भारत में कौशल विकास और रोजगार क्षमता को नई दिशा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने PM-SETU (प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड ITIs) पहल की शुरुआत की है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत देशभर के 1,000 सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को आधुनिक बनाया जाएगा। यह पहल हब-एंड-स्पोक मॉडल पर आधारित होगी, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता के साथ-साथ उसकी पहुंच भी व्यापक बनेगी। यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 19 जनवरी 2026 को विकसित भारत के विजन के अनुरूप घोषित की गई थी। इसका उद्देश्य एक ऐसा भविष्य-तैयार और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल तैयार करना है, जो उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित हो।
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हब एंड स्पोक मॉडल क्या है?
PM-SETU के तहत कुल 1,000 ITI को दो श्रेणियों में विकसित किया जाएगा,
- 200 हब ITI
इन संस्थानों में एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक मशीनरी, स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लैब्स और उच्च गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। - 800 स्पोक ITI
ये संस्थान हब ITI से जुड़कर जिलों और दूरदराज के क्षेत्रों तक प्रशिक्षण की पहुंच बढ़ाएंगे, जिससे स्थानीय युवाओं को भी आधुनिक स्किल ट्रेनिंग मिल सके।
इस मॉडल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अत्याधुनिक प्रशिक्षण केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि देश के हर हिस्से तक पहुंचे।
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उद्योग-प्रेरित और मांग-आधारित प्रशिक्षण
PM-SETU की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें ITI को सरकारी स्वामित्व में रहते हुए उद्योग-प्रबंधित संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे,
- प्रशिक्षण डिमांड-ड्रिवन होगा
- अप्रेंटिसशिप के अवसर बढ़ेंगे
- प्लेसमेंट लिंकज मजबूत होंगे
- उद्योगों और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच निरंतर सहयोग बनेगा
यह मॉडल पारंपरिक, सीमित सहभागिता से आगे बढ़कर उद्योगों को गवर्नेंस और निर्णय-निर्माण में सक्रिय भागीदारी का अवसर देता है।
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पुणे में उद्योग परामर्श बैठक
PM-SETU के रोलआउट के तहत कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (Ministry of Skill Development and Entrepreneurship) और महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से पुणे में एक बड़ी उद्योग परामर्श बैठक आयोजित की जा रही है।
इस बैठक का उद्देश्य,
- उद्योगों को योजना से जोड़ना
- उद्योग-नेतृत्व वाले क्रियान्वयन ढांचे के प्रति जागरूकता बढ़ाना
- राज्य में व्यावसायिक प्रशिक्षण को नई दिशा देना
50 से अधिक कंपनियों की भागीदारी
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मंत्रालय के अनुसार, इस परामर्श में 50 से अधिक पात्र कंपनियां हिस्सा लेंगी। ये कंपनियां निम्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करेंगी—
- निर्माण (Construction)
- वस्त्र (Textiles)
- ऑटोमोबाइल
- FMCG
- इलेक्ट्रॉनिक्स
- तेल और गैस
- नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy)
इस व्यापक उद्योग भागीदारी से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रशिक्षण पाठ्यक्रम वास्तविक श्रम बाजार की जरूरतों के अनुरूप हों।
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केवल सहयोग नहीं, साझेदारी
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, PM-SETU के तहत उद्योगों को केवल सलाहकार की भूमिका में नहीं रखा गया है, बल्कि उन्हें,
- संस्थागत गवर्नेंस में भागीदारी
- करिकुलम और पेडागॉजी में सुधार
- फैकल्टी अप-स्किलिंग
- अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट पाइपलाइन को मजबूत करने
जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में सीधी भूमिका दी जाएगी। यह एक संरचित प्लेटफॉर्म है, जो उद्योगों को स्किलिंग इकोसिस्टम में दीर्घकालिक योगदान का अवसर देता है।
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MoU के जरिए औपचारिक साझेदारी
उद्योग परामर्श के दौरान कई समझौता ज्ञापन (MoU) का आदान प्रदान भी किया जाएगा। ये MoU महाराष्ट्र के डायरेक्टरेट ऑफ वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (DVET) और विभिन्न उद्योग व सामाजिक संगठनों के बीच होंगे।
प्रमुख साझेदारियों में शामिल हैं,
- DVET और FIAT India
- DVET और Schneider Electric India
- DVET और Anudip Foundation
- DVET और Wadhwani Foundation (SDN/Wadhwani)
इन साझेदारियों का उद्देश्य राज्य में व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगार परिणामों को मजबूत करना है।
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क्लस्टर मॉडल से क्या होगा फायदा?
PM-SETU के क्लस्टर-आधारित मॉडल के तहत,
- उद्योग सीधे संस्थानों के संचालन में योगदान दे सकेंगे
- ट्रेनिंग को रीयल-टाइम लेबर मार्केट से जोड़ा जाएगा
- शिक्षकों को नई तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाएगा
- छात्रों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
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इससे ITI केवल प्रशिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि रोजगार उन्मुख स्किल हब के रूप में विकसित होंगे। PM सेतु पहल भारत के कौशल विकास नजरिये में एक संरचनात्मक बदलाव का संकेत देता है। यह योजना सरकार, उद्योग और प्रशिक्षण विद्यालयों के बीच मजबूत साझेदारी निर्मित युवाओं को रोजगार-योग्य कौशल प्रदान करने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी। यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में भारत को एक कुशल, आत्मनिर्भर और वैश्विक कार्यभार के रूप में स्थापित करने में पीएम-सेतु एक प्रभावशाली कदम साबित हो सकता है।
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