प्रदर्शन का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
Illegal Mazars in Meerut: मेरठ में शुक्रवार, 24 जनवरी 2026 को अवैध मजारों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ। यह प्रदर्शन अखिल भारतीय हिन्दू सुरक्षा संगठन के बैनर तले आयोजित किया गया। कार्यकर्ताओं ने सरकारी भूमि पर कथित अवैध निर्माण का मुद्दा उठाया। प्रदर्शन का उद्देश्य प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करना बताया गया। संगठन ने निष्पक्ष जांच और वैधानिक कार्रवाई की मांग रखी।
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Illegal Mazars in Meerut: नेतृत्व और आयोजन की रूपरेखा
प्रदर्शन का नेतृत्व संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने किया। उनके साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और ज्ञापन सौंपने की बात कही। आयोजकों के अनुसार प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा। स्थल पर पुलिस व्यवस्था भी तैनात दिखाई दी।
सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का आरोप
प्रदर्शन के दौरान सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया गया। संगठन ने दावा किया कि कई स्थानों पर मजारें बनाई गई हैं। इन निर्माणों को नियमों के विरुद्ध बताया गया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा जरूरी है। उन्होंने समान कानून के पालन की बात दोहराई।
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Illegal Mazars in Meerut: भंसाली रैपिड मेट्रो स्टेशन का उल्लेख
आरोपों में भंसाली रैपिड मेट्रो स्टेशन का नाम भी लिया गया।संगठन का कहना है कि स्टेशन परिसर के आसपास अवैध निर्माण हैं। उन्होंने इन मामलों में तत्काल जांच की मांग रखी। साथ ही, पुराने प्रशासनिक निर्णयों पर सवाल उठाए गए। हालांकि, संबंधित विभागों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया प्रतीक्षित बताई गई।
पूर्व अधिकारी पर लगाए गए आरोप
प्रदर्शन में एक पूर्व स्टेशन ऑफिसर पर आरोप लगाए गए। संगठन का दावा है कि अधिकारी ने कथित मजारों को संरक्षण दिया। इन आरोपों को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग की गई। आयोजकों ने कहा कि जांच से तथ्य सामने आएंगे। प्रशासनिक प्रक्रिया के पालन पर जोर दिया गया।
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1100 अवैध मजारों की जांच की मांग
संगठन ने मेरठ जिले में लगभग 1100 अवैध मजारों (Illegal Mazars in Meerut) का दावा किया। उन्होंने कहा कि वैध दस्तावेजों की जांच आवश्यक है। दस्तावेज न होने पर कार्रवाई की मांग रखी गई। यह मांग लिखित रूप में भी देने की बात कही गई। संगठन ने समानता और कानून के राज की बात दोहराई।
मुख्यमंत्री से बुलडोजर कार्रवाई की अपील
प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग की। उनका कहना है कि अवैध कब्जों पर सख्त कदम जरूरी हैं। बुलडोजर कार्रवाई को प्रतीकात्मक सख्ती बताया गया। संगठन ने नियमों के तहत कार्रवाई की बात कही। उन्होंने निष्पक्षता और पारदर्शिता पर जोर दिया।
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कानून, प्रशासन और प्रक्रिया
आयोजकों ने कहा कि कार्रवाई कानून के दायरे में होनी चाहिए। वे न्यायिक प्रक्रिया के सम्मान की बात करते दिखे। संगठन ने कहा कि किसी समुदाय को निशाना नहीं बनाया जाए। मुद्दा केवल सरकारी जमीन की सुरक्षा से जुड़ा बताया गया। प्रशासन से समयबद्ध निर्णय की अपेक्षा जताई गई।
स्थानीय प्रशासन की भूमिका
स्थानीय प्रशासन की ओर से फिलहाल औपचारिक बयान नहीं आया। पुलिस ने शांति व्यवस्था बनाए रखने पर ध्यान दिया। अधिकारियों ने स्थिति पर नजर रखने की बात कही। ज्ञापन मिलने की प्रक्रिया का उल्लेख भी किया गया। आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट पर निर्भर बताई गई।
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शहर की प्रतिक्रिया और जनभावना
प्रदर्शन के बाद शहर में चर्चा तेज हो गई। कुछ लोगों ने कार्रवाई की मांग का समर्थन किया। वहीं, कुछ नागरिकों ने संतुलन और संवाद की बात कही। सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दिखीं। विशेषज्ञों ने कानूनी रास्ते को सर्वोत्तम बताया।
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आगे की राह और संभावनाएं
अब निगाहें प्रशासनिक निर्णय पर टिकी हैं। जांच होने पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। दस्तावेजों की समीक्षा से तथ्य सामने आएंगे।
कानूनसम्मत कार्रवाई से विवाद का समाधान संभव है। संगठन ने शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने की बात कही। मेरठ में हुआ यह प्रदर्शन सार्वजनिक संपत्ति के मुद्दे को सामने लाता है। आरोपों की निष्पक्ष जांच समय की मांग है। कानून के दायरे में निर्णय विश्वास बढ़ा सकते हैं।
प्रशासनिक पारदर्शिता से विवाद सुलझने की उम्मीद है। आगामी दिनों में आधिकारिक प्रतिक्रिया अहम मानी जा रही है।
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