Union Budget 2026-27: केंद्रीय बजट 2026-27 में स्वास्थ्य मंत्रालय बजट को बड़ी प्राथमिकता देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के लिए ₹1,06,530.42 करोड़ का आवंटन किया। यह आवंटन वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान से करीब 10 प्रतिशत अधिक है। सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करना, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को गति देना और आम नागरिकों की इलाज लागत को कम करना है। पिछले 12 वर्षों में स्वास्थ्य बजट में कुल 194 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
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पिछले 12 साल में स्वास्थ्य बजट की बड़ी बढ़त
खास बात यह है कि 2014-15 की तुलना में स्वास्थ्य क्षेत्र में अतिरिक्त ₹70,349.75 करोड़ का निवेश किया गया है। इसके अलावा, इस निरंतर बढ़ोतरी ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा से लेकर सुपर-स्पेशियलिटी इलाज तक के ढांचे को मजबूत किया है। वहीं दूसरी ओर, यह संकेत भी देता है कि सरकार स्वास्थ्य को आर्थिक विकास की आधारशिला मानकर आगे बढ़ रही है।
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पीएम एबीएचआईएम के तहत अवसंरचना पर फोकस
इसी क्रम में, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-एबीएचआईएम) के लिए आवंटन 67.66 प्रतिशत बढ़ाकर ₹4,770 करोड़ किया गया है। इसमें केंद्रीय क्षेत्र घटक के लिए ₹570 करोड़ और केंद्र प्रायोजित योजना के तहत पूंजीगत व्यय ₹4,200 करोड़ शामिल हैं। साथ ही, इस राशि से क्रिटिकल केयर ब्लॉक, एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएं और जिला एवं उप-जिला अस्पतालों का विस्तार किया जाएगा, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा।
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पीएमएसएसवाई और मेडिकल शिक्षा को मजबूती (Union Budget 2026-27)
प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के तहत आवंटन बढ़ाकर ₹11,307 करोड़ किया गया है। यह पिछले संशोधित अनुमान से ₹407 करोड़ अधिक है। इसके अलावा, नए एम्स की स्थापना, मौजूदा संस्थानों के संचालन और सरकारी मेडिकल कॉलेजों के अपग्रेडेशन पर जोर दिया गया है। इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता बढ़ेगी और मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
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एनएसीओ और ब्लड ट्रांसफ्यूजन सेवाओं में विस्तार (Union Budget 2026-27)
वहीं दूसरी ओर, राष्ट्रीय एड्स और एसटीडी नियंत्रण कार्यक्रम (एनएसीओ) के लिए बजट 30.64 प्रतिशत बढ़ाकर ₹3,477 करोड़ किया गया है। खास बात यह है कि ब्लड ट्रांसफ्यूजन सेवाओं के लिए ₹275 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो 37.50 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
इससे रक्त सुरक्षा, उपलब्धता और गुणवत्ता मानकों को मजबूत किया जाएगा, जो आपातकालीन और नियमित चिकित्सा सेवाओं के लिए अहम है।
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स्वास्थ्य अनुसंधान और फार्मा सेक्टर को बढ़ावा (Union Budget 2026-27)
स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) का आवंटन 24 प्रतिशत बढ़कर ₹4,821.21 करोड़ से अधिक हो गया है। इसके अलावा, ‘बायो फार्मा शक्ति’ नामक ₹10,000 करोड़ की राष्ट्रीय पहल शुरू की गई है। इस पहल का उद्देश्य बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर और फार्मा अनुसंधान को प्रोत्साहित करना है। साथ ही, सीडीएससीओ की वैज्ञानिक क्षमता बढ़ाकर दवा विनियमन ढांचे को और मजबूत किया जाएगा।
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जिला स्तर पर ट्रॉमा केयर और मानव संसाधन विकास (Union Budget 2026-27)
खास बात यह है कि हर जिला अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे 24×7 आपातकालीन देखभाल सुनिश्चित होगी। इसके अलावा, संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों (एएचपी) और क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों के निर्माण पर भी फोकस है। सरकार ने 1.5 लाख कैरगिवर्स को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य तय किया है, जो भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ साबित होंगे।
सस्ती दवाएं और जेब खर्च में कमी (Union Budget 2026-27)
इसके अलावा, कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की दवाओं पर सीमा शुल्क में कमी की गई है। इससे इलाज की लागत घटेगी और मरीजों का जेब खर्च कम होगा। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) के लिए ₹9,500 करोड़ और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के लिए ₹39,390 करोड़ का आवंटन किया गया है, जिससे प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रमों को मजबूती मिलेगी।
‘विकसित भारत’ लक्ष्य की ओर एक कदम (Union Budget 2026-27)
कुल मिलाकर, यह बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को स्वास्थ्य के माध्यम से साकार करने की दिशा में एक सकारात्मक और मजबूत पहल है। बुनियादी ढांचा, अनुसंधान, कुशल मानव संसाधन और सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं पर केंद्रित यह रणनीति आने वाले वर्षों में देश की स्वास्थ्य तस्वीर को बदल सकती है।
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