Assam development under PM Modi: भारत के पूर्वी राज्य असम को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर विकास और तालमेल का संदेश दिया है। शनिवार को प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लेख साझा किया, जिसमें पिछले 11 वर्षों में असम में आए व्यापक निकायों को निर्देशांक किया गया। यह लेख शांति, संस्कृति और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में हुए मतदाताओं पर केंद्रित था। प्रधानमंत्री ने यह लेख पवित्रा मार्गेरिटा के एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए साझा किया। इसके साथ ही PMO इंडिया के आधिकारिक हैंडल से भी यह स्पष्ट किया गया कि असम पिछले एक दशक में एक स्थिर, सुरक्षित और तेजी से बढ़ते राज्य के रूप में एकजुट है।
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11 साल पहले का असम और आज का असम
करीब एक दशक पहले तक असम को अक्सर उग्रवाद, बंद, हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता से जूझते देखा जाता था। निवेशक हिचकते थे, युवाओं के सामने सीमित अवसर थे और विकास की दर धीमी मानी जाती थी। लेकिन पिछले 11 दशकों में तस्वीर पूरी तरह बदली है। आज असम को शांति, समन्वय और अवसरों का राज्य कहा जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से न सिर्फ कानून-व्यवस्था सुधारी, बल्कि विकास योजनाओं का लाभ ज़मीन तक पहुंचा।
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शांति और स्थिरता: विकास की नींव
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए लेख में सबसे अहम बिंदु शांति की बहाली को बताया गया है। उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में संवाद, पुनर्वास और सख़्त सुरक्षा नीति के ज़रिए हिंसा में ऐतिहासिक गिरावट आई है। हजारों युवाओं ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा को अपनाया। इससे न केवल सामाजिक माहौल बदला, बल्कि उद्योग और निवेश के लिए भी अनुकूल माहौल बना। आज असम में लंबे समय बाद स्थिरता को स्थायी पहचान मिलती दिख रही है।
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संस्कृति और पहचान का पुनर्जागरण
असम की संस्कृति हमेशा से समृद्ध रही है, लेकिन बीते दशकों में इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। बिहू, सत्रिया नृत्य, असमिया भाषा और जनजातीय परंपराओं को प्रोत्साहन मिला। सरकार की पहल से स्थानीय कला, हथकरघा और हस्तशिल्प को नए बाज़ार मिले। इससे न केवल सांस्कृतिक गौरव बढ़ा, बल्कि लाखों कारीगरों और कलाकारों की आय में भी सुधार हुआ।
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इंफ्रास्ट्रक्चर में आया बड़ा बदलाव
पिछले 11 सालों में असम का इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह बदलता नज़र आया है। नए हाईवे, पुल, रेलवे लाइन और एयर कनेक्टिविटी ने राज्य को देश के बाकी हिस्सों से मजबूती से जोड़ा है। ब्रह्मपुत्र पर बने पुलों ने यात्रा को आसान बनाया, वहीं शहरों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी सड़क नेटवर्क मजबूत हुआ। यह इंफ्रास्ट्रक्चर बूम ही असम की आर्थिक गति का सबसे बड़ा आधार बना।
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पर्यावरण के साथ विकास का संतुलन
लेख में जिस बात पर विशेष ज़ोर दिया गया, वह है विकास पारिस्थितिकी के साथ। असम जैसे जैव-विविधता से भरपूर राज्य में विकास को पर्यावरण से टकराव नहीं, बल्कि संतुलन के साथ आगे बढ़ा गया। राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव संरक्षण और नदी प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया। हरित ऊर्जा, स्वच्छ परिवहन और सतत परियोजनाओं को प्राथमिकता मिली, जिससे विकास के साथ-साथ प्रकृति भी सुरक्षित रही।
आर्थिक विकास और निवेश का नया दौर
शांति और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का सीधा असर असम की अर्थव्यवस्था पर पड़ा। चाय उद्योग, तेल-गैस सेक्टर, एग्रीकल्चर और पर्यटन में नई परियोजनाएं बनीं। प्रदूषण, एमएसएमई और स्थानीय उद्यम को सरकारी योजनाओं से समर्थन मिला। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हुए और युवाओं को अपने ही राज्य में भविष्य दिखने लगा।
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विकसित असम से विकसित भारत @2047
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए लेख में असम को विकसित भारत @2047 के विजन से जोड़ा गया है। इसमें साफ कहा गया है कि असम का विकास केवल राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे पूर्वोत्तर और देश की प्रगति का इंजन बन रहा है। विकसित असम का मतलब है शांत समाज, मजबूत अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक गौरव और पर्यावरण-संतुलित विकास। यही मॉडल आने वाले दशकों में भारत की विकास कहानी को नई दिशा देगा।
राजनीति से परे विकास का संदेश
यह लेख और प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक लंबी रणनीति का संकेत है। इसमें यह दिखाया गया है कि कैसे नीति, नियत और निरंतर प्रयास से किसी भी क्षेत्र की तस्वीर बदली जा सकती है। असम आज उस बदलाव का उदाहरण है, जहाँ संघर्ष की जगह स्थिरता, और पिछड़ेपन की जगह प्रगति ने ले ली है।
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नया असम, नया आत्मविश्वास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साझा किया गया यह लेख असम की बीते 11 वर्षों की यात्रा का सार है। यह यात्रा शांति से शुरू होकर विकास, संस्कृति और विधायी संतुलन तक पहुंची है। आज असम सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि न्यू इंडिया की सौंपी कहानी का मजबूत अध्याय बन चुका है जो विकसित भारत @2047 की ओर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।
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