Ram Mandir Second Anniversary Celebration: अयोध्या में भगवान श्रीराम की 500 वर्षों बाद हुई प्राण प्रतिष्ठा और भव्य राम मंदिर निर्माण की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर लखीमपुर खीरी जनपद के संपूर्णानगर क्षेत्र में धार्मिक उल्लास का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। पूरे इलाके में राम नाम का जयघोष गूंजता रहा और श्रद्धालुओं ने इसे सनातन संस्कृति के लिए ऐतिहासिक व गौरवपूर्ण क्षण बताया। उत्सव के केंद्र में प्रसिद्ध श्री दुर्गा माता मंदिर रहा, जहां मंदिर सेवा समिति के तत्वावधान में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर विशेष आयोजन किया गया।
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श्री दुर्गा माता मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना
संपूर्णानगर स्थित प्रसिद्ध श्री दुर्गा माता मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंदिर प्रांगण को फूलों, ध्वज-पताकाओं और धार्मिक प्रतीकों से सुसज्जित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा व्यक्त की गई। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि यह आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि समाज को एकता और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ने का माध्यम भी है। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने राम मंदिर निर्माण की सफलता और देश में शांति सद्भाव की कामना की।
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1 कुंतल 51 किलो मोतीचूर लड्डुओं का प्रसाद वितरण
पूजा-अर्चना के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच 1 कुंतल 51 किलो मोतीचूर के लड्डुओं का भव्य प्रसाद वितरण किया गया। प्रसाद पाने के लिए लोगों में उत्साह और अनुशासन देखने को मिला। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने श्रद्धा भाव से प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति ने बताया कि यह प्रसाद राम भक्तों की आस्था का प्रतीक है और सेवा-भाव से सभी तक समान रूप से पहुंचाया गया। व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए स्वयंसेवकों की टीम तैनात रही, जिससे किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
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बड़ी संख्या में उमड़े श्रद्धालु, राम नाम से गूंजा क्षेत्र
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही। स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ आसपास के गांवों से भी लोग पहुंचे। मंदिर परिसर और आसपास के मार्गों पर राम नाम का जयघोष सुनाई देता रहा। श्रद्धालुओं ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक है। यह अवसर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी है और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूती प्रदान करता है।
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सनातन संस्कृति के लिए ऐतिहासिक क्षण
श्रद्धालुओं और वक्ताओं ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का मंदिर हर सनातनी के लिए गौरव का विषय है। 500 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद अयोध्या में राम मंदिर का साकार होना आस्था, संघर्ष और विश्वास की विजय का उदाहरण है। इस अवसर ने समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया है। वक्ताओं ने यह भी कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और नैतिक मूल्यों का केंद्र है।
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आयोजन समिति का संदेश: सेवा, एकता और संस्कार
मौके पर मौजूद श्री दुर्गा माता मंदिर सेवा समिति के सदस्यों ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सेवा, एकता और संस्कारों को मजबूत करते हैं। समिति ने भविष्य में भी धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन का संकल्प लिया। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझें और सकारात्मक कार्यों में भागीदारी निभाएं। समिति ने सभी सहयोगकर्ताओं, स्वयंसेवकों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। संपूर्णानगर में आयोजित यह रामोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का उत्सव रहा, बल्कि सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत उदाहरण भी बना। पूजा-अर्चना, विशाल प्रसाद वितरण और श्रद्धालुओं की सहभागिता ने आयोजन को यादगार बना दिया। राम मंदिर की दूसरी वर्षगांठ पर आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि सनातन परंपराएं आज भी समाज को जोड़ने और प्रेरित करने की शक्ति रखती हैं। ऐसे आयोजनों से धार्मिक मूल्यों के साथ-साथ सामाजिक समरसता को भी नई ऊर्जा मिलती है।
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