Tej Pratap Yadav Dahi Chura Feast: बिहार की राजनीति में त्योहार केवल धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन नहीं होते, बल्कि वे कई बार राजनीतिक संकेत और पारिवारिक समीकरणों का मंच भी बन जाते हैं। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर तेज प्रताप यादव द्वारा आयोजित दही-चूड़ा भोज ने भी कुछ ऐसा ही संदेश दिया। इस खास अवसर पर उन्होंने अपने पिता लालू प्रासाद यादव, माता राबड़ी देवी और छोटे भाई तेजस्वी यादव को आमंत्रित कर एक ऐसा दृश्य रचा, जिसने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी।

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दही चूड़ा परंपरा से राजनीति तक
बिहार और पूर्वांचल की संस्कृति में दही-चूड़ा केवल भोजन नहीं, बल्कि समृद्धि, सौहार्द और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा खाने की परंपरा सदियों पुरानी है। जब यही परंपरा राजनीतिक परिवार के भीतर निभाई जाती है, तो उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। तेज प्रताप यादव का यह आयोजन उसी सांस्कृतिक परंपरा को राजनीति से जोड़ता हुआ दिखा।
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तेज प्रताप का न्योता और उसका संदेश
तेज प्रताप यादव ने अपने आधिकारिक और अनौपचारिक बयानों में हमेशा यह संकेत दिया है कि वे परिवार और परंपरा को सर्वोपरि मानते हैं। दही-चूड़ा भोज के लिए लालू, राबड़ी और तेजस्वी को आमंत्रित करना सिर्फ एक पारिवारिक औपचारिकता नहीं था, बल्कि यह संदेश भी था कि परिवार एकजुट है। बीते समय में पार्टी और परिवार के भीतर सामने आए मतभेदों की चर्चाओं के बीच यह आयोजन खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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लालू राबड़ी की मौजूदगी से बढ़ा सियासी ताप
लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की उपस्थिति ने इस भोज को और खास बना दिया। लालू यादव, जिन्हें बिहार की राजनीति का धुरी माना जाता है, जब किसी आयोजन में शामिल होते हैं, तो उसका राजनीतिक अर्थ निकाला जाना स्वाभाविक है। राबड़ी देवी की मौजूदगी ने इस आयोजन को पारिवारिक गर्मजोशी का रंग दिया। दोनों की उपस्थिति से यह संकेत भी गया कि परिवार के भीतर संवाद और सामंजस्य बना हुआ है।
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तेजस्वी यादव और भविष्य की राजनीति
तेजस्वी यादव इस समय बिहार की राजनीति में एक मजबूत चेहरे के तौर पर उभरे हैं। दही-चूड़ा भोज में उनकी भागीदारी को कई विश्लेषक आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं। तेजस्वी का इस आयोजन में शामिल होना यह दर्शाता है कि वे पारिवारिक परंपराओं के साथ-साथ राजनीतिक संतुलन को भी साधे हुए हैं। यह दृश्य राजद समर्थकों के लिए सकारात्मक संदेश लेकर आया।
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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ भोज
तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। समर्थकों ने इसे पारिवारिक एकता का प्रतीक बताया, वहीं विपक्ष ने इसमें सियासी संदेश तलाशे। फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम पर #DahiChura, #TejPratapYadav और #LaluParivar जैसे कीवर्ड ट्रेंड करते नजर आए। यह साफ है कि यह आयोजन केवल घर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि डिजिटल राजनीति का हिस्सा बन गया।
राजद कार्यकर्ताओं में उत्साह
इस आयोजन से राजद कार्यकर्ताओं में भी खासा उत्साह देखने को मिला। पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं ने इसे शुभ संकेत माना और कहा कि एकजुट परिवार ही मजबूत संगठन की नींव होता है। दही-चूड़ा भोज ने कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाया और यह संदेश दिया कि पार्टी नेतृत्व आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर साथ खड़ा है।
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विपक्ष की नजर और सियासी कयास
विपक्षी दलों ने भी इस आयोजन पर नजर बनाए रखी। कुछ नेताओं ने इसे सॉफ्ट पॉलिटिक्स बताया, तो कुछ ने कहा कि यह आगामी चुनावों से पहले माहौल बनाने की कोशिश है। हालांकि, आम जनता के बीच इस आयोजन को लेकर जो प्रतिक्रिया सामने आई, वह अधिकतर सकारात्मक रही। लोगों ने इसे परंपरा और परिवार का सम्मान बताया।
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परंपरा, परिवार और भविष्य
तेज प्रताप यादव का दही चूड़ा भोज एक साधारण आयोजन नहीं था। यह परंपरा, परिवार और भविष्य की राजनीति तीनों का संगम बनकर सामने आया। बिहार की राजनीति में जहां हर कदम का राजनीतिक अर्थ निकाला जाता है, वहां इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। यह भोज आने वाले समय में राजद की राजनीति और पारिवारिक समीकरणों पर क्या असर डालेगा, यह देखना दिलचस्प होगा। दही-चूड़ा भोज ने यह साफ कर दिया कि बिहार की राजनीति में संस्कृति और राजनीति एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। तेज प्रताप यादव द्वारा लालू, राबड़ी और तेजस्वी को दिया गया न्योता न केवल पारिवारिक सौहार्द का प्रतीक था, बल्कि एक सकारात्मक राजनीतिक संदेश भी। आने वाले दिनों में इस आयोजन की गूंज सियासी चर्चाओं में बनी रह सकती है, और यही इसकी सबसे बड़ी सफलता मानी जाएगी।
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