Shubhanshu Shukla Ashoka Chakra: 77वें गणतंत्र दिवस 2026 पर, पद्म पुरस्कार 2026 की सूची में रोहित शर्मा, हरमनप्रीत कौर और विजय अमृतराज जैसे खिलाड़ियों के नाम आने के बीच देश ने वीरता पुरस्कारों में भी बड़ी घोषणा देखी। इसी क्रम में Shubhanshu Shukla Ashoka Chakra खबर के तहत भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को सोमवार, 26 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कर्तव्य पथ पर देश का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता सम्मान अशोक चक्र प्रदान किया।
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यह सम्मान उन्हें 2025 में Axiom Mission-4 (Ax-04) के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा के दौरान चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में साहस, नेतृत्व और त्वरित निर्णय क्षमता के लिए दिया गया।
Shubhanshu Shukla Ashoka Chakra: कर्तव्य पथ पर सम्मान, और पुरस्कार का महत्व
अशोक चक्र भारत का सर्वोच्च शांतिकालीन सैन्य वीरता पदक माना जाता है। रक्षा मंत्रालय/पीआईबी के अनुसार 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर कुल 70 सैन्यकर्मियों के लिए गैलेंट्री अवॉर्ड्स की स्वीकृति दी गई, जिनमें 1 अशोक चक्र, 3 कीर्ति चक्र और 13 शौर्य चक्र शामिल हैं।
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खास बात यह है कि इस बार पुरस्कारों में अंतरिक्ष मिशन से जुड़े साहसिक प्रदर्शन को भी केंद्रीय स्थान मिला, जिससे ड्यूटी की परिभाषा केवल धरती तक सीमित नहीं रह जाती वहीं दूसरी ओर, यह बहस भी दिखी कि अंतरिक्ष मिशन में जोखिम को कैसे मापा जाए।
Shubhanshu Shukla Ashoka Chakra: शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा भारत के लिए ‘कठिन’ लेकिन ‘प्रेरक’ अध्याय
शुभांशु शुक्ला 2025 में Ax-04 मिशन के तहत ISS गए और विंग कमांडर राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष जाने वाले दूसरे भारतीय बने।अंतरिक्ष में काम करना रोमांचक जरूर है, लेकिन यह उतना ही चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा भी होता है सीमित संसाधन, माइक्रोग्रैविटी का दबाव, और हर निर्णय का सीधा प्रभाव मिशन सुरक्षा पर पड़ सकता है। इसी वजह से शुक्ला के “कूल-हेडेड” फैसलों, नेतृत्व और जिम्मेदारी को पुरस्कार का आधार बताया गया।
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ISS पर वैज्ञानिक प्रयोग स्पेस फार्मिंग तक पहुंचा भारत
खास बात यह है कि शुक्ला ने ISS पर कई वैज्ञानिक गतिविधियों के साथ कृषि/बीज-आधारित प्रयोग भी किए। रिपोर्टों के अनुसार ‘Sprouts/ISRO’ जैसी जांच में माइक्रोग्रैविटी में मेथी और मूंग के अंकुरण व वृद्धि पर काम हुआ, जिससे भविष्य के दीर्घकालीन मिशनों के लिए अंतरिक्ष में भोजन-उत्पादन की बढ़ोतरी मजबूत होती हैं।
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इसके अलावा, ISRO ने Ax-04 की सफल लॉन्चिंग और मिशन गतिविधियों को भारत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग, तकनीकी सीख और मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रमों को व्यावहारिक अनुभव मिलता है।
कीर्ति चक्र ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर को भी सम्मान
इसी क्रम में ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर को कीर्ति चक्र दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। नायर Ax-04 से जुड़े बैकअप/समर्थन भूमिका और समग्र योगदान के लिए चर्चा में रहे। यह संदेश भी महत्वपूर्ण है कि बड़े मिशन किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं होते टीमवर्क, बैकअप प्लानिंग और लगातार तैयार रहना उतना ही निर्णायक होता है।
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क्यों यह खबर ‘पॉजिटिव’ भी है और ‘रियलिस्टिक’ भी
यह सम्मान देश के लिए गौरव, प्रेरणा और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला है क्योंकि यह दिखाता है कि भारत के सैन्य और वैज्ञानिक कौशल अब नई सीमाओं तक पहुंच रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, यह खबर हमें यह भी याद दिलाती है कि अंतरिक्ष मिशन ग्लैमर से ज्यादा डिसिप्लिन, जोखिम-प्रबंधन और कठोर प्रशिक्षण की मांग करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार शुक्ला की यात्रा युवाओं के लिए प्रेरक उदाहरण बन सकती है कि सही तैयारी और लगातार मेहनत से असंभव लगने वाले लक्ष्य भी संभव हो सकते हैं।
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