Bhairav Battalion: गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2026) के मौके पर, पद्म पुरस्कार 2026 की घोषणा के साथ पूर्व केरल CM वी. एस. अच्युतानंदन (मरणोपरांत) और शिबू सोरेन (मरणोपरांत) के नाम चर्चा में रहे; वहीं खिलाड़ियों में रोहित शर्मा और हरमनप्रीत कौर जैसे नाम भी सूची में शामिल बताए गए। इसी बीच भारतीय सेना के पुनर्गठन और आधुनिक युद्ध की तैयारी के तहत ‘Bhairav Battalion’ को ड्रोन-आधारित अभियानों के लिए तैयार किया जा रहा है जहां सेना के अनुसार 1 लाख से अधिक ड्रोन ऑपरेटरों का पूल बनाया गया है और नए बैटल-प्रोफाइल के मुताबिक ट्रेनिंग कराई जा रही है।

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क्या है ‘भैरव बटालियन’ और क्यों हो रही है चर्चा?
भारतीय सेना ने आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों को देखते हुए एक नया फोर्स-स्ट्रक्चर विकसित किया है। इसी क्रम में भैरव बटालियन को ऐसी यूनिट के रूप में तैयार किया जा रहा है, जिसमें चयनित जवानों को ड्रोन संचालन, निगरानी और टारगेटिंग जैसी क्षमताओं में प्रशिक्षित किया जाए। रिपोर्ट के मुताबिक, यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब केंद्र सरकार रक्षा बलों के पुनर्गठन पर जोर दे रही है। इसके अलावा, सेना का फोकस केवल पारंपरिक इन्फैंट्री भूमिका तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि टेक्नोलॉजी-ड्रिवन ऑपरेशन की ओर बढ़ाया जा रहा है जहां ड्रोन, रियल-टाइम इंटेलिजेंस और तेजी से निर्णय लेने की क्षमता महत्वपूर्ण हो जाती है।
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ड्रोन ऑपरेटरों का 1 लाख+ पूल क्या कहा गया है?
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना ने 1 लाख से अधिक ड्रोन ऑपरेटरों का एक पूल तैयार किया है। इन ऑपरेटरों का लक्ष्य ड्रोन को केवल अभ्यास तक सीमित न रखकर, वास्तविक ऑपरेशनल जरूरतों के मुताबिक इस्तेमाल करना बताया गया है जैसे दुश्मन क्षेत्र में ठिकानों/फॉर्मेशन की पहचान, निगरानी और टारगेटिंग। वहीं दूसरी ओर, इस बात पर भी जोर दिया गया है कि आज के संघर्ष ‘हाइब्रिड’ प्रकृति के हो सकते हैं, जहां टेक्नोलॉजी, सूचना और पारंपरिक लड़ाई तीनों साथ चलते हैं। इसी वजह से ड्रोन और अनमैन्ड सिस्टम्स को सैन्य क्षमता का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।

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रेगिस्तानी सेक्टर में ट्रेनिंग, ग्राउंड पर क्या दिखा?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, टीम ने दक्षिणी कमान के अंतर्गत रेगिस्तानी सेक्टर में नई भैरव बटालियनों में से एक का दौरा किया, जहां आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुसार स्पेशल ट्रेनिंग दी जा रही है। इसमें इन्फैंट्री रेजिमेंट्स से चुने गए जवानों को नई भूमिका के लिए तैयार करने की बात कही गई है खास बात यह है कि, रेगिस्तान जैसे इलाके में ऑपरेशन के लिए एंड्योरेंस, टेरेन-अंडरस्टैंडिंग और टेक्नोलॉजी का सही उपयोग निर्णायक माना जाता है। रिपोर्ट में यूनिट की “टेक्नोलॉजी-ड्रिवन” अप्रोच और स्वतंत्र रूप से मल्टी-डोमेन ऑपरेशन करने की तैयारी का उल्लेख भी है।
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‘Sons of the Soil’ कॉन्सेप्ट का उल्लेख
इसी क्रम में, रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि रेगिस्तानी भैरव बटालियन को ‘Sons of the Soil’ की अवधारणा पर खड़ा किया गया है, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय (राजस्थान) पृष्ठभूमि के जवानों के चयन का जिक्र किया गया है ताकि भाषा, मौसम और इलाके की समझ बेहतर रहे।
कितनी भैरव बटालियन बनीं और आगे की योजना क्या?
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सेना ने लगभग 15 भैरव बटालियन पहले ही खड़ी कर दी हैं, जिन्हें अलग-अलग फॉर्मेशनों में दोनों सीमाओं पर तैनाती/जिम्मेदारी के हिसाब से सौंपा गया है। साथ ही कुल करीब 25 तक बटालियन बनाने की योजना ‘निकट भविष्य’ में होने की बात कही गई है। इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी दावा है कि भैरव बटालियन पैरा स्पेशल फोर्सेस और नियमित इन्फैंट्री के बीच एक गैप को ब्रिज करने में मदद कर सकती है और इन्हें टैक्टिकल से ऑपरेशनल डेप्थ तक विशेष कार्यों में लगाया जा सकता है।
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बड़े पुनर्गठन में भैरव की भूमिका कहां फिट होती है?
सेना के व्यापक पुनर्गठन के संदर्भ में, रिपोर्ट में रुद्र ब्रिगेड्स का भी उल्लेख है जिन्हें ऑल-आर्म्स फॉर्मेशन बताया गया है, जहां इन्फैंट्री, मैकेनाइज़्ड यूनिट्स, टैंक्स, आर्टिलरी, स्पेशल फोर्स और अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स के साथ लॉजिस्टिक्स कॉम्बैट सपोर्ट को एक साथ जोड़ा जाता है। साथ ही, आर्टिलरी, मैकेनाइज़्ड इन्फैंट्री और आर्मर्ड कॉर्प्स को भी ड्रोन और अन्य आधुनिक उपकरणों से लैस करने की दिशा में काम होने की बात कही गई है।
अवसर और चुनौतियां, ड्रोन-आधारित युद्ध की नई हकीकत
अवसर की बात करें तो ड्रोन तकनीक से निगरानी, लक्ष्य पहचान और तेज़ प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ती है। इसके अलावा, सीमित समय में अधिक जानकारी जुटाकर निर्णय लेने में मदद मिल सकती है जो आधुनिक युद्ध में निर्णायक कारक बनता जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, चुनौतियां भी हैं जैसे इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, सिग्नल-जैमिंग, ड्रोन काउंटर-ड्रोन सिस्टम, और ऑपरेशनल सिक्योरिटी। यही कारण है कि कई सेनाएं ड्रोन क्षमताओं के साथ-साथ एंटी-ड्रोन उपायों पर भी समान रूप से काम कर रही हैं। (इस हिस्से में कोई अतिरिक्त दावा नहीं जोड़ा गया है | यह सामान्य सैन्य-तकनीकी संदर्भ है।)
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कुल मिलाकर, भैरव बटालियन और 1 लाख+ ड्रोन सेनाओं के पूल जैसी बातें यह संकेत देती हैं कि भारतीय सेना युद्धक्षेत्र की तकनीकी क्षमताओं के अनुसार खुद को ढालने की दिशा में सक्रिय है। रेगिस्तानी सेक्टर में प्रशिक्षण और यूनिट-एक्सपैंशन की योजना का उल्लेख भी इसी ओर इशारा करता है कि आने वाले समय में ड्रोन-आधारित क्षमताओं में सैन्य ऑपरेशन का अहम हिस्सा बन सकता है।
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