्ग दिखाने वाली परंपरा का प्रतिनिधि है। योगी आदित्यनाथ ने विवेकानंद के शब्दों को दोहराते हुए कहा, ‘मैं उस परंपरा का प्रतिनिधि करता हूं जो सदा मानवता के कल्याण का रास्ता दिखाती है।” यह कहना सिर्फ गर्व का प्रदर्शन नहीं, बाल्की एक वैचारिक स्टैंड था।
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‘मैं गर्व से हिंदू हूं’ का मतलब
CM का ये कहना, मुझे गर्व है कि मैं हिंदू हूं, एक पॉलिटिकल स्टेटमेंट से ज़्यादा एक कल्चरल दावा था। हिंदू होने का मतलब किसी और के खिलाफ होना नहीं, बाल्की उस परंपरा का हिस्सा होना है जिसमें वसुधैव कुटुंबकम का संदेश दिया गया। योगी ने युवाओं को समझाया कि अपनी पहचान पर गर्व करना कमज़ोरी नहीं, बाल्की मज़बूत है। जब पहचान मज़बूत होती है, तब देश भी मज़बूत होता है।
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लखनऊ से देश तक का संदेश
ये भाषण सिर्फ़ लखनऊ के हाल तक सीमित नहीं था। यह संदेश पूरे देश के युवाओं के लिए था, खास उत्तर प्रदेश के उन युवाओं के लिए जो बदलते भारत का चेहरा बनने वाले हैं। योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से कहा कि विवेकानंद का संदेश किताबों तक सीमित न रखें, बाल्की उसे अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएं।
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युवा शक्ति और राष्ट्रीय नवनिर्माण
आज का युवा अगर अपनी संस्कृति से जुड़ता है, अपनी जड़ों को पहचानता है, तो कोई भी शक्ति उसे गुलाम नहीं बना सकती। CM का कहना था कि राष्ट्रीय युवा शक्ति दिवस का असली मतलब सिर्फ जन्म जयंती मनाना नहीं, बाल्की विवेकानंद के विचारों को मैदान पर उतारना है। जब युवा सेल्फ-कॉन्फिडेंस के साथ आगे बढ़ेगा, तब भारत की खोई हुई सेल्फ-अवेयरनेस पूरी तरह जागेगी।
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आज का सवाल, कल का जवाब
इस पूरे संदेश का सार एक ही है क्या हम अपनी पहचान को समझ रहे हैं? क्या हम अपनी सभ्यता पर गर्व करते हैं? योगी आदित्यनाथ का भाषण एक आईना था जिसमें देश को खुद को देखना था। स्वामी विवेकानंद ने जो चिंगारी जलाई थी, उसे आज के युवाओं को मशाल बनाना है। अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि लखनऊ का यह मंच एक बार फिर भारत की आत्मा को याद दिलाने का काम कर गया। जब सेल्फ-अवेयरनेस जागती है, तब कोई भी आक्रमण, कोई भी चुनौती देश को झुका नहीं सकती। यही विवेकानंद का संदेश था, और यही योगी आदित्यनाथ का आज का संकल्प।
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