Ajit Pawar Mahayuti: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का विमान रविवार सुबह 8.45 बजे बारामती हवाईअड्डे के करीब पहुंचने पर दुर्घटना का शिकार हो गया। इसका दस्तावेजीकरण भी सामने आया है। इसमें दिख रहा है कि पैसेंजर लैंडिंग के साथ तेज धमाका हुआ और विमान में आग के गोले दागे गए। इसमें अजित सहित पांच लोगों की मौत हो गई। प्लेन के वक्ता उप मुख्यमंत्री अजीत पवार बारामती के दौरे पर थे राष्ट्रीय और राज्य राजनीति में भी कई घटनाओं पर चर्चा हो रही है। महाराष्ट्र में अजित पवार महायुति यानि अजित पवार के नेतृत्व वाला एनसीपी धड़ा जुलाई 2023 में बीजेपी शिवसेना (महा-युति) के साथ सरकार में शामिल हुए, लेकिन यह बदलाव सहज नहीं रहा।
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Ajit Pawar Mahayuti: जुलाई 2023 सरकार में एंट्री, साथ में सवाल भी
जुलाई 2023 में अजित पवार ने शिवसेना-बीजेपी सरकार में शामिल होकर उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि, राजनीतिक हलकों में इसे सिर्फ पद का कदम नहीं, बल्कि NCP के भीतर लंबे समय से चल रही खींचतान और नई सत्ता-गणित की शुरुआत के रूप में देखा गया। वहीं दूसरी ओर, BJP के केंद्रीय नेतृत्व ने इस गठबंधन को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया, लेकिन राज्य स्तर पर रिश्ते को लेकर असहजता के संकेत समय-समय पर सामने आते रहे।
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Ajit Pawar Mahayuti: क्यों आसान नहीं था यह गठबंधन
अजित पवार का राजनीतिक कद प्रशासनिक अनुभव और राज्य के विभागों की समझ के कारण मजबूत माना जाता रहा है। इसके अलावा, महायुति सरकार के लिए यह सहयोग नीति-निर्माण और विभागीय समन्वय में उपयोगी रहा खासकर ऐसे समय में जब गठबंधन सरकारों में निर्णय-प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण हो जाती है। लेकिन खास बात यह है कि BJP और NCP (अजित गुट) के बीच पुरानी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा भी रही है। इसी कारण BJP के संगठनात्मक स्तर पर “स्वीकार्यता” को लेकर बहस चलती रही, और यही असहजता कई मौकों पर चर्चा का विषय बनी।
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Amit Shah की टिप्पणी और राज्य BJP की ‘अंडरकरंट‘ (Ajit Pawar Mahayuti)
एक रिपोर्ट के मुताबिक, अजित पवार के महायुति में आने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनका स्वागत करते हुए कहा था कि यह उनका Rightful Place है और उन्हें आने में देर लगी। इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि राज्य BJP में इस गठजोड़ को लेकर अंदरूनी तौर पर असहजता बनी रही।
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2024 लोकसभा के बाद गठबंधन पर बहस तेज (Ajit Pawar Mahayuti)
2024 के लोकसभा चुनावों के बाद महायुति के प्रदर्शन पर राजनीतिक विश्लेषण और गठबंधन की रणनीति को लेकर चर्चाएं बढ़ीं। इसी क्रम में कुछ दक्षिणपंथी राइट-विंग टिप्पणीकारों ने गठबंधन में NCP (अजित) के साथ आने को एक कारण बताया यानी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के स्तर पर पूरा अपनापन नहीं बन पाया। वहीं दूसरी ओर, राजनीतिक मजबूरियां भी थीं एक तरफ NCP के भीतर शक्ति-संतुलन, दूसरी तरफ BJP का राजनीतिक लक्ष्य कि विपक्षी ध्रुवीकरण और पुराने गठबंधनों की काट तैयार की जाए।
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Ajit Pawar Mahayuti : प्रशासनिक भूमिका,‘फील्ड नॉलेज’ और तेज़ काम की छवि
अजित पवार (Ajit Pawar Mahayuti) की पहचान एक ऐसे नेता की रही है जो प्रशासनिक फाइलों, योजनाओं और विभागीय कामकाज की बारीक समझ रखते हैं। उनके समर्थक उन्हें वर्किंग स्टाइल और ग्राउंड लेवल पकड़ के लिए जानते हैं। साथ ही, गठबंधन सरकार में ऐसे नेता का होना कई बार विभागीय तालमेल के लिए मददगार माना जाता है विशेषकर वित्त, कृषि, सहकारिता, जल संसाधन और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में।
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(Ajit Pawar Mahayuti): विवाद और जवाबदेही, मंत्रियों पर कार्रवाई के प्रसंग
गठबंधन राजनीति में नेतृत्व की परीक्षा सिर्फ नीति से नहीं, संकट-प्रबंधन से भी होती है। रिपोर्ट के अनुसार, (Ajit Pawar Mahayuti) अजित पवार को पिछले कुछ वर्षों में गठबंधन के दौरान दो मंत्रियों से जुड़े मामलों में कदम उठाने पड़े। ऐसे मामलों में सरकार और पार्टी दोनों पर जवाबदेही का दबाव बढ़ता है, और विरोधी दल इसे सीधे गठबंधन की नैतिकता व छवि से जोड़ते हैं।
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Ajit Pawar Mahayuti: नगर निगम चुनाव,जमीनी संगठन की असली परीक्षा
2024 के बाद राज्य में नगर निगम स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर (Ajit Pawar Mahayuti) राजनीतिक दबाव बढ़ा, क्योंकि BJP का विस्तार और संगठन-शक्ति स्थानीय स्तर पर सीधा असर डालती है। इस माहौल में NCP (अजित) के लिए अपनी ग्रासरूट मौजूदगी बचाए रखना चुनौती माना गया। इसी के चलते पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे क्षेत्रों में राजनीतिक रणनीतियां, समीकरण और प्रतिस्पर्धा तेज हुई। ऐसे चुनावों में कैडर बनाम नेटवर्क, स्थानीय मुद्दे बनाम राज्य नैरेटिव जैसी लड़ाइयां ज्यादा निर्णायक होती हैं।
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Ajit Pawar Mahayuti: आगे का संकेत,सहयोग भी, प्रतिस्पर्धा भी
कुल मिलाकर, (Ajit Pawar Mahayuti) जुलाई 2023 में अजित पवार का महायुति में शामिल होना सत्ता-गणित के लिहाज से बड़ा कदम था लेकिन इसे एक स्मूद मर्जर कहना मुश्किल रहा। इसके अलावा, गठबंधन में रहते हुए भी दोनों पक्षों के अपने-अपने राजनीतिक हित, स्थानीय चुनावों की मजबूरी और कार्यकर्ता-स्तर की स्वीकार्यता जैसे मुद्दे लगातार परीक्षा लेते रहे।
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